रांची : रिम्स में डायटिशियन नहीं, नर्स तय करती हैं मरीजों का डायट

Updated at : 20 Jan 2020 9:02 AM (IST)
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रांची : रिम्स में डायटिशियन नहीं, नर्स तय करती हैं मरीजों का डायट

रांची : रिम्स में डायटिशियन नहीं, बल्कि नर्स ही मरीजों का डायट तय करती है. अस्पताल में भर्ती मरीजों के गुणवत्तापूर्ण डायट मुहैया कराने की जिम्मेवारी डायटिशियन की होती है. रिम्स में डायटिशियन के दो पद स्वीकृत हैं, जबकि एक डायटिशियन ही कार्यरत हैं. वह भी कभी वार्ड में नहीं आती. न ही मरीजों के […]

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रांची : रिम्स में डायटिशियन नहीं, बल्कि नर्स ही मरीजों का डायट तय करती है. अस्पताल में भर्ती मरीजों के गुणवत्तापूर्ण डायट मुहैया कराने की जिम्मेवारी डायटिशियन की होती है. रिम्स में डायटिशियन के दो पद स्वीकृत हैं, जबकि एक डायटिशियन ही कार्यरत हैं.
वह भी कभी वार्ड में नहीं आती. न ही मरीजों के डायट की ओर ध्यान देती हैं. इसके अलावा सरकार प्रति मरीज के डायट पर 100 रुपये प्रतिदिन खर्च करती है. इस तरह से एक महीना मेें करीब पांच लाख रुपये खर्च और एक साल में 60 लाख रुपये तक मरीजों के डायट के नाम पर एजेंसी को भुगतान किया जाता है. इसके बावजूद मरीजों को बीमारी के हिसाब से डायट नहीं मिलता है.
नर्स अपने हिसाब से मरीजों का डायट तय करती हैं. यानी सरकार मरीजों के डायट पर पैसा तो खर्च करती है, लेेकिन इस व्यवस्था की देखरेख करनेवाला कोई नहीं है. रिम्स के अधिकारी से लेकर डॉक्टर तक इससे बेपरवाह हैं.
क्या है नियम : नियम है कि वार्ड में भर्ती मरीज को कैसा खाना देना है, यह डायटिशियन को देखना है. उनको प्रतिदिन वार्ड का भ्रमण करना है, डॉक्टर से मिल कर मरीज को किस प्रकार व कैलोरी का डायट देना है, इसका निर्धारण करना है. मरीजाें को सही डायट मिल रहा है या नहीं, इसे देखने के लिए किचन कमिटी भी गठित है.
पर ऐसा चल रहा सिस्टम : रिम्स में नर्स जो कहती है, उसी अनुसार किचन स्टाफ मरीजों को खाना देते हैं. डॉक्टर मरीज को प्रतिदिन वार्ड में समय पर परामर्श देते हैं, लेकिन डायट कैसा हो, इस ओर ज्यादा गंभीर नहीं हैं. मरीज के परिजन अगर डॉक्टर से डायट के बारे में पूछते हैं, तो वह नर्स को सूचित कर देते हैं. रिम्स के एक विभागाध्यक्ष ने बताया कि सरकार मरीज के खाने पर पैसा तो खर्च करती है, लेकिन इसका फायदा नहीं होता है. मरीज को जैसा डायट मिलना चाहिए, वैसा नहीं दिया जाता है. डायट को व्यवस्थित करने की शिकायत प्रबंधन से की जाती है, ताे भी कोई सुनता नहीं है.
मरीज को बीमारी के हिसाब से डायट मिलना चाहिए. अगर नहीं मिल रहा है, तो गंभीर बात है. डायटिशियन का काम मरीजाें के बेड तक जाकर बीमारी के हिसाब से कैलोरी निर्धारित करना है. इसके हिसाब से किचन से डायट देना है. शीघ्र किचन कमिटी व डायटिशियन के साथ बैठक की जायेगी.
डॉ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक, रिम्स
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