रांची. रिम्स की जमीन पर अवैध कब्जा से जुड़े मामले की जांच बुधवार से एसीबी की टीम ने शुरू की. इस दौरान बड़गाईं अंचल कार्यालय, रजिस्ट्री ऑफिस जाकर जांच की गयी. इस क्रम में जमीन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज मांगे गये. एसीबी अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच में आये तथ्यों और बयान के अलावा दस्तावेज के आधार पर संबंधित दोषी लोगों को चिह्नित किया जायेगा. इन दोषी लोगों की भागीदारी से ही रिम्स की अधिग्रहित जमीन का म्यूटेशन और रजिस्ट्री निजी लोगों के नाम पर हुई. जांच में आये तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक से ली जानकारी
एसीबी की एक टीम ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ हिरेंद्र बिरुआ और संपदा पदाधिकारी डॉ शिव प्रिये से पूरी जानकारी ली. उनसे पूछा गया कि रिम्स की कितनी जमीन पर अतिक्रमण है और कितने पर अभियान चलाकर खाली कराया गया. यह भी पूछा गया कि अतिक्रमण से पूर्व नोटिस जारी किया गया या नहीं. नोटिस चस्पा कराते वक्त की प्रक्रिया (फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी) अपनायी गयी या नहीं. इसके बाद एसीबी की टीम अधिग्रहण और म्यूटेशन से संबंधित दस्तावेज अपने साथ ले गयी. टीम ने रिम्स की जमीन पर बसे उन लोगों के भी बयान लिये, जिनके घर अतिक्रमण में आने से टूट चुके हैं. यह जानकारी लेने की कोशिश हुई कि किसने जमीन की बिक्री थी. रजिस्ट्री और म्यूटेशन कैसे किया गया और इसमें कौन-कौन शामिल थे.
एसीबी टीम ने दस्तावेज किये हासिल
बड़गाईं अंचल कार्यालय से भी अतिक्रमण, म्यूटेशन और मुआवजा से जुड़े दस्तावेज एसीबी टीम लेकर गयी. अपार्टमेंट और कैलाश कोठी से संबंधित दस्तावेज के साथ फ्लैट और अन्य भवन मालिकों से भी पूछताछ कर उनसे दस्तावेज लिये गये. ज्ञात हो कि एसीबी ने हाइकोर्ट के निर्देश पर रिम्स की जमीन पर अवैध कब्जा से संबंधित मामले में अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है. इसकी जांच के लिए अलग- अलग टीम टीम बनायी गयी है. अब एसीबी ने दोषियों तक पहुंचने के लिए मामले की जांच शुरू कर दी है, ताकि उनका पता लगाकर कार्रवाई की जा सके.
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