रांची : आंगनबाड़ी केंद्रों के लाभुकों को दिये जा रहे सड़े व अंकुरित आलू, स्वास्थ्य के लिए घातक

Updated at : 12 Dec 2019 6:16 AM (IST)
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रांची : आंगनबाड़ी केंद्रों के लाभुकों को दिये जा रहे सड़े व अंकुरित आलू, स्वास्थ्य के लिए घातक

रांची : राज्य भर के आंगनबाड़ी केंद्रों को रेडी टू इट योजना के बदले अब घर ले जाकर पकाने वाला राशन दिया जा रहा है. इसे टेक होम राशन (टीएचआर) कहते हैं, पर टीएचआर की गुणवत्ता तथा इसकी पैकेजिंग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. गुमला व लातेहार सहित कुछ अन्य जिलों के लाभुकों […]

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रांची : राज्य भर के आंगनबाड़ी केंद्रों को रेडी टू इट योजना के बदले अब घर ले जाकर पकाने वाला राशन दिया जा रहा है. इसे टेक होम राशन (टीएचआर) कहते हैं, पर टीएचआर की गुणवत्ता तथा इसकी पैकेजिंग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
गुमला व लातेहार सहित कुछ अन्य जिलों के लाभुकों को अंकुरित आलू देने की शिकायत मिली है. कई जगह तो सड़े अालू की आपूर्ति हो रही है. वहीं अरहर दाल सहित अन्य (मूंगफली, गुड़, चना व चावल) खाद्य सामग्री प्रिंट पेपर में लपेट कर दी जा रही है. यह दोनों स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है.
खाद्य निदेशालय के सूत्रों के अनुसार, अंकुरित आलू का सेवन घातक है. ऐसे आलू विषाक्त होते हैं. वहीं हरे धब्बे वाला आलू भी विषाक्त होता है. इन धब्बों के बनने का कारण सोलानीन नामक ग्लूकोसाइड का होना है.
सोलानीन आलू की गुणवत्ता व शुद्धता को नष्ट कर देता है. इसी तरह फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी अॉफ इंडिया (एफएसएसएआइ) के निष्कर्ष बताते हैं कि खाद्य सामग्रियों को प्रिंट पेपर से ढंकने या लपेटने से खाद्य पदार्थों के प्रिंट इंक के रसायन व बैक्टीरिया से दूषित हो जाने का खतरा है. प्रिंट पेपर से ढंक कर खाद्य सामग्री देना यानी ग्राहकों में धीमा जहर पहुंचाना है. केरल में प्रिंट पेपर में खाद्य सामग्री बेचने पर रोक है.
करीब 23 लाख लाभुक : गौरतलब है कि राज्य भर के 38432 आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह से तीन वर्ष के बच्चों (15.97 लाख) सहित गर्भवती (3.26 लाख) व धात्री महिलाओं (3.61 लाख) को राशन दिया जाना है. इसके अलावा 13108 कुपोषित बच्चों को भी यह राशन मिलना है.
राशन खरीदने तथा इसे पैक कर आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचाने के लिए समाज कल्याण विभाग ने समाज कल्याण झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रोमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के साथ करार किया है. इसके मुताबिक, सोसाइटी से संबद्ध महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) को राशन खरीद कर केंद्रों तक पहुंचाने का काम मिला है.
खाद्य सामग्री का वितरण प्रिंट पेपर में लपेट कर किया जा रहा है
इन शर्तों का करना है पालन
टेक होम राशन की सभी खाद्य सामग्री (चावल, दाल व अन्य) को लाभुकों के लिए अलग-अलग पैक कर फिर इसे बड़े पैक में एक साथ पैक करना है. इस पैक पर खाद्य सामग्री के विवरण के साथ यह भी लिखा होना चाहिए कि यह राशन बाजार में बिक्री के लिए नहीं है. इसके अलावा राशन की गुणवत्ता फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी अॉफ इंडिया के मानक के अनुसार रखना सुनिश्चित करना है. यह काम जेएसएलपीएस व समाज कल्याण विभाग का है, लेकिन सही से इन शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है़
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