संजय, रांची : राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला, नामकुम में केंद्र व राज्य सरकार के सहयोग से करीब 10 करोड़ के उपकरण लगेंगे. इसके लिए प्रयोगशाला में इनोवेशन का काम शुरू हो गया है. इन उपकरणों की सहायता से सब्जियों सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मौजूद कीटनाशक (पेस्टिसाइड) तथा चिकेन व मछली में मौजूद एंटी बायोटिक व हैवी मेटल की उपस्थिति का पता लगाया जा सकेगा.
उद्योगों के दूषित जल या अन्य प्रदूषित जलस्रोत वाले कृषि उत्पाद में विषाक्त तत्वों का पता लगाने में भी ये उपकरण सहायक होंगे. वहीं इनसे खाद्य तेल की जांच सहित किसी खाद्य में कोलेस्ट्रॉल, कलर, प्रिजर्वेटिव व एंटी अॉक्सीडेंट के स्तर की भी जांच हो सकेगी. अप्रैल-मई 2020 से जांच शुरू होने की संभावना है.
खाद्य निदेशालय के सूत्रों के अनुसार, नये उपकरणों के आ जाने के बाद आम लोगों को पूरी तरह सुरक्षित खाद्य उपलब्ध कराना संभव हो सकेगा. केंद्र सरकार की इकाई फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी अॉफ इंडिया (एफएसएसएआइ) ने तीन अति आधुनिक उपकरणों की खरीद, सात साल तक इन्हें संचालित करने के लिए मैनपावर तथा इस दौरान उपकरणों के मेंटेनेंस के लिए कुल 8.75 करोड़ रुपये आवंटित किया है. इसमें से 50 लाख रुपये इन उपकरणों को स्थापित करने के लिए मौजूदा जांच प्रयोगशाला के इनोवेशन सहित अन्य कार्यों पर खर्च होंगे. वहीं राज्य सरकार ने कुछ आधुनिक उपकरणों सहित एसेसरीज के लिए 3.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.
केंद्र सरकार से मिलने वाले अति आधुनिक उपकरण व इनके काम : इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमिटरी (हैवी मेटल व विषाक्त चीजों की पहचान), लिक्विड क्रोमोटोग्राफी डबल मास स्पेक्ट्रोमिटरी (कीटनाशक व एंटी बायोटिक की जांच) व अल्ट्रा वायलेट डबल मास स्पेक्ट्रोमिटरी (फूड एडेटिव्स जैसे कलर, प्रिजर्वेटिव तथा एंटी अॉक्सीडेंट तथा इनकी मात्रा की जांच).
इन उपकरणों की खरीद स्टेट फंड से होगी : गैस क्रोमोटोग्राफ, एटॉमिक एबजॉर्ब्शन फोटो मीटर, अल्ट्रा वायलेट स्पेक्ट्रो मीटर व हाई परफॉरमेंस लिक्विड क्रोमोटोग्राफी.
नोट : इनके अलावा स्टेट फंड से ही वाटर इंस्ट्रूमेंट, अोवेन, फरनेस, सेंट्रीफ्यूगल मशीन सहित अन्य उपकरणों की खरीद भी होगी. ये उपकरण जांच प्रयोगशाला को एनएबीएल (नेशनल एक्रिडियेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलेब्रेशन लेबोरेटरी) प्रमाण पत्र के लिए भी जरूरी हैं.
