JPSC Student Protest: छात्रों के बीच पहुंचीं बॉलीवुड एक्ट्रेस कुनिका सदानंद, आंदोलन को दिया समर्थन
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में मीडिया से बात करतीं बॉलीवुड एक्ट्रेस कनिका सदानंद. फोटो: प्रभात खबर
बॉलीवुड अभिनेत्री और अधिवक्ता कुनिका सदानंद रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में पहुंचीं. उन्होंने छात्रों की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार से संवेदनशीलता से समाधान निकालने का आग्रह किया.
रांची से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट
JPSC Student Protest: रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री और अधिवक्ता कुनिका सदानंद आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में पहुंचीं. उन्होंने छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों को जायज बताया. कुणिका सदानंद ने कहा कि नौकरी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के साथ संवाद कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करनी चाहिए.
सरकार को संवेदनशीलता से निकालना चाहिए समाधान
कुनिका सदानंद ने कहा कि उन्हें लगता है कि झारखंड सरकार केंद्र सरकार की तुलना में अधिक संवेदनशील है. ऐसे में सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के जरिये समाधान निकाला जा सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार छात्रों को 10 से 15 दिन का समय देकर उनकी मांगों पर ठोस तरीके से विचार करे. उनका कहना था कि आंदोलन को लंबा खींचने के बजाय सरकार को परिणाम निकालने की दिशा में काम करना चाहिए.
सीआईडी की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
छात्रों की मांगों और जांच के मुद्दे पर कुनिका सदानंद ने कहा कि यदि किसी मामले में गिरफ्तारियां हुई हैं, तो सीआईडी की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच एजेंसी ने पहले सही तरीके से काम नहीं किया, तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. उन्होंने छात्रों द्वारा सीबीआई जांच की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि यह मांग अपनी जगह हो सकती है, लेकिन उन्हें आशंका है कि जांच की प्रक्रिया बदलने से मामला और लंबा खिंच सकता है.
मुंबई से आंदोलन को फॉलो कर रही थीं अभिनेत्री
कुनिका सदानंद ने बताया कि वह काफी समय से मुंबई से झारखंड के छात्र आंदोलन को फॉलो कर रही थीं. झारखंड आने के बाद उन्होंने आंदोलन स्थल पर पहुंचने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उनकी मेहमाननवाजी की, उनसे भी उन्होंने कहा कि वह छात्रों के प्रदर्शन में जरूर जाना चाहती हैं. इसके बाद वह आंदोलन स्थल पर पहुंचीं और छात्रों से बातचीत की.
दिल्ली और झारखंड के आंदोलन में बताया अंतर
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और झारखंड के आंदोलन के बीच अंतर बताते हुए कुनिका सदानंद ने कहा कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे, क्योंकि वह देश की राजधानी और केंद्र का प्रमुख स्थान है. वहीं झारखंड में बाहर से लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन स्थानीय स्तर पर छात्रों को अच्छा समर्थन मिल रहा है. उन्होंने कहा कि झारखंड में चल रहा संघर्ष कोई नया मामला नहीं है, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि काफी पुरानी है.
झारखंड गठन के बाद के सवालों का किया जिक्र
कुनिका सदानंद ने कहा कि झारखंड के गठन के पीछे स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की भी बड़ी भूमिका रही है. उनके अनुसार, राज्य बनने के बाद रोजगार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल अब भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि इस समस्या की जिम्मेदारी केवल मौजूदा सरकार पर डालना उचित नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में ये मुद्दे बने रहे हैं.
एक साथ वैकेंसी निकालने की व्यवस्था पर सवाल
अभिनेत्री ने सरकारी नौकरियों की बड़ी संख्या में एक साथ रिक्तियां जारी करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि उनकी राय में एक साथ बड़ी संख्या में वैकेंसी घोषित करने के बजाय नियमित तरीके से नियुक्तियों की प्रक्रिया होनी चाहिए. उन्होंने आशंका जताई कि बड़ी संख्या में पद एक साथ घोषित होने पर भ्रष्टाचार या राजनीतिक दबाव की गुंजाइश बढ़ सकती है. उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल या हर महीने उपलब्ध रिक्तियों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए.
रद्द परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को उम्र में छूट देने की मांग
रद्द हुई परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर कुनिका सदानंद ने उम्र में छूट देने की बात कही. उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं थी और परीक्षा रद्द होने के कारण उन्हें दोबारा प्रक्रिया में शामिल होना पड़ रहा है, उन्हें उम्र सीमा में राहत मिलनी चाहिए. उनके मुताबिक, ऐसे अभ्यर्थियों को व्यवस्था की खामी की कीमत नहीं चुकानी चाहिए.
इसे भी पढ़ें: 'हेमंत सोरेन बड़े भाई... निकालेंगे आभार यात्रा', जानें CM आवास घेराव पर छात्रों ने क्या कहा?
आंदोलन की आवाज लोगों तक पहुंचाने की कोशिश
कुनिका सदानंद ने कहा कि उनके पास जितनी भी पहचान और सामाजिक कार्यों से जुड़ा अनुभव है, उसका इस्तेमाल वह छात्रों की आवाज को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए करना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी आंदोलन और छात्रों की मांगों की जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंच सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बात पर चर्चा नहीं करना चाहतीं कि कौन बॉलीवुड से आंदोलन में आया और कौन नहीं आया. उनके अनुसार, हर व्यक्ति अपनी परिस्थितियों और व्यस्तताओं के अनुसार निर्णय लेता है.
इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: सीएम हाउस के घेराव पर अड़े आंदोलनकारी छात्र, एडीएम-एसडीएम पहुंचे मनाने
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










