धनबाद रिंग रोड के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गयी जमीन का मुआवजा गरीब आदिवासियों से हड़पने के लिए बिचौलियों ने तरह-तरह के हथकंड़े अपनाये़ पूरा दुहाटांड गांव ठगा गया़ गांव से बिचाैलिये चार करोड़ से अधिक हड़प चुके हैं. गांव के पढ़े-लिखे नौजवानों को बहलाने-फुसलाने के लिए शराब का भी सहारा लिया़ आदिवासियों को डेढ़ करोड़ तक मुआवजा मिलना था़ पर इनकी जमीन भी चली गयी और पैसा भी नहीं मिला़ कई स्तरों पर मुआवजा वितरण में हुई अनियमितता की जांच की गयी, लेकिन उन गरीब परिवारों को न्याय नहीं मिला़ ये परिवार आज अपनी बदहाली को कोस रहे है़ं दुहाटांड के आदिवासी अफसर और दलालों के दगा-फरेब में सबकुछ लुटा चुके है़ं ग्रामीण बेबस है़ं प्रभात खबर ऐसे ही पीड़ित परिवारों की व्यथा छाप रहा है़.
दुहाटांड से लौट कर आनंद मोहन
देवराज मुरमू दुहाटांड के चंद पढ़े-लिखे नौजवानों में एक है़ एक समय वह बेहतर पेंटर भी था़ रिंग रोड निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण और उससे मिलनेवाला मुआवजा ही उसके लिए अभिशाप बन गया़ रिंग रोड में देवराज की जमीन गयी और बिचौलियों ने उसे शिकंजे में ले लिया़ देवराज की 69 डिसमिल जमीन अधिग्रहित हुई थी़ इसके लिए उसे दो किस्तों में 1़ 49 करोड़ रुपये मिलने थे. देवराज ने बताया : विपिन कुमार राव मेरे पास भी आया था़ गांव के सब लोग कागज पर अंगूठा लगा कर दे रहे थे़ विपिन ने कहा था कि पैसे जल्द मिल जायेंगे़ इसलिए मैंने भी कागजात पर हस्ताक्षर कर दिये़ देवराज ने बताया : विपिन राव और दूसरे लोगों से जब भी पैसे मांगता, तो मुझे धनबाद ले जाया जाता़ होटल में खिलाया-पिलाया जाता और जाते समय कभी 10 तो कभी 15 हजार रुपये दे देते़ बिचौलियों ने अब तक उसे करीब डेढ़ लाख रुपये दिये़ इस बीच उसे शराब की लत लग गयी़ अब वह हमेशा शराब पीकर बेसुध रहता है़ यह पूछने पर कि क्या उम्मीद है कि पैसे मिलेंगे, वह फिल्मी डायलॉग बोलता है, कहता है : अरे अब क्या़ अब तो डेट पर डेट और डेट पर डेट़.
यहां बहुत लोग आये़ पुलिसवाले आये, निगरानी के लोग आये, लेकिन हमें उम्मीद नहीं है़ जिसको पैसे लेकर भागना था, भाग गया़ देवराज की बेबसी देख कर गांववाले भी हताश है़ं उसके जैसा पढ़ा-लिखा नौजवान बेकार हो गया़ यह पूछने पर कि उसने तो इंटर तक की पढ़ाई की है, कहीं नौकरी क्यों नहीं करता, देवराज बताता है : नौकरी कहां है, बताइये़ हम मजदूरी कर लेते हैं, यही ठीक है़ देवराज के घरवालों के सपने भी बिचौलियों के काले-कारनामों के भेंट चढ़ गये़ अब परिवार के सामने संकटों से जूझने के अलावा कुछ नहीं बचा़
देवराज मुरमू की जमीन व मुआवजा का फैक्ट शीट
मौजा दुहाटांड धनसार- खाता संख्या-108, 83, प्लॉट- 893,894,895,1010
मुआवजा : पहला किस्त-4320000 दूसरा किस्त: 10584000
जोरापोखर पैक्स धनसार में खाता संख्या- 200298 से एकाउंट खुला़
खाता खोलनेवाले पहचानकर्ता : विपिन कुमार राव
देवराज मुरमू के खाता से किसने की निकासी : स्वप्न मंडल, अभि कुमार, राकेश मंडल, सूरज गुप्ता, राेहित प्रताप, विपिन कुमार, विपिन कुमार राव.
केस स्टडी-02
दलालों के चक्कर में नहीं फंसी सुरुमणी, तो पट्टीदारों को फंसा कर हड़प लिये 1़ 19 करोड़
दुहाटांड की सुरुमणी एक मात्र ऐसी महिला है, जो दलालों की चक्कर में नहीं फंसी़ सुरुमणी के पास भी बिचौलिये पहुंचे थे़ उसे भी सादे कागज में अंगूठा लगाने काे कहा गया़ सुरुमणी के पति बेंगलुरु में मजदूर करता है़ सुरुमणी बताती है : अरुण चंद महतो नाम का एक व्यक्ति मेरे पास आया था़ उसने जमीन के कागजात की जेरोक्स कॉपी मांगी़ सुरुमणी ने कहा कि वह सादे कागज या चेक पर कैसे अंगूठा लगा सकती है़ दलालों को लग गया कि यहां दाल नहीं गलनेवाली है़ इसके बाद दलालों ने उसके पट्टीदारों को फंसाया़ सीताराम मरांडी और सुकलाल मरांडी दो पट्टीदार है़ं इसके बाद सीताराम मरांडी और सुकलाल मरांडी के नाम 65 डिसमिल जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करायी गयी़ इसमें सुरुमणी की जमीन का भी हिस्सा था़.
दोनों ही लोगों का मुआवजा 1़ 19 करोड़ रुपया बना़ सीतराम मरांडी और सुकलाल मरांडी के सारे चेक पर दलालों ने हस्ताक्षर कर पैक्स से पैसे उठा लिये़ इसकी जानकारी सुरुमणी को मिली़ वह भागी-भागी अंचल कार्यालय पहुंची़ उसे अंचल कार्यालय में बताया गया कि तुम्हारा पैसा उठा लिया गया है़ सुरुमणी ने बताया कि उसने कभी चेक में हस्ताक्षर नहीं किया है, तो फिर पैसे कैसे उठा लिये गये़ दरअसल बिचौलियों ने अंचल कार्यालय की सांठ-गांठ से अधिग्रहित जमीन की वशंवली सूची तैयार ही नहीं की थी़ सुरुमणी कहती है कि पति को काम से बहुत पैसा मिलता नहीं है़ हमें उम्मीद थी कि कुछ पैसा मिलेगा, तो घर बनाने और बच्चों के पढ़ाई में खर्च करेंगे़
सीताराम मरांडी और सुकलाल मरांडी की जमीन और मुआवजा का फैक्ट फाइल
सीताराम मरांडी- खाता -127, प्लॉट- 667,666, अधिग्रहित जमीन – 38़5, मुआवजा मिला तीन किस्म में : 2376000,3240000, 2700000
जोरा पोखर पैक्स में खाता सं- 20079 से एकाउंट खोला गया़
पहचानकर्ता बने – अनिल कुमार
पैक्स से सीताराम मरांडी के पैसे निकालने वालों का नाम : रोहित मिश्रा, मुकेश मिश्रा, सुनील कुमार, सौरभ कुमार, महेश राव, अशोक राय, गोपाल रजक, मोहन गुप्ता, राकेश गुप्ता, आलोक बरियार
सुकलाल मरांडी- खाता-112, 70, प्लॉट- 729, 900, मुआवजा दो किस्तों में मिला- 1296000, 2376000
जोरा पोखर पैक्स में खाता संख्या 20016 से एकाउंट खुला़
खाता खुलवाने वाले पहचानकर्ता- आलोक बरियार
पैक्स से सुकलाल मरांडी के पैसे निकालने वालों का नाम : अनिल शर्मा, रवि दास, सुभाष मंडल, रविंद्र सिंह, आलोक बरियार, राजीव सिंह़
बिचौलिये व रकेट चलानेवाले पुलिस की पकड़ से बाहर
धनबाद मेें दुहाटांड के गरीब आदिवासियों का चार करोड़ से ज्यादा मुआवजा हड़पनेवाले बिचौलिये और रैकेट चलानेवाले माफिया पुलिस की पकड़ से बाहर है़ं आदिवासी रैयतों के मुआवजा घोटाले के मामले में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी नारायण विज्ञान प्रभाकर ने 18-4-15 को धनसार थाने में मामला दर्ज कराया़ धारा 406, 409, 420, 467, 468,120 और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाना तीन और चार के तहत मामला दर्ज कराया गया़ इस मामले में अब तक महज 14 छोटे बिचौलियों की गिरफ्तारी हुई है़ 47 लोग अब भी पुलिस पकड़ से बाहर है़ं