सादा हुक्मनामे वाली जमीन की रसीद अब नहीं कटेगी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 May 2017 6:34 AM (IST)
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रांची: एक जनवरी 1946 के पूर्व की केवल निबंधित दस्तावेज वाली जमीन की ही रसीद कटेगी. जिनके पास निबंधित दस्तावेज नहीं होगी, उनकी रसीद नहीं कटेगी. यानी सादा हुक्मनामा से प्राप्त जमीन की रसीद नहीं कटेगी. एक जनवरी 1946 के पूर्व की निबंधित या बंदोबस्त जमीन की रसीद काटने के लिए उपायुक्तों को पत्र भेज […]
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रांची: एक जनवरी 1946 के पूर्व की केवल निबंधित दस्तावेज वाली जमीन की ही रसीद कटेगी. जिनके पास निबंधित दस्तावेज नहीं होगी, उनकी रसीद नहीं कटेगी. यानी सादा हुक्मनामा से प्राप्त जमीन की रसीद नहीं कटेगी. एक जनवरी 1946 के पूर्व की निबंधित या बंदोबस्त जमीन की रसीद काटने के लिए उपायुक्तों को पत्र भेज दिया गया है. इसके साथ ही 1956 से लगातार जिस जमीन की रसीद कट रही है, उसकी भी रसीद निर्गत होगी.
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस मुद्दे पर विभागीय सलाहकार के सुझावों की कॉपी सारे डीसी को उपलब्ध करा दिया है. इसके तहत ही अभी रसीद कटेगी. फिलहाल सारी जमीनों की रसीद निर्गत करने की सिस्टम लॉक है. ऐसे में एनआइसी को भी इन जमीन का लॉक खोलने को कहा गया है. लॉक खुलने के बाद ही इन जमीन की रसीद निर्गत हो सकेगी. ऐसे में इस प्रक्रिया में अभी कुछ समय और लगेगा. इसके बाद ही इन जमीन के मालिकों को राहत मिलेगी. शेष बंदोबस्त जमीन के बारे में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है.
क्या है सादा हुक्मनामा : जमींदारी प्रथा के दौरान जमींदार सादा हुक्मनामा या निबंधित दस्तावेज द्वारा जमीन बंदोबस्त करते थे. बड़ी संख्या में लोगों को सादा हुक्मनामा से जमीन दिया गया है. यानी इसे रजिस्टर्ड नहीं कराया गया. लोग इसका रेंट भी जमींदार को देते थे. जमींदारी प्रथा हटने के बाद सरकार को रेंट देने लगे.
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