रांची : शहर में बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए बनी कमेटी
Updated at : 07 Feb 2020 9:21 AM (IST)
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रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा राजधानी रांची में उत्पन्न बिजली संकट पर नाराजगी व्यक्त करने के बाद गुरुवार को सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया. यह कमेटी बिजली की निर्बाध आपूर्ति पर नजर रखेगी. गुरुवार को जेबीवीएनएल मुख्यालय में वरीय अधिकारियों के साथ कमेटी की बैठक हुई. इसमें अधिकारियों ने शहर के अंदर […]
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रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा राजधानी रांची में उत्पन्न बिजली संकट पर नाराजगी व्यक्त करने के बाद गुरुवार को सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया. यह कमेटी बिजली की निर्बाध आपूर्ति पर नजर रखेगी. गुरुवार को जेबीवीएनएल मुख्यालय में वरीय अधिकारियों के साथ कमेटी की बैठक हुई. इसमें अधिकारियों ने शहर के अंदर निर्बाध (24 घंटे) बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये.
अधिकारियों ने कहा कि आम लोगों को बिजली समस्या का सामना न करना पड़े, इसका ध्यान रखें. इसके लिए शहर में पावर कट पर पूरी तरह नजर रखें और गंभीरता से लेकर खामियों को फौरन दूर करें. ट्रांसमिशन विंग के पदाधिकारियों से अनुरोध किया गया कि गर्मी के दिनों में ग्रिड में आवश्यक कार्य समय रहते पूरा कर लिया जाये, ताकि लोड शेडिंग की नौबत न आये. इसके अलावा पूरी तरह से बनकर तैयार बुढ़मू ग्रिड को फॉरेस्ट क्लियरेंस दिलाने के लिए जरूरी प्रयास करने पर जोर दिया गया.
200 केवीए क्षमता के 150 ट्रांसफॉर्मर की जरूरत : प्रभात खबर में केंद्रीय विद्युत भंडार में 200 केवीए के पावर ट्रांसफॉर्मर की किल्लत से संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद कमेटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए 200 केवीए क्षमता के 150 ट्रांसफॉर्मर की तत्काल जरूरत बतायी. इसके अलावा राजधानी के सेंट्रल स्टोर में लगभग 300-400 किलोमीटर एलटीएवी केबल और 4000 पीएसएस पोल की जरूरत बतायी.
जेबीवीएनएल मुख्यालय में कमेटी ने की बैठक, दिये कई सुझाव
ये हैं समिति के सदस्य
केके वर्मा : कार्यकारी निदेशक, जेबीवीएनएल
प्रवीण कुमार सिंह : महाप्रबंधक ट्रांसमिशन, रांची जोन
अमर नायक : महाप्रबंधक ट्रांसमिशन
संजय कुमार : महाप्रबंधक, जेबीवीएनएल रांची
ऋषि नंदन : जीएम, वाणिज्य, जेबीवीएनएल
कुमुद रंजन : विद्युत अधीक्षण अभियंता, ट्रांसमिशन सर्किल, रांची
प्रभात कुमार रंजन : विद्युत अधीक्षण अभियंता, वितरण प्रक्षेत्र, रांची
कम होगी ग्रिड से 33 केवी लाइन की दूरी : बैठक में यह बात सामने आयी कि रांची में जितने भी पावर सब स्टेशन हैं, उनकी ग्रिड से दूरी करीब 15 किलोमीटर से ज्यादा है. निर्बाध आपूर्ति के लिए सबसे पहले इस दूरी को कम किया जाना जरूरी है. अधिकारियों ने क्वालिटी पावर सुनश्चिति करने के लिए 33 केवी उच्च क्षमता वाली लाइन को कम कर शहर के अंदर ही ग्रिड सबस्टेशन बनाने पर जोर दिया.
राजधानी में चार गैस इंसुलेटेड पावर सब स्टेशन बनाने पर दिया जोर
राजधानी में चार गैस इंसुलेटेड पावर सब स्टेशन (जीआइएस) बनाने पर जोर दिया गया. जेबीवीएनएल और झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड इस काम को जल्द पूरा करेंगे. इनमें मोरहाबादी, अलबर्ट एक्का चौक, तुपुदाना और कटहल मोड़ शामिल हैं. इस सब स्टेशन के बनने से 33 केवी लाइन की दूरी काफी घट जायेगी. इसके बाद 24 घंटे बिजली मिल सकेगी.
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