रांची: जल संसाधन विभाग बहुद्देशीय स्वर्णरेखा परियोजना से जुड़ी खरकई बायीं मुख्य नहर का निर्माण अब नहीं करेगा. इस नहर से सिंचाई नहीं होनी है तथा इसका निर्माण सीतारामपुर डैम तक पानी पहुंचाने के लिए किया जाना था. पहले बने डीपीआर व डिजाइन के बाद अब देखा जा रहा है कि संबंधित नहर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि पर्याप्त ढुलाव (गुरुत्वाकर्षण) के जरिये अपने आप पानी नहीं बहेगा.
डैम तक पानी पहुंचाने के लिए इसे कुछ स्थानों पर पंप करना होगा. चूंकि इस नहर से पेयजल का पानी लिया जाना है, इसलिए जन संसाधन विभाग ने इसे पेयजल व स्वच्छता विभाग को ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है. यानी यदि पेयजल विभाग जरूरत समझे, तो इसका निर्माण कराये या फिर छोड़ दे.
उधर, चांडिल दायीं मुख्य नहर का निर्माण भी रोका जा सकता है. यह नहर बनाने से कितना लाभ होगा तथा इसे बनाने में क्या व्यावहारिक कठिनाई है, इसके लिए एक टीम बना कर सर्वे किया जा रहा है. दरअसल इस नहर के मार्ग में जंगल है. वहीं इसके रास्ते में कुछ पहाड़ों को भी काटना होगा. इसी के बाद सर्वे टीम का गठन किया गया है. बनाने में परेशानी व खर्च अधिक हुआ तथा इसकी तुलना में लाभ कम दिखा, तो इस नहर का निर्माण भी नहीं होगा. दरअसल जल संसाधन विभाग स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना का कार्य अब किसी भी तरह लटकाना नहीं चाहता है. यानी जो काम होना है, वह किया जायेगा और जो काम फंसाने वाला है, उसे छोड़ा जाये. गौरतलब है कि सन 1978 में शुरू (विश्व बैंक संपोषित करीब 129 करोड़ लागतवाली) हुई यह परियोजना वर्तमान में 6613.74 करोड़ की हो गयी है. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को यह आश्वासन दिया है कि करीब 99 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता वाली यह परियोजना 31 मार्च 2018 तक पूरी कर ली जायेगी. इसी परियोजना का एक घटक ईचा डैम भी काम पूरा होने में एक बड़ी बाधा है. इस डैम तथा इसकी नहरों के निर्माण में जन विरोध एक बड़ी समस्या है.
विभाग देगा प्रजेंटेशन
स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना का अहम हिस्सा ईचा डैम बनेगा या नहीं, यह निर्णय अब जनजातीय सलाहकार परिषद (ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल या टीएसी) करेगी. इससे पहले टीएसी की उप समिति ने डैम व इसके निर्माण पर हो रहे जन विरोध के कारण डैम का निर्माण रोक देने का प्रस्ताव दिया था. अभी टीएसी ने अपनी अोर से कुछ नहीं कहा है. अब जल संसाधन विभाग डैम के संबंध में टीएसी के समक्ष प्रेजेंटेशन देगा. परिषद को वैधानिक पहलू के अलावा डैम निर्माण से होनेवाले लाभ तथा इसका निर्माण न होने से होनेवाले नुकसान की जानकारी दी जायेगी. विभागीय सूत्रों के अनुसार, टीएसी के साथ विभागीय बैठक की तिथि अभी तय नहीं है. ईचा डैम दो जिला प सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावां के अंतर्गत आता है. जल संसाधन विभाग के अनुसार, डैम निर्माण से कुल 87 गांव प्रभावित होंगे. इनमें से 26 गांव पूरी तरह तथा शेष आंशिक रूप से जलमग्न होंगे. डूब क्षेत्र होने सहित अन्य कारणों से डैम व इसकी नहर के निर्माण को लेकर जन विरोध होता रहा है. ईचा डैम निर्माण की कुल लागत का करीब 74 फीसदी झारखंड को तथा 26 फीसदी ओड़िशा को वहन करना है.
क्या होगा डैम व नहर निर्माण से
ईचा डैम तथा इसकी दोनों नहरों के माध्यम से संबंधित जिलों के हजारों हेक्टेयर खेतों को पानी मिलेगा. वहीं नगर निकायों तथा उद्योगों को भी इससे सालाना करीब 740 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा. डैम के पास पनबिजली (हाइडल पावर) घर भी बनना है, जिससे आठ मेगावाट बिजली पैदा होगी, जो स्थानीय जरूरत को पूरी करेगी.
स्वर्णरेखा प्रोजेक्ट
विभिन्न घटक विवरण
चांडिल डैम चांडिल में डैम
चांडिल बायीं मुख्य नहर 127.8 किमी लंबी
चांडिल दायीं मुख्य नहर 33.74 किमी लंबी
गालुडीह बराज गालुडीह में बराज
गालुडीह दायीं मुख्य नहर 65.56 किमी लंबी
गालुडीह बायीं मुख्य नहर 56.04 किमी लंबी
ईचा डैम ईचा-चलिआंवा में
ईचा बायीं मुख्य नहर 19.75 किमी लंबी
ईचा दायीं मुख्य नहर 30.21 किमी लंबी
खरकई बराज खरकई नदी पर
खरकई बायीं मुख्य नहर 2.50 किमी लंबी
खरकई दायीं मुख्य नहर 29.83 किमी लंबी
