सीबीआइ कोर्ट का फैसला : इंजीनियरिंग छात्रा से दुष्कर्म व हत्या मामले में दोषी को फांसी

इंजीनियरिंग छात्रा से दुष्कर्म व हत्या मामले में दोषी को फांसी रांची ने दिलाया अपनी बेटी को न्याय बीटेक की छात्रा के साथ हुई घटना के बाद पूरी रांची आक्रोशित हो उठी थी. 16 दिसंबर 2016 को घटना हुई और 17 दिसंबर को रांची के लोग इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर आये थे. महीनों […]
इंजीनियरिंग छात्रा से दुष्कर्म व हत्या मामले में दोषी को फांसी
रांची ने दिलाया अपनी बेटी को न्याय
बीटेक की छात्रा के साथ हुई घटना के बाद पूरी रांची आक्रोशित हो उठी थी. 16 दिसंबर 2016 को घटना हुई और 17 दिसंबर को रांची के लोग इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर आये थे. महीनों तक रांची के नागरिक सड़कों पर निकल कर अपनी बेटी के साथ हुई घटना के लिए न्याय की मांग करते रहे.
पुलिस मामले का खुलासा करने में पूरी तरह विफल रही थी. जनदबाव में सरकार ने आखिरकार यह मामला सीबीआइ को सौंपा और नतीजा आज सबके सामने है. रांची ने अपनी बेटी को न्याय दिला दिया. शहर को इस बात का सुकून तो मिला है, पर रांची को इस बात का अफसोस जरूर है कि इसी शहर में मारी गयी अपनी दूसरी बेटी सुचित्रा मिश्रा को न्याय दिलाने में वह विफल रही.
रांची : दोषी जघन्य मानसिकता वाला, फांसी से कम सजा काफी नहीं : अदालत
रांची : राजधानी की बूटी बस्ती में इंजीनियरिंग की छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में सीबीआइ कोर्ट ने दोषी 30 वर्षीय राहुल कुमार उर्फ राहुल राज उर्फ राज श्रीवास्तव उर्फ राॅकी राज उर्फ आर्यन उर्फ अंकित को सजा-ए-मौत दी है. शनिवार दिन के 11:40 बजे उसे चार अलग-अलग धाराओं में सजा सुनायी गयी. साथ ही चारों धाराओं में पांच-पांच हजार का जुर्माना भी लगाया गया.
इसके बाद जजमेंट की कॉपी और अन्य प्रक्रिया को पूरा करने में 1:30 बज गये. सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा ने अपने 95 पेज के फैसले में कहा : राहुल को तब तक फंदे पर लटकाया जाये, जब तक इसकी मौत न हो जाये. नियम के तहत अब सीबीआइ कोर्ट की रिपोर्ट के आधार पर अगले 15 दिनों में हाइकोर्ट सजा को कन्फर्म करेगा. फिर आगे की कार्रवाई चलेगी. इस संबंध में सीबीआइ कोर्ट की ओर से हाइकोर्ट को रिपोर्ट भेज दी गयी है.
इससे पूर्व फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा : सभी तथ्यों को देखने के बाद मुझे यह लगता है कि यह मामला रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस की श्रेणी में आता है.
न्याय के लिए फांसी की सजा जरूरी है. इससे कम कोई भी सजा पर्याप्त नहीं होगी. इस मामले में जो प्रताड़ना हुई है और इससे समाज पर जो असर पड़ा, ये कुछ ऐसे कारण हैं, जो यह दर्शाते हैं कि दोषी को फांसी की सजा दी जाये. इंजीनियरिंग छात्रा का दुष्कर्म व हत्या अाकस्मिक नहीं है, बल्कि पूरी प्लानिंग के तहत की गयी है. क्राइम करने के बाद बॉडी को लुब्रिकेंट डालकर जलाया है, जो बर्बरता को दिखाता है. दुष्कर्म में जो तरीका अपनाया गया है, वह बताता है कि दोषी कितनी जघन्य मानसिकता वाला है.
यह हाई लेवल क्राइम है. समाज व सोसाइटी की चेतना को इस जघन्य वारदात से सदमा लगा है. पटना में राहुल ने नाबालिग का रेप किया था. टीआइपी में पीड़िता ने इसे पहचाना था. चोरी सहित कई मामले इसके ऊपर हैं. यह पहचाना छिपाये रखता था. बेउर जेल में रह चुका है. वहां से श्राद्ध में पेरोल पर जाने के दौरान भाग गया था. इससे पता चलता है कि यह सीरीज ऑफ क्राइम में संलिप्त रहा है और इसके सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है.
अादतन अपराधी है, इसे फांसी दी जाये
सीबीआइ के सीनियर पीपी राकेश प्रसाद ने कहा कि जांच के दौरान डीएनए टेस्ट में पाया गया कि घटना का अभियुक्त राहुल राज ही है. कोर्ट में उनकी ओर से दलील दी गयी कि राहुल राज ने पटना में भी एक नाबालिग के साथ रेप किया था. मामला वहां चल रहा है. चोरी वगैरह के कई मामले इस पर दर्ज हैं. यह आदतन अपराधी है. इसने बर्बर तरीके से घृणित अपराध को अंजाम दिया है. इसलिए राहुल को फांसी की सजा दी जाये.
सीबीआइ के एसपी ने कहा
ब्लाइंड केस था, डीएनए रिपोर्ट आने के बाद पकड़ा गया
सीबीआइ के एसपी नागेंद्र प्रसाद ने कहा कि जिस समय केस सीबीआइ के पास आया, उस समय केस में कोई सुराग नहीं था. बिल्कुल ब्लाइंड मर्डर था. कुछ भी पता नहीं था. किसने किया है, कहां किया है, कैसे किया है.
फाॅरेंसिक साक्ष्य में डीएनए रिपोर्ट के आधार पर काफी छानबीन सीबीआइ ने की. अनुसंधानकर्ता और रांची सीबीआइ की टीम ने बेहतर काम किया और यह पुष्ट करने में सफल रही कि राहुल ने घटना को अंजाम दिया है. हमारे विशेषज्ञों ने भी सहयोग किया. तेजी से स्पीडी ट्रायल हुआ. सुकून है कि हमलोग पीड़ित परिवार को न्याय दिला सके.
जज ने नहीं तोड़ी नीब
परंपरा रही है कि किसी दोषी को फांसी की सजा देने के बाद न्यायाधीश कलम की नीब तोड़ देते हैं. इसके बाद वे अपनी कुर्सी से उठकर चले जाते हैं. लेकिन राहुल को फांसी की सजा देने के बाद सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एके मिश्रा द्वारा ऐसा नहीं किया गया.
बचाव पक्ष की गुहार सजा में रियायत दी जाये
बचाव पक्ष के अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह ने कहा कि फांसी तो रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस में ही दी जाती है. सजा से पूर्व सुनवाई के दौरान कोर्ट से आग्रह किया था कि राहुल की उम्र कम है. इसे ध्यान में रखते हुए सजा में रियायत दी जाये. उन्होंने कहा कि कोर्ट का आदेश देखने के बाद अपील में हाइकोर्ट जायेंगे.
इस केस में आगे क्या हो सकता है
सीबीआइ कोर्ट की सजा को हाइकोर्ट कन्फर्म करेगा. निचली अदालत की सूचना के 15 दिनों के अंदर हाइकोर्ट सजा कन्फर्म करने के बिंदु पर निर्णय लेगा.
हाइकोर्ट निचली अदालत की कार्रवाई से संतुष्ट होने के बाद फांसी की सजा बरकरार रख सकता है. अन्यथा सजा को उम्रकैद में तब्दील कर सकता है.
हाइकोर्ट अगर फांसी की सजा बरकरार रखता है, तो सजायाफ्ता अपनी सजा कम कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट भी तमाम बिंदुओं को देखने के बाद फांसी की सजा बरकरार रख सकता है या कम कर उम्रकैद में परिवर्तित कर सकता है. अगर फांसी की सजा बरकरार रखता है, तो बचाव पक्ष सुप्रीम कोर्ट में ही फिर से रिव्यू पिटीशन डाल सकता है. रिव्यू पिटीशन में भी अगर सजा में रियायत नहीं मिलती है, तो बचाव पक्ष राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दे सकता है.
इन धाराओं में हुई सजा
302 सजा-ए-मौत, पांच हजार जुर्माना
376 : उम्रकैद, पांच हजार जुर्माना
449 : उम्रकैद, पांच हजार जुर्माना
201 : साल साल कैद, पांच हजार जुर्माना
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