सीवरेज-ड्रेनेज संबंधी याचिका पर सुनवाई, हाइकोर्ट ने कहा- रांची को चकाचक करना होगा
Updated at : 18 Jan 2020 8:05 AM (IST)
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महाधिवक्ता बोले : लोगों के आंदोलनों से योजनाओं को अमली जामा पहनाने में होती है कठिनाई खंडपीठ ने कहा : सरकार व्यापक जनहित में काम करे, विरोध को नियंत्रित करने के उपाय तलाशे रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को राजधानी में निर्माणाधीन सीवरेज-ड्रेनेज को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ […]
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महाधिवक्ता बोले : लोगों के आंदोलनों से योजनाओं को अमली जामा पहनाने में होती है कठिनाई
खंडपीठ ने कहा : सरकार व्यापक
जनहित में काम करे, विरोध को नियंत्रित करने के उपाय तलाशे
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को राजधानी में निर्माणाधीन सीवरेज-ड्रेनेज को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सीवरेज-ड्रेनेज के धीमी गति से निर्माण पर नाराजगी जतायी. प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद माैखिक रूप से कहा कि रांची राज्य की राजधानी है. यहां सीवरेज-ड्रेनेज तो होना ही चाहिए. कोर्ट जनहित का ख्याल रखती है. व्यापक जनहित को देखते हुए पटना की तरह राजधानी रांची को चकाचक कर देंगे. चाहे सरकार को विरोध का सामना क्यों नहीं करना पड़े. खंडपीठ ने कहा : सरकार चला रहे हैं, तो विवादों को कैसे नियंत्रित किया जाये, इस पर विशेष ध्यान होना चाहिए. व्यापक जनहित में सरकार को काम करना चाहिए.
खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि पूर्व के आदेश के आलोक में क्या-क्या कार्रवाई की गयी है? प्रथम चरण के तहत सीवरेज-ड्रेनेज का कितना काम पूरा हो गया है? सीवरेज-ड्रेनेज योजना पर सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया. इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने खंडपीठ को बताया कि निर्माणाधीन सीवरेज-ड्रेनेज योजना के प्रथम चरण का काम आधा भी पूरा नहीं हो सका है. संवेदक ने जैसे-तैसे काम को पूरा करने का प्रयास किया है. सीवरेज निर्माण का काम ठप है. अधूरे सीवरेज-ड्रेनेज के कारण लोग परेशान हैं.
कोर्ट ने सीवरेज-ड्रेनेज के धीमी गति से निर्माण पर जतायी नाराजगी, स्टेटस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया
रांची के सीवरेज-ड्रेनेज : अब तक क्या
10 साल लग गये सीवरेज-ड्रेनेज का डीपीआर बनाने में, 2006-2008 में हुआ तैयार
2015 में शुरू हुआ था निर्माण का काम, फेज-1 भी पूरा नहीं, 359.25 करोड़ खर्च का अनुमान
205 किमी सीवरेज पाइपलाइन व 207 किमी ड्रेनेज का निर्माण करना है पहले चरण में
बड़गाईं के लेम में 4.80 एकड़ भूमि पर 37 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण भी ठप
वार्ड संख्या-01, 02, 03, 04, 05, 32,33, 54 व 35 में सीवरेज-ड्रेनेज निर्माण का चल रहा था कार्य फेज-1 में बजरा, आइटीआइ, पिस्का मोड़, रातू रोड, कांके रोड, मोरहाबादी, हरिहर सिंह रोड, बरियातू, बूटी मोड़, बड़गाईं क्षेत्र आदि शामिल हैं
काम संतोषजनक नहीं होने पर संवेदक का एकरारनामा रद्द कर दिया
राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता अजीत कुमार ने खंडपीठ को बताया कि पहले चरण का काम चल रहा था. काम संतोषजनक नहीं होने पर संवेदक का एकरारनामा रद्द कर दिया गया. सीवरेज-ड्रेनेज के शेष तीन चरणों का काम सरकार के विभाग को करना है. राजधानी को विकसित करने के सवाल पर महाधिवक्ता श्री कुमार ने बताया कि झारखंड राज्य में स्थिति थोड़ी अलग है. राज्य में सीएनटी-एसपीटी एक्ट प्रभावी है. लोगों के आंदोलनात्मक रुख के कारण फ्लाइओवर जैसी योजनाओं को अमली जामा पहनाने में कठिनाई होती है. फिर भी जनहित में योजनाबद्ध तरीके से राज्य सरकार योजनाअों का कार्य कराने के लिए कृत संकल्प है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी अरविंदर सिंह देअोल ने जनहित याचिका दायर कर रांची में सीवरेज-ड्रेनेज के निर्माण की मांग की है.
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