Lok Sabha Chunav 2024: झारखंड में 1422 अतिसंवेदनशील व 9265 संवेदनशील बूथ, हर फेज के लिए चाहिए 216 कंपनी अर्द्धसैनिक बल

झारखंड में लोकसभा चुनाव में होगी ज्यादा सुरक्षा बलों की जरूरत.
2019 में हर फेज के लोकसभा चुनाव में झारखंड में 199 कंपनी अर्द्धसैनिक बलों की प्रतिनियुक्ति की गयी थी. 2024 में अतिसंवेदनशील व सामान्य बूथों की संख्या घटी है.
लोकसभा चुनाव 2024 में झारखंड में 13 मई से एक जून तक चार चरणों में चुनाव होगा. इस बार राज्य में 1422 अतिसंवेदनशील, 9265 संवेदनशील और 20256 सामान्य बूथों की संख्या होगी. हर फेज के चुनाव में 216 कंपनी अर्द्धसैनिक बलों की जरूरत पड़ेगी.
इसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआइएसएफ आदि शामिल रहेंगे. इसके अलावा झारखंड पुलिस के जैप की 68 कंपनी, आइआरबी की 34 कंपनी, एसआइआरबी की सात कंपनी और एसआइआरबी की 109 कंपनी के अलावा होमगार्ड की भी तैनाती होगी.
संवेदनशील बूथों की संख्या में इजाफा
2019 लोकसभा चुनाव में हर फेज के चुनाव में झारखंड में 199 कंपनी अर्द्धसैनिक बलों की प्रतिनियुक्ति की गयी थी. वर्ष 2019 की तुलना में 2024 लोकसभा चुनाव में अतिसंवेदनशील व सामान्य बूथों की संख्या में कमी आयी है. जबकि संवेदनशील बूथों की संख्या में इजाफा हुआ है. 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान 1861 अतिसंवेदनशील, 3470 संवेदनशील और सामान्य बूथों की संख्या 25994 थी.
- 2019 लोकसभा चुनाव में 199 कंपनी अर्द्धसैनिक बलों की हुई थी प्रतिनियुक्ति
- 2019 में 1861 अतिसंवेदनशील व 3470 संवेदनशील और सामान्य बूथों की संख्या 25994 थी
- 2019 की तुलना में 2024 में 439 अतिसंवेदनशील बूथ हुए कम, 5795 संवेदनशील बूथ बढ़े
- 2019 में 13 अति नक्सल प्रभावित जिले थे, 2024 में घटकर सिर्फ 8 अति नक्सल जिले रह गये
पुलिस विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा चुनाव 2024 में अतिसंवेदनशील 1422, संवेदनशील 9265 और सामान्य बूथों की संख्या 20256 होगी. यानी 2019 की तुलना में 2024 में अतिसंवेदनशील बूथों की संख्या 439 कम हो जायेगी. जबकि संवेदनशील बूथों की संख्या 5795 बढ़ जायेगी. वहीं 5738 सामान्य बूथ भी कम हो जायेंगे.
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इस बार 8 जिले अति नक्सल प्रभावित की श्रेणी में
2019 में 13 जिले अति नक्सल प्रभावित थे, जबकि लोकसभा चुनाव 2024 में अति नक्सल प्रभावित की श्रेणी में सिर्फ आठ जिलों को रखा गया है. इनमें चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सरायकेला, पश्चिम सिंहभूम और गिरिडीह जिला शामिल हैं. ज्ञात हो कि 2019 लोकसभा चुनाव के समय सेंसस 2011 के अनुसार झारखंड की आबादी 32966238 थी. जबकि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रोजेक्टेड आबादी 41471111 माना जा रहा है.
5 जिलों में 381 पोलिंग पार्टी को पहुंचाने के लिए 63 बार उड़ान भरेगा हेलीकॉप्टर
लोकसभा चुनाव 2024 में मतदान संपन्न कराने के लिए पांच जिलों लोहरदगा, गुमला, पश्चिम सिंहभूम, लातेहार व हजारीबाग में कुल 42 हेलीपैड बनाये गये हैं. इन हेलीपैड के जरिये कुल 381 पोलिंग पार्टी को बूथों पर ले जाने के लिए हेलीकॉप्टरों को 63 बार उड़ान भरनी होगी.
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2019 में 13 जिलों में बने थे 65 हेलीपैड
लोकसभा चुनाव 2019 में 13 जिलों लोहरदगा, गुमला, पश्चिम सिंहभूम, पलामू, लातेहार, गढ़वा, बोकारो, हजारीबाग, चतरा, गिरिडीह, रामगढ़, कोडरमा, दुमका व पाकुड़ में 366 पोलिंग पार्टी को पहुंचाने के लिए 65 हेलीपैड बनाये गये थे. पोलिंग पार्टी को बूथों पर पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों को 106 बार उड़ान भरनी पड़ी थी.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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