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सीएम हेमंत सोरेन से आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो की अपील, कहा- खुद पैसे खर्च कर वापस लौट रहे प्रवासी मजदूरों को जल्द भुगतान करे राज्य सरकार

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और विधायक दल के नेता सुदेश कुमार महतो.
आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और विधायक दल के नेता सुदेश कुमार महतो.
फोटो : ट्विटर.

रांची : आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और विधायक दल के नेता सुदेश कुमार महतो ने दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों (Migrant workers) की हालत पर चिंता जतायी है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील करते हुए कहा कि ट्रकों, बसों और अन्य गाड़ियों से घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों को सरकार लौटने में उनके द्वारा खर्च की गयी राशि का जल्द भुगतान करें.

सुदेश महतो ने कहा है कि राज्य के बाहर से निजी खर्च पर झारखंड के मजदूर जत्थे में वापस आ रहे हैं. इसमें एक- एक मजदूर भाई को दो से पांच हजार रुपये वहन करना पड़ रहा है. कई मजदूर घर से पैसे मंगाकर वापस लौट रहे हैं. घर के लोग कर्ज लेकर पैसे भेज रहे हैं. इसलिए सरकार को इस मामले में संवेदनशील तरीके से आगे बढ़कर उनके वापसी का खर्च उठाना चाहिए. साथ ही सरकार ये सूचनाएं सार्वजनिक करे कि कहां से और किन- किन तारीखों को प्रवासी मजदूर लौट सकेंगे. इसके अलावा कब- कब और किन- किन स्टेशनों से रेलगाड़ियां चलने की अनुमति दी गयी है.

उन्होंने कहा कि खुद सरकार ने इसकी जानकारी दी है कि लगभग 7 लाख प्रवासी मजदूरों ने घर लौटने के लिए निबंधन कराया है. विभिन्न समाचार माध्यमों जो जानकारी मिल रही है उस मुताबिक अब तक 1.5 लाख ही लोग घट लौट सके हैं. जाहिर है अब भी 5.5 लाख लोग देश के दूसरे हिस्सों में फंसे हैं. लॉकडाउन के 50 दिन से अधिक होने की वजह से उनके सामने रहने व खाने की दिक्कतें सबसे अधिक हो गयी है. राज्य सरकार को योजनाबद्ध तरीके से उनके भोजन की व्यवस्था करनी चाहिए.

अगले कुछ दिनों तक देश के अलग- अलग हिस्सों से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें झारखंड आने वाली हैं. सरकार को इसकी सूचना जारी करनी चाहिए. मजदूरों को भी समय- समय पर सूचित करना चाहिए, ताकि मजदूर घबराहट और बेचैनी के बीच जैसे- तैसे घर वापसी के लिए नहीं निकलें. प्रवासी मजदूरों में घर लौटने के लिए परिवहन की अनिश्चितता को भी दूर करना जरूरी है.

सुदेश महतो ने कहा कि सरकार मजदूरों को यह भी बताए कि आनेवाले किस दिन ट्रेन किस स्टेशन से चलेगी, ताकि बाहर फंसे मजदूर आश्वस्त हो सकें कि उनकी वापसी की बारी भी सुनिश्चित है, जबकि यह सुनिश्चित नहीं होने से मजदूर सड़कों पर निकल जा रहे हैं.

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