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Political News : झारखंड में 700 करोड़ का हुआ शराब घोटाला : रघुवर दास

Updated at : 25 May 2025 12:52 AM (IST)
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Political News : झारखंड में 700 करोड़ का हुआ शराब घोटाला : रघुवर दास

रघुवर दास ने पूछा : विधायकों-मंत्रियों के रायपुर दौरे का खर्च किसने उठाया. सीबीआइ से जड़ में जाकर शराब घोटाले की जांच करने की मांग की.

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रांची/जमशेदपुर. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड में 600-700 करोड़ रुपये का शराब घोटाला हुआ है. इसमें सरकार के मुखिया की भी अहम भूमिका है. अपने सचिव को फंसा कर वे खुद पाक-साफ रहना चाहते हैं, जो संभव प्रतीत नहीं होता है. एसीबी द्वारा सरकार के इशारे पर सचिव विनय चौबे को जेल भेज कर सीबीआइ व इडी की कार्रवाई से बचाने का प्रयास किया गया है. श्री दास ने एग्रिको स्थित आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सीबीआइ से आग्रह किया है कि वह इस मामले की जड़ तक पहुंचे. सीबीआइ यह भी जांच करे कि 22 से 31 अगस्त 2022 तक मुख्यमंत्री समेत कई मंत्री-विधायक किसके खर्च पर विशेष बस व जहाज से छतीसगढ़ गये थे. वहां जिस महंगे होटल में ठहरे थे, उसका भुगतान किसने किया? श्री दास ने दावे के साथ कहा कि छत्तीसगढ़ के शराब माफिया, जिन्होंने झारखंड में अपनी शराब नीति लागू करायी, उन्होंने झारखंड सरकार के मंत्रियों व विधायकों के रायपुर टूर के खर्च का भुगतान किया. यह मामला पहले ही रायपुर में सीबीआइ ने दर्ज कर छत्तीसगढ़ शराब कांड की जांच शुरू कर दी है. इसलिए तय है कि झारखंड भी इसकी चपेट में आयेगा और जांच आगे बढ़ेगी.

सरकार भी मान रही 2018 की शराब नीति सर्वश्रेष्ठ

रघुवर दास ने कहा कि झारखंड सरकार झारखंडी संस्कृति-विरासत को समाप्त करने की योजना बना रही है. मुख्यमंत्री चाहते हैं कि उनकी युवा पीढ़ी शराब पीकर मदहोश रहे. इसलिए रात के 11 बजे तक शराब दुकान खुलने का समय तय कर दिया है. श्री दास ने कहा कि हेमंत सरकार ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि रघुवर सरकार द्वारा 2018 में बनायी गयी शराब नीति ही सर्वश्रेष्ठ रही है. इसलिए वर्तमान नियमावली के निर्माण में 2018 की नियमावली को ही मुख्य आधार बनाया गया है. 2018 में इस नियमावली के लागू होने के बाद 2018-19 के 1082 करोड़ रुपये के राजस्व की तुलना में 2019-20 में राजस्व दोगुना होकर 2009 करोड़ रुपये हो गया था.

गांव-देहात में न खुले शराब दुकान

रघुवर दास ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शराब नीति पर एक बार फिर लोगों को गुमराह कर रहे हैं, जब उन्होंने कैबिनेट में शराब नीति को पारित कर दिया, तो वे फिर इसे टीएसी में लाकर लोगों में क्यों भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं. सरकार को यह बताना चाहिए कि कैबिनेट बड़ी है या टीएसी. वे सरकार से मांग करते हैं पहले तो गांव-देहात में शराब की दुकानें नहीं खुले, यदि खुलती भी हैं, तो उनकी संख्या नगण्य होनी चाहिए. सरकार को शराब बेचने से अच्छा है कि शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में गांव में काम कर झारखंडियों को मजबूत करे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJIV KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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