मैट्रिक परीक्षा 2013 का रिजल्ट लड़कों के नाम रहा. वर्ष 2012 में रिजल्ट में आयी गिरावट के बाद वर्ष 2013 में एक बार फिर से रिजल्ट बेहतर हुआ. गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष लगभग छह फीसदी अधिक विद्यार्थी पास हुए. पिछले तीन वर्षो में यह सबसे बेहतर रिजल्ट है. इस वर्ष लड़कों का रिजल्ट लड़कियों से बेहतर रहा. परीक्षा में शामिल 242822 लड़कों में से 75.32 फीसदी सफल रहे. वहीं लड़कियों की सफलता का प्रतिशत 70.84 प्रतिशत रहा. राजधानी के स्कूलों का रिजल्ट भी बढ़िया रहा. राजधानी राज्य भर में छठे स्थान पर रहा. रांची का रिजल्ट 76.12 फीसदी रहा. हजारीबाग राज्य भर में पहले स्थान पर रहा. राजधानी में इस बार भी गरीबी और मुफलीसी के बीच जिंदगी काट रहे गरीब अभिभावकों के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. ऑटो ड्राइवर मो अफजल अंसारी के बेटे सुल्तान ने पूरे रांची जिले में पहला स्थान लाया. वहीं वेल्डर का काम करनेवाले मो कलीम अंसारी के बेटे अफरोज ने रांची जिला में दूसरा स्थान हासिल करने का गौरव प्राप्त किया. स्टेट टॉपर शुभम के पिता भी पेशे से किसान हैं.
पूरा भरोसा था कि टॉपर बनूंगा : सुल्तान
रांची: मैट्रिक (झारखंड बोर्ड) की परीक्षा में जिला टॉपर बने हैं एलजी हाई स्कूल के सुल्तान अहमद. सुल्तान गरीब परिवार से है. पिता ऑटो ड्राइवर हैं. पर बेटे की सफलता ने गर्व से उनका सीना चौड़ा कर दिया है. सुल्तान का घर बूटी स्थित खिजूरटोला में है. अत्यंत साधारण घर. पर जैसे ही सुल्तान के जिला टॉपर बनने की खबर आयी, पड़ोसी व आसपास के अन्य लोगों का उनके घर आकर बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया. सुल्तान के दो भाई व इकलौती बहन सभी बेहद खुश हैं. सुल्तान ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि उसने जिस तरह से पढ़ाई की थी, उसे पूरा भरोसा था टॉपर बनने का. यह एक रोज की मेहनत नहीं थी. पूरे साल रोज ही छह से सात घंटे तक पढ़ाई की. पिता मो अफजल अंसारी ने कहा कि सुल्तान रात दो बजे तक जाग कर पढ़ाई करता था. अब सुल्तान मैकेनिकल इंजीनियर बनना चाहता है, तो हर संभव उसे पढ़ाने की कोशिश करूंगा.
वेल्डर का बेटा अफरोज सेकेंड टॉपर
रांची: यह एक सुखद संयोग है कि रांची में पहले दो स्थान पर दो मित्रों ने कब्जा जमाया. एलजी हाई स्कूल नेजाम नगर के सुल्तान अहमद को टॉपर होने का गौरव मिला, तो उसके मित्र अफरोज आलम को जिला में दूसरा स्थान मिला. दोनों एक ही मोहल्ले (बूटी स्थित खिजूर टोला) में रहते हैं. अफरोज के पिता पेशे से वेल्डर हैं. अफरोज ऑटो मोबाइल इंजीनियर बनना चाहता है. पिता मो कलीम अंसारी ने कहा कि बेटे की सफलता से वे बेहद खुश हैं. उन्होंने कहा कि अफरोज को बहुत ज्यादा सुविधाएं नहीं मिली, पर वह बचपन से ही मेहनती था. क्लास में हमेशा अच्छे अंक लाता था, इसलिए मुङो भरोसा था कि वह मैट्रिक की परीक्षा में भी बेहतर करेगा. कलीम ने कहा कि बेटे को आगे भी पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करेंगे. अफरोज ने कहा कि मैंने सेकेंड टॉपर बनने के बारे में नहीं सोचा था. बस ईमानदारी से मेहनत करता रहा और आज उसी का फल मिला है.
इंजीनियर बनना चाहती है वैशाली
रांची: स्कूल की टॉपर वैशाली कुमारी ने कहा कि वह विज्ञान विषय लेकर इंजीनियरिंग की पढ़ायी करना चाहती है. पिता की सिमेंट की दुकान है और मां गृहिणी हैं. उसने अपनी सफलता का श्रेय अपने अभिभावकों व स्कूल को देती है.

