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रांची : गार्ड ऑफ ऑनर देने की परंपरा को समाप्त करूंगा : मुख्यमंत्री

4 Jan, 2020 6:25 am
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रांची : गार्ड ऑफ ऑनर देने की परंपरा को समाप्त करूंगा : मुख्यमंत्री

रांची : राज्य में कहीं भी मुख्यमंत्री समेत किसी भी वीवीआइपी के दौरे पर पुलिसकर्मी उन्हें गार्ड अॉफ अॉनर देते हैं. झारखंड में यह परंपरा जल्द ही समाप्त हो सकती है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ऐसा इरादा जताया है. उन्होंने कहा है कि पिछले शासन द्वारा मुख्यमंत्री के हर दौरे पर निभायी जानेवाली इस परंपरा […]

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रांची : राज्य में कहीं भी मुख्यमंत्री समेत किसी भी वीवीआइपी के दौरे पर पुलिसकर्मी उन्हें गार्ड अॉफ अॉनर देते हैं. झारखंड में यह परंपरा जल्द ही समाप्त हो सकती है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ऐसा इरादा जताया है. उन्होंने कहा है कि पिछले शासन द्वारा मुख्यमंत्री के हर दौरे पर निभायी जानेवाली इस परंपरा को मैं जल्द समाप्त करने को कृतसंकल्प हूं.
दो जनवरी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सपरिवार रजरप्पा मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे. वहां पुलिसकर्मी उन्हें गार्ड अॉफ अॉनर देने के लिए तैयार थे.
उन्हें काफी देर से खड़ा रखा गया था. इसी दौरान बारिश होने लगी. मुख्यमंत्री मंदिर से खाली पैर ही निकले. उन्होंने हवाई चप्पल पहनी और गार्ड अॉफअॉनर लिया. इस पर कुछ लोगों ने गार्ड अॉफ अॉनर की परंपरा का पालन नहीं करने की बात कह सवाल उठाया.इस पर मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया फेसबुक पर तस्वीर जारी करते हुए जवाब दिया है.
श्री सोरेन ने लिखा है : इस तस्वीर को जहां कुछ लोग मेरी सादगी से जोड़ रहे हैं, वहीं इक्का-दुक्का लोग मुझे यह भी बता रहे हैं कि चप्पल पहन मैंने गार्ड
अॉफ अॉनर लेकर परंपरा का पालन नहीं किया. सच्चाई यह है कि पुलिस के जवान मेरे इंतजार में बारिश में काफी पहले से खड़े कर दिये गये थे. इसलिए
मैं जिस रूप में था, सबसे पहले उनका सम्मान कर उन्हें मुक्त करना आवश्यक था. दूसरी बात कि चप्पल-जूतों का रिवाज अंग्रेजों द्वारा बनायी गयी
दकियानूसी परंपरा है, जिसे मैं नहीं मानता.
चप्पल पहन गार्ड अॉफ अॉनर लेने पर सोशल मीडिया पर होती रही चर्चा
बोले मुख्यमंत्री
पुलिसकर्मी वीआइपी रूढ़िवादिता में समय व्यर्थ करने की जगह जनता की सेवा में लगें
चप्पल-जूता का रिवाज अंग्रेजों द्वारा बनायी गयी दकियानूसी परंपरा है, मैं इसे नहीं मानता
यह तसवीर दो जनवरी की है, जब मुख्यमंत्री रजरप्पा में गार्ड ऑफ ऑनर ले रहे थे.
1861 से चली आ रही परंपरा, ड्रेस कोड की बाध्यता नहीं
डीजी रैंक के एक अधिकारी ने बताया कि अंग्रेजों द्वारा बनाये गये 1861 के पुलिस एक्ट व मैनुअल के तहत मुख्यमंत्री व आलाधिकारियों को गार्ड ऑफ आॅर्नर दिया जाता है. गार्ड आॅफ आॅर्नर में शामिल पुलिस अधिकारियों व पुलिसकर्मियों के पूरे ड्रेस में रहने का प्रावधान है. मान्यता है कि सैल्यूट लेनेवाले
सिविल साइड के वीवीआइपी के सिर पर टोपी और पैरे में जूते होने चाहिए, पर ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.
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