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स्कूल टीचर से झारखंड की सियासत में ऐसे हुई बाबूलाल की इंट्री, पहले मुख्यमंत्री बनने तक का किस्सा है रोचक

Updated at : 11 Jan 2023 1:39 PM (IST)
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स्कूल टीचर से झारखंड की सियासत में ऐसे हुई बाबूलाल की इंट्री, पहले मुख्यमंत्री बनने तक का किस्सा है रोचक

बाबूलाल मरांडी कुछ सालों तक विश्व हिंदू परिषद के सचिव भी रहे. साल 1991 में वे पहली बार भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन दिग्गज नेता शिबू सोरेन से हार गये.

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झारखंड की राजनीति के अध्याय में बाबूलाल मरांडी का अगर जिक्र न हो तो वो पुस्तक अधूरा है. जब अलग राज्य बना तो बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बनें. आज वे 65वें साल में प्रवेश कर गये हैं. बाबूलाल का जन्म 11 जनवरी 1958 को हुआ था. कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही वे आरएसएस की विचारधारा से प्रभावित होकर जुड़ गये. संघ से पूरी तरह से जुड़ने से पहले वे गांव के ही एक स्कूल में अध्यापक थे.

बाबूलाल मरांडी कुछ सालों तक विश्व हिंदू परिषद के सचिव भी रहे. साल 1991 में वे पहली बार भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन दिग्गज नेता शिबू सोरेन से हार गये. लेकिन साल 1998 उनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. 1998 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पार्टी की कमान सौंपी, और उसी साल उन्होंने शिबू सोरेन को हरा दिया. जिसके बाद उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के कैबिनेट में मंत्री बनाया गया.

साल 2000 में जब झारखंड का गठन हुए तब वे राज्य के पहले मुख्यमंत्री बनें. उनके हाथ में सत्ता तो आ गयी लेकिन राज्य के सामने उस वक्त कई चुनौतियां थी. बाबूलाल ने न सिर्फ इन समस्याओं को समझा बल्कि उन सभी का अच्छी तरह से निवारण करने की पहल की.

खासकर के उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम किया. उन्होंने राज्य की छात्राओं के लिए न सिर्फ साइकल की व्यवस्था करायी बल्कि ग्राम शिक्षा समिति बनाकर स्थानीय विद्यालयों में पारा शिक्षकों की बहाली भी की. उनके ही कार्यकाल में हर गांव पंचायत में स्कूल बनने की शुरुआत हुई. उस वक्त राज्य में सड़क व्यवस्था भी अच्छी नहीं थी. उन्होंने हर गांव को सड़क से जोड़ने का काम किया.

2006 में बनाई थी नई पार्टी

2004 के लोकसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी इकलौते ऐसे शख्स थे, जो झारखंड में भाजपा की ओर से चुनाव जीते थे. हालांकि इसके दो साल बाद यानी 2006 में उन्होंने भाजपा से अलग होने का फैसला किया और झारखंड विकास मोर्चा’ नाम से नई राजनीतिक पार्टी बना ली. इसके बाद भाजपा के पांच विधायक भी अपनी पार्टी छोड़कर इसमें शामिल हो गए. फिर कोडरमा उपचुनाव में वे निर्विरोध चुन लिए गए.

कई बड़े नेताओं ने दी शुभकामनाएं

आपको बता दें कि उनके जन्म दिन के अवसर पर कई बड़े नेताओं ने शुभकामनाएं दी है. कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने लिखा कि झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं.बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकीनाथ से आपके स्वस्थ, और दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आदरणीय श्री बाबूलाल मरांडी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. भगवान से कामना करता हूं कि आप सदैव स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु रहे.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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