ePaper

Carbon Tax: स्टील इंडस्ट्री से सबसे ज्यादा 12 प्रतिशत प्रदूषण, नेट जीरो के सिवा कोई रास्ता नहीं, रांची में बोले एक्सपर्ट

Updated at : 06 Sep 2025 8:37 PM (IST)
विज्ञापन
cabon tax news tushar kanti sahu at cidc-mecon conclave

कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते तुषार कांति साहू.

Carbon Tax News: भारत को अगर अपने उत्पादों का निर्यात यूरोपीय देशों को जारी रखना है, तो उसे नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करना ही होगा. अगर आपके उत्पाद में कार्बन का कोई भी निशान मिल गया, तो इसके लिए आपको कार्बन टैक्स देना होगा. फिर आप प्रतिस्पर्द्धा से बाहर हो जायेंगे और आपके उत्पाद की कीमत इतनी हो जायेगी कि आपको खरीदार नहीं मिलेंगे. इसलिए नेट जीरो ही विकल्प है.

विज्ञापन

Carbon Tax: स्टील इंडस्ट्री दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाला उद्योग है. भारत में कुल कार्बन का 12 प्रतिशत सिर्फ स्टील इंडस्ट्री से निकलता है. दुनिया के अन्य देशों में यह 9 प्रतिशत है. भारत को कार्बन उत्सर्जन में कटौती करना ही होगा. ग्रीन स्टील की ओर बढ़ना होगा. नेट जीरो के सिवा कोई रास्ता नहीं है. ये बातें तुषार कांति साहू ने रांची के मेकॉन कम्युनिटी हॉल में सीआईडीसी-मेकॉन की ओर से आयोजित ‘न्यू जेन पावर, इलेक्ट्रिकल एंड ऑटोमेशन सॉल्यूशन फॉर मेटल एंड माइनिंग इंडस्ट्री – वेंडर इम्पावरमेंट कॉन्क्लेव’ में कहीं.

कार्बन कटौती नहीं करने पर चुकानी होगी भारी कीमत

कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल (सीआईडीसी) के वरिष्ठ सलाहकार तुषार कांति साहू ने स्टील सेक्टर को सचेत करते हुए कहा कि अगर कार्बन कटौती के लक्ष्यों को भारत हासिल नहीं करता है, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी. भारतीय उद्योग को बहुत ज्यादा नुकसान होगा. खासकर स्टील, फर्टिलाइजर, इलेक्ट्रिक केबल, सीमेंट, एल्यूमिनियम उद्योग को इसका खामियाजा भुगतना होगा, क्योंकि इसका निर्यात महंगा हो जायेगा.

साहू ने कार्बन टैक्स से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया

देश के अलग-अलग हिस्से से सीआईडीसी-मेकॉन के इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए रांची आये उद्योगपतियों को उन्होंने बताया कि इसके क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं. टीके साहू ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन के लिए भारत बहुत ज्यादा जिम्मेदार नहीं है, फिर भी उसने कार्बन कटौती का एक लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे हमें हासिल करना ही होगा. इसके सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

भारत में बनी चीजों का निर्यात हो जायेगा महंगा

सीआईडीसी के विशेष सलाहकार ने कहा कि अगर नेट जीरो के लक्ष्य को भारत ने हासिल नहीं किया गया, तो उसे कार्बन टैक्स चुकाने के लिए तैयार रहना होगा. इसकी वजह से भारत में बनी चीजों का निर्यात महंगा हो जायेगा. जहां हम अपने उत्पादों का निर्यात करेंगे, अगर वहां के लोकल मार्केट में इससे सस्ता मिलेगा, तो भारत के उत्पादों को खरीदार नहीं मिलेंगे. ऐसे में उद्योगों पर अलग तरह का संकट आयेगा.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

निर्यात टैक्स के बराबर देना होगा Carbon Tax

सेल के पूर्व निदेशक (कॉमर्शियल) टीके साहू ने कहा कि अगर यूरोपीय देशों को निर्यात किये जाने वाले उत्पादों में कार्बन मिला, तो जितना टैक्स आप जमा करते हैं, उसका डबल आपको देना होगा. यानी निर्यात टैक्स के बराबर कार्बन टैक्स का भी भुगतान करना पड़ेगा. ऐसे में आपकी चीजें महंगी हो जायेंगी और आप मुनाफा नहीं कमा पायेंगे. इसलिए कार्बन कटौती जरूरी है.

जनवरी 2026 से लागू हो जायेगा CBAM

साहू ने उद्योगपतियों को बताया कि यूरोपीय देशों ने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए CBAM (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मेकेनिज्म) तैयार किया है. जनवरी 2026 से CBAM अमल में आ जायेगा और उसके बाद भारतीय कारोबारियों के लिए यूरोप में अपना सामान निर्यात करना महंगा पड़ेगा.

कार्बन कटौती के साथ कार्बन लीकेज भी रोकना होगा

उन्होंने कहा कि आपको सिर्फ कार्बन कटौती ही नहीं करनी है, कार्बन लीकेज भी रोकना होगा. कहा कि यह जानना जरूरी है कि यूरोपीय संघ उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (ईयू ईटीएस) के तहत, कार्बन लीकेज के महत्वपूर्ण जोखिम वाले औद्योगिक प्रतिष्ठानों को उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को समर्थन देने के लिए विशेष उपचार प्राप्त होता है.

क्या है कार्बन लीकेज?

साहू ने कहा कि कार्बन लीकेज उस स्थिति को कहते हैं, जब जलवायु नीतियों से संबंधित लागतों के कारण, व्यवसायी अपने उत्पादन को कम उत्सर्जन प्रतिबंधों वाले अन्य देशों में ट्रांसफर कर देते हैं. इससे उनके कुल उत्सर्जन में वृद्धि हो सकती है. उन्होंने बताया की CBAM ने 250 डॉलर प्रति टन कार्बन टैक्स का भुगतान करना होगा. कोई भी कंपनी ऐसा नहीं करना चाहेगी.

कॉन्क्लेव में ये कंपनियां हुईं शामिल

  • एडवांस पावर कंट्रोल लिमिटेड
  • इनफिनाइट अपटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • जोस्ट इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड
  • एनआईडीईसी इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • वी-मार्क इंडिया लिमिटेड
  • लाइवलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स
  • आदर्श कंट्रोल एंड ऑटोमेशन प्राइवेट लिमिटेड
  • नेलुम्बो टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड
  • हिताची हाई-रेल पावर इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड
  • बीसीएच
  • सी एंड एस

इसे भी पढ़ें

‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर रांची में हुआ मंथन, शामिल हुईं देश की ये बड़ी कंपनियां

आप समस्या बतायें, हम समाधान देंगे, सीआईडीसी-मेकॉन के कॉन्क्लेव में बोले पीआर स्वरूप

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola