प्रभात खबर से खास बातचीत में बोलीं वृंदा करात- हेमंत सोरेन के साथ हुआ गलत

वामपंथ के सामने चुनौतियों पर श्रीमती करात ने कहा कि पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स में हम सीटों की संख्या के हिसाब से पीछे गये हैं. जहां कभी हमारे 60 ज्यादा एमपी हुआ करते थे, वहां अभी हमारे सिर्फ चार पर आ गये.
करीब पांच दशक से भारतीय राजनीति में वामपंथ की आवाज बुलंद करनेवाली माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य व पूर्व सांसद वृंदा करात बुधवार को प्रभात खबर संवाद में पहुंचीं. विचारधारा व मूल्यों की राजनीति की प्रतीक हैं वृंदा करात. लंदन में प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ लेफ्ट की धारा से जुड़ने वाली वृंदा करात ने इसकी धार मजबूत की हैं. वृदा करात ने प्रभात खबर संवाद कार्यक्रम में निजी जिंदगी के कुछ अनछुए पहलुओं का जिक्र किया, तो वामपंथ की चुनौती और भावी राजनीति पर बेबाक अपने विचार रखे.
रांची : प्रभात खबर संवाद कार्यक्रम में वृंदा करात ने झारखंड के वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम पर कहा : झारखंड में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ गलत हुआ है. इसकी हम निंदा करते हैं. हमारी सेंट्रल कमेटी की बैठक में भी हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी व इसके बाद दिल्ली में बैठक कर भाजपा लीडरों द्वारा इस्तेमाल किये गये शब्दों पर चर्चा हुई. भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी पार्टी की लड़ाई है. भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के अपने तरीके होते हैं. आप साबित करो, चार्जशीट दो, फिर गिरफ्तार कर जेल भेजो. पर यहां आपने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जहां तक हेमंत सरकार के कामकाज का सवाल है, तो कुछ मुद्दों पर सकारात्मक पहल की गयी है. मिसाल के तौर पर वन पट्टा को लेकर. हालांकि ग्रास रूट पर जितना होना चाहिए था, नहीं हो पाया है.
वामपंथ के सामने चुनौतियों पर श्रीमती करात ने कहा कि पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स में हम सीटों की संख्या के हिसाब से पीछे गये हैं. जहां कभी हमारे 60 ज्यादा एमपी हुआ करते थे, वहां अभी हमारे सिर्फ चार पर आ गये. राजनीति में बदलाव भी एक कारण है, लेकिन आप मेरी बात करें, तो मेरे दिल में हताशा जैसी कोई चीज नहीं है. क्योंकि मैं विश्वास करती हूं अपनी विचारधारा पर. जिस रास्ते में मैं चल रही हूं,वह गलत नहीं है. उन्होंने कहा कि वाम विचारधारा पर जबरदस्त हमला हो रहा है. जाति और धर्म की राजनीति हो रही है. इससे हम समझौता नहीं कर सकते. ऐसे में वाम विचारधारा को लोगों के बीच लेकर जाना गंभीर चुनौती है.
दूसरी बात यह है कि अब पहचान की पॉलिटिक्स चल रही है. हम जन पहचान की पक्षधर हैं. झारखंड में वामदलों का विस्तार नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा हम झारखंड में बहुत पीछे नहीं हैं. आदिवासियों के मुद्दे को लेकर संघर्ष में वामदल व लाल झंडा के साथी का नजदीकी जुड़ाव है. झारखंड में बहुत सारे नौजवान आदिवासी साथी वामदल के साथ जुड़ रहे हैं. इसमें महिलाएं भी शामिल हैं. आनेवाले चुनाव में भाजपा की चुनौती के संबंध में उन्होंने कहा कि वे अब तक 50 प्रतिशत वोट नहीं ला पाये हैं. इतना आसान नहीं होगा बहुमत लाना. जनता को बरगलाया नहीं जा सकता है. महंगाई, बेरोजगारी, जनता की असल परेशानी ही मुद्दे और इसका निराकरण ही उनकी गारंटी है. आप सेल्फी क्लिक करके यह सारी चीजें भुला देंगे, यह नहीं होगा. इंडिया गठबंधन में तकरार और सीट शेयरिंग के सवाल पर हमारी पार्टी की तो शुरू से समझ थी कि प्रदेश के आधार पर सीट शेयरिंग को लेकर डिस्कशन होना चाहिए. बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, केरल में यह काफी हद तक हो गया है. कांग्रेस और हम बंगाल में शुरू से अलग थे.
यह काफी प्रासंगिक सवाल है, क्योंकि यह बात बिल्कुल सही है. हम लोगों की समझ यही है कि अगर कोई यह सोचे कि हमारे नेतृत्व में या उसके नेतृत्व में हम चलेंगे, तो फिर यह मामला गड़बड़ है. अब झारखंड में किसके नेतृत्व में आगे जायेंगे? झारखंड में तो जेएमएम है. कांग्रेस एक नेशनल पार्टी है, तो कोऑर्डिनेशन के लिए एक समझ जरूर थी. किसी एक पार्टी के नेतृत्व में ये प्रयास चल रहे हैं, यह बात सही नहीं है. क्योंकि अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टियों का असर है.
हर पार्टी और उनके नेताओं को भाजपा तोड़ने के लिए टारगेट कर रही है. हर पार्टी को विचारधारा के आधार पर उनका बचाव करना है. मैं तो कांग्रेस को कोई सलाह नहीं दे सकती, लेकिन हिंदुत्व को लेकर एक बात जरूर कहूंगी कि किसी और की विचारधारा की नकल कर, नरमपंथी रुख अपना कर आप खड़ा नहीं हो सकते. आप ठीक उसकी नकल कर आगे नहीं बढ़ सकेंगे..
आज किसान दिल्ली मार्च कर रहे हैं. आप मोदी सरकार की गारंटी की बात कर रहे हैं. आप बताइए कि आपने एमएसपी की गारंटी को आज तक लागू नहीं किया. अब जब किसान ढाई साल बाद मार्च कर रहे हैं, तो आप हर जगह बैरिकेड कर रहे हैं. ड्रोन से उनके ऊपर टीयर गैस के गोले बरसा रहे हैं.
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By Prabhat Khabar News Desk
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