एमिनेंट स्पीकर अवार्ड से सम्मानित हुए रांची के डॉ वी के जगनाणी

रांची : 13 से 15 दिसंबर 2019 को वाराणसी में संपन्न हुए कार्डयाब्कॉन में रांची के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ वी के जगनाणी को एमिनेंट स्पीकर अवार्ड से सम्मानित किया गया है. डॉ जगनाणी ने न्यू ऑनसेट डायबिटीज (New Onset Diabetes) के लिए नयी खोज में पाये गये जीजीटी (गामा ग्लूटामाइल ट्रांसफरेस) के उपयोग के […]
रांची : 13 से 15 दिसंबर 2019 को वाराणसी में संपन्न हुए कार्डयाब्कॉन में रांची के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ वी के जगनाणी को एमिनेंट स्पीकर अवार्ड से सम्मानित किया गया है. डॉ जगनाणी ने न्यू ऑनसेट डायबिटीज (New Onset Diabetes) के लिए नयी खोज में पाये गये जीजीटी (गामा ग्लूटामाइल ट्रांसफरेस) के उपयोग के बारे में बताया. उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि जिस व्यक्ति का बिना लीवर की गड़बड़ी के जीजीटी बढ़ जाता हो उस व्यक्ति को निकट भविष्य में मधुमेह होने की संभावना होती है.
उन्होंने कहा कि अभी तक हम लोग फास्टिंग, पोस्टप्रांडियल, ओरल ग्लूकोस टोलरेंस टेस्ट और HbA1C से मधुमेह का परीक्षण किया करते थे. अब हमारे पास एक नयी खोज आयी है, जिसमें जीजीटी के बढ़ने पर यह पता चलता है कि निकट भविष्य में उस व्यक्ति विशेष को मधुमेह होने की संभावना है.
एक अन्य व्याख्यान में डॉ वी के जगनाणी ने मोटिवेशनल इंट्रव्यूहिंग का मधुमेह के उपचार में महत्व पर विचार साझा किया. उन्होंने बताया कि मोटिवेशनल इंटरव्यूहिंग के द्वारा चिकित्सक और रोगी दोनों साथ-साथ उपचार के लिए कार्यरत रहते हैं. उन्होंने बताया कि मोटिवेशनल इंटरव्यूहिंग में रोगी अपनी समस्याओं को चिकित्सक के सामने रखते हैं, चिकित्सक इस पद्धति के द्वारा रोगी को यह बताते हैं कि उनके लिए क्या उपयुक्त उपाय हो सकता है. साथ ही उसे इस बात की प्रेरणा भी देते हैं कि उन्हें अपने मधुमेह को नियंत्रण में रखने के लिए औषधि का प्रयोग तथा व्यायाम की अत्यधिक आवश्यकता है.
उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न उपचारों के क्या गुण और अवगुण हो सकते हैं और उस व्यक्ति विशेष के मधुमेह उपचार में कौन-कौन सा उपाय सर्वोत्तम होगा. अपने व्याख्यान में मरीजों को प्रोत्साहित करने के लिए और नियमित रूप से दवा लेने के बारे में बता रहे थे. उन्होंने यह भी बताया कि मधुमेह का महत्वपूर्ण कारण हमारी लैक ऑफ फिजिकल एक्टिविटी और वसायुक्त भोजन है.
उन्होंने यह भी कहा कि क्या खा रहे हैं तथा कैसे खा रहे हैं. यह दोनों बहुत ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि भोजन करते वक्त किसी भी तरह का तनाव नहीं होना चाहिए, सोशल मीडिया जैसे टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. भोजन करते समय इन चीजों का उपयोग उपयोग दुरुपयोग के समान है. उन्होंने कहा कि भोजन स्थिर मन से, खूब चबा कर खाना चाहिए.
उन्होंने यह भी बताया कि भोजन से कम से कम आधा घंटा पहले और 2 घंटा बाद तक जल का सेवन नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि खड़े-खड़े भोजन करने वालों में ज्यादा मात्रा में भोजन किया जाता है, ऐसा अनुसंधान में पाया गया है, इसलिए आलथी पालथी मार कर जहां तक संभव हो जमीन पर आसन बिछाकर बैठकर भोजन करना ही सर्वोत्तम है. भोजन करते समय जहां तक हो बातचीत भी नहीं करनी चाहिए. अपना पूरा ध्यान भोजन करने में, उसे चबाने में ही रखना चाहिए.
डॉ जगनाणी को उनके इस व्याख्यान के लिए एमिनेंट स्पीकर अवार्ड से सम्मानित किया गया. ज्ञात हो कि डॉ जगनाणी कार्डयाब्कॉन सोसायटी के रिजनल कोऑर्डिनेटर हैं तथा कार्डयबजेन जो इस सोसाइटी की जर्नल है उसके संपादक भी हैं.
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