बाघों के संरक्षण के लिए मिले 10 करोड़, फिर भी बाघों की संख्या 10 से घट कर हुई तीन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Jan 2015 6:05 AM
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रांची: झारखंड में चार साल में बाघ की संख्या 10 से घट कर तीन हो गयी है. संख्या में चार फीसदी कमी या अधिक होने का अनुमान भी है. भारत सरकार द्वारा जारी बाघ के सर्वे में यह जानकारी दी गयी है. पूरे देश में बाघ की संख्या में 30 फीसदी की वृद्धि हुई है. […]
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रांची: झारखंड में चार साल में बाघ की संख्या 10 से घट कर तीन हो गयी है. संख्या में चार फीसदी कमी या अधिक होने का अनुमान भी है. भारत सरकार द्वारा जारी बाघ के सर्वे में यह जानकारी दी गयी है. पूरे देश में बाघ की संख्या में 30 फीसदी की वृद्धि हुई है. भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने इसे जारी किया है. इसके अनुसार देश में 2010 में बाघों की अनुमानित संख्या कुल 1706 थी. 2014 में यह बढ़ कर 2226 हो गयी है.
राज्य में केवल पलामू टाइगर रिजर्व (बेतला) में ही बाघों के होने का अनुमान है. भारत सरकार ने इसे ही टाइगर रिजर्व घोषित किया है. इसके लिए केंद्र सरकार के नेशनल टाइगर रिजर्व ऑथिरिटी (एनटीसीए) से राशि मिलती है. इसका खर्च बाघों के संरक्षण पर होता है. पिछले सात साल में एनटीसीए ने झारखंड को करीब 10 करोड़ रुपये टाइगर रिजर्व पर खर्च करने के लिए दिया है.
नक्सली गतिविधियों के कारण नहीं दिखते बाघ
पलामू में पदस्थापित वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघ की संख्या कम दिखाये जाने के पीछे कई कारण हैं. एक तो पूरे पलामू टाइगर रिजर्व में पारा मिलिट्री के 12 कैंप बना दिये गये हैं. यहां अक्सर रोशनी रहती है. गोली चलती रहती है. पारा मिलिट्री फोर्स की गतिविधि के कारण इन इलाकों में दो-तीन साल से बाघों का मूवमेंट नहीं दिख रहा है. इसके अतिरिक्त बाघों की गणना करने आयी टीम ने टेरिटोरियल इलाके का दौरा नहीं किया.
उनसे कई बार आग्रह किया गया है कि टेरिटोरियल इलाके में जाकर बाघों की गिनती का प्रयास करें. इस बार पलामू टाइगर रिजर्व के कई ट्रैप कैमरा का फोटो भी नहीं भेजा जा सका था. एनटीसीए की टीम ट्रैप कैमरा की रिकार्डिग फिर मांग रही है.
अब तक नहीं बनी टाइगर फाउंडेशन की गवर्निग बॉडी
राज्य में टाइगर फाउंडेशन की गवर्निग बॉडी अब तक नहीं बनी है. करीब पांच साल के इंतजार के बाद फाउंडेशन का गठन राज्य में हो पाया है. इसका काम राज्य में बाघ बचाने के लिए किये जान ेवाले प्रयास की रूप-रेखा तय करना है.
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