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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 : दिग्गजों के लिए बाजीगरी नहीं आसान, सीपी को डबल हैट्रिक और नवीन के पास हैट्रिक बनाने का मौका

Updated at : 11 Dec 2019 5:41 AM (IST)
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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 : दिग्गजों के लिए बाजीगरी नहीं आसान, सीपी को डबल हैट्रिक और नवीन के पास हैट्रिक बनाने का मौका

रांची, हटिया, कांके, खिजरी और सिल्ली सहित इन आठों सीटों पर मुकाबला कांटे का दिख रहा है. हर दल और उसके प्रत्याशी जीत के लिए पूरे दमखम से लगे हुए हैं. झामुमो, कांग्रेस व राजद महागठबंधन के संयुक्त उम्मीदवारों की स्थिति पहले से बेहतर बतायी जा रही है. वहीं भाजपा और आजसू पार्टी को अपने […]

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रांची, हटिया, कांके, खिजरी और सिल्ली सहित इन आठों सीटों पर मुकाबला कांटे का दिख रहा है. हर दल और उसके प्रत्याशी जीत के लिए पूरे दमखम से लगे हुए हैं. झामुमो, कांग्रेस व राजद महागठबंधन के संयुक्त उम्मीदवारों की स्थिति पहले से बेहतर बतायी जा रही है. वहीं भाजपा और आजसू पार्टी को अपने कैडर पर पूरा भरोसा है. सभा व बैठक में सबने दम दिखा कर मुकाबला रोचक बना दिया है.
रांची : पांच बार के विधायक सीपी सिंह के वर्चस्व को झामुमो की महुआ दे रहीं चुनौती
कुल वोटर 346765
पुरुष वोटर 181603
महिला वोटर 165129
कुल प्रत्याशी 12
रांची विधानसभा सीट पर पिछले तीन दशक से भाजपा का कब्जा है. भाजपा 1990 से यहां चुनाव जीतती रही है. भाजपा ने फिर सीपी सिंह को प्रत्याशी बनाया है.
1996 के 2014 तक रांची की जनता ने सीपी सिंह को विधायक और विधानसभा अध्यक्ष के रूप में देखा. इस बार श्री सिंह नगर विकास मंत्री के रूप में मैदान में हैं, वे डबल हैट्रिक बनाने की दहलीज पर खड़े हैं. सीपी सिंह के सामने विपक्षी प्रत्याशी के रूप में फिर झामुमो की महुआ माजी है. झामुमो के लिए भाजपा के गढ़ में सेंधमारी की चुनौती है. शहरी मतदाताओं में झामुमो पकड़ बनाने में जुटा है. इन प्रत्याशी के बीच चेंबर के पूर्व अध्यक्ष पवन शर्मा भी भाजपा की परंपरागत वोटरों में सेंध मारने की कोशिश में जुटे हैं.
इसी तरह मेयर प्रत्याशी के तौर रांची से चुनाव लड़ चुकी वर्षा गाड़ी को आजसू ने मैदान में उतार दिया है. आजसू की नजर युवा और आदिवासी मतदाताओं पर है. रांची के अधिसंख्य मतदाता भाजपा को वोट देते हैं. हालांकि कभी यहां कांग्रेस की जीत होती रही थी. रांची की सीट से भाजपा के दिग्गज नेता रहे और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा भी विधायक रह चुके हैं. इस बार वोटों का बिखराव रोकना भाजपा की चुनौती है.
हटिया : जीत के लिए शहरी और ग्रामीण दोंनों क्षेत्र के वोटरों को साधना है जरूरी
कुल वोटर 446372
पुरुष वोटर 230871
महिला वोटर 215478
कुल प्रत्याशी 22
हटिया विधानसभा सीट पर इस बार वर्तमान विधायक नवीन जायसवाल भाजपा से प्रत्याशी हैं. 2014 में जायसवाल झाविमो के टिकट से जीते थे. राजधानी से सटे शहरी और ग्रामीण इलाकों वाली इस सीट के चुनावी मुद्दे अलग-अलग होते हैं.
शहरी मतदाता राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों से प्रभावित होते हैं. वहीं ग्रामीण मतदाता स्थानीय समस्याओं से ज्यादा प्रभावित हैं. हटिया की बड़ी आबादी एचइसी वाले इलाके में पड़ती है. कंपनी और कॉलोनियों की स्थिति भी मुद्दा रहती है. कांग्रेस से अजय नाथ शाहदेव की पृष्टभूमि यहां के पुराने घराने से है. वर्षों से इस क्षेत्र में काम करने के कारण संघर्ष की पृष्ठभूमि रही है.
पिछली बार सीट जीतनेवाली झाविमो ने इस बार शोभा यादव को टिकट दिया है. कभी भाजपा के उम्मीदवार को हरा कर यहां से जीत चुकी आजसू एक बार हटिया विधानसभा की सीट जीत चुका है. उसने भरत कासी को उम्मीदवार बनाकर दावेदारी पेश की है. पूर्व में भाजपा, कांग्रेस, आजसू और झाविमो के इस सीट से जीतने के कारण यहां मुकाबला रोचक है. सभी सीट बचाने या फिर पाने की जुगाड़ में लगे हैं.
कांके : भाजपा की अपनी सीट पर संघर्ष को जमीं पर उतारने की कोशिश में समरी
414012 कुल वोटर
पुरुष वोटर 215330
महिला वोटर 198677
कुल प्रत्याशी 12
कांके में भाजपा ने फिर प्रत्याशी बदल दिया है. वर्षों से राजनीतिक संघर्ष कर रहे समरी लाल को प्रत्याशी बनाया है. समरी लाल कांके में कई दलों से चुनाव लड़ चुके हैं. उनके सामने पिछले दो बार से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस, जदयू और आजसू के प्रत्याशी हैं. कांग्रेस से सुरेश बैठा हर बार वोट बढ़ा रहे हैं. वहीं जदयू से डॉ अशोक कुमार नाग चुनाव लड़ रहे हैं. आजसू ने रामजीत गंझू को अपना प्रत्याशी बनाया है.
डॉ नाग ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश के कार्यों को लेकर बिहार के लोगों को साधने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं सुरेश बैठा पिछले 10 वर्षों से कर रहे संघर्ष के साथ जनता के बीच हैं. वहीं समरी लाल को भाजपा की पारंपरिक सीट के साथ-साथ निजी संबंधों के आधार पर भी वोट मिलने की उम्मीद है.
रामजीत गंझू पुराने प्रत्याशियों का वोट बैंक तोड़ शहरी मतदाताओं पर नजर लगाये हुए हैं. कांके उन सीटों में एक है, जहां भाजपा को लगातार जीत मिलती रही है. यहां भाजपा ने सीटिंग विधायक को बदल-बदल कर प्रत्याशी देती और जीतती रही है. इस बार समरी लाल भाजपा के प्रत्याशी हैं, जिन्हें कांग्रेस के सुरेश बैठा से चुनौती मिल रही है.
खिजरी : वर्तमान विधायक को घेरने में लगा है विपक्ष, सीट और प्रतिष्ठा दांव पर
कुल वोटर 334640
पुरुष वोटर 172381
महिला वोटर 162257
कुल प्रत्याशी 14
खिजरी सीट पर भाजपा के वर्तमान विधायक रामकुमार पाहन को घेरने की कोशिश की गयी है. पाहन इससे निकलने के लिए जोर लगा रहे हैं. कांग्रेस ने नया चेहरा राजेश कच्छप को महागठबंधन का प्रत्याशी बनाया है.
कांग्रेस को सीट चले जाने के कारण झामुमो के बागी अंतु तिर्की झाविमो प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं. अंतु पिछली बार भी चुनाव लड़े थे. शहरी और ग्रामीण इलाकों से मिले इस विधानसभा सीट के विधायक पिछले पांच साल के काम के साथ जनता के बीच में हैं. वहीं विपक्षी घेरने के लिए विधायक पर काम नहीं करने का अारोप लगा रहे हैं.
इस विधानसभा क्षेत्र की बड़ी आबादी एचइसी इलाकों में होने के कारण शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के मतदाताओं को साधने की कोशिश हो रही है. आजसू ने रामधन बेदिया को प्रत्याशी बना कर चौंकाने वाला परिणाम देने के लिए मेहनत कर रहा रहा है. सभी प्रत्याशियों की सभाओं और प्रचारों में होनेवाली भीड़ को वोट में बदलने का प्रयास हो रहा है. खिजरी सीट का विस्तार ओरमांझी से लेकर एचइसी-धुुर्वा तक है. मतलब इसके वोटर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र से आते हैं.
सिल्ली : सीमा के सामने आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो की प्रतिष्ठा लगी है दांव पर
कुल वोटर 205648
पुरुष वोटर 104271
महिला वोटर 101375
कुल प्रत्याशी 15
सिल्ली विधानसभा सीट में एक बार फिर से आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. पिछले दो चुनाव से मिल रही हार को जीत में बदलने को लेकर आजसू पार्टी जोर लगा रही है. एनडीए गठबंधन टूटने के बावजूद भाजपा ने इस सीट से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है. इसका फायदा सुदेश महतो को मिलना तय है.
वहीं एक बार फिर से झामुमो ने विधायक सीमा देवी को चुनाव में उतारा है. झामुमो के विधायक रहे पति अमित कुमार की सदस्यता चली जाने के बाद सीमा देवी उपचुनाव में खड़ी हुई थी. वहीं अमित महतो ने 2014 के चुनाव में इस सीट से अपराजित माने जा रहे आजसू पार्टी के सर्वेसर्वा सुदेश महतो को पराजित कर सभी चौंका दिया था. 2000 में सुदेश महतो इस सीट से पहली बार विधायक चुने गये थे.
इस सीट पर आजसू व झामुमो की ओर से शह-मात का खेल चल रहा है. यहां पर सीपीआइएम के प्रत्याशी विश्वदेव सिंह मुंडा व निर्दलीय सुनील कुमार महतो समेत अन्य प्रत्याशी कोण बनाने में जुटे हैं. कभी यहां कांग्रेस के प्रत्याशी केशव महतो कमलेश जीतते रहे हैं. महागठबंधन के तहत यह सीट झामुमो को दी गयी.
बेरमो : भाजपा और कांग्रेस का गढ़ रहे बेरमो में सेंधमारी में लगी आजसू व भाकपा
कुल वोटर 311107
पुरुष वोटर 163666
महिला वोटर 147440
कुल प्रत्याशी 20
बेरमो विधानसभा में इस बार कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है. इसमें कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद सिंह, भाजपा प्रत्याशी योगेश्वर महतो बाटुल, आजसू प्रत्याशी काशीनाथ सिंह एवं भाकपा प्रत्याशी आफताब आलम खान है. वहीं झाविमो प्रत्याशी के रूप में रामकिंकर पांडेय खड़े हैं.
इस बार कांग्रेस के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है. भाजपा व कांग्रेस यहां चुनावी मुकाबले में आमने – सामने है. जबकि आजसू व भाकपा चुनाव सेंधमारी कर अपना रास्ता बनाने में लगी है. कोयला मजदूरों के क्षेत्र के रूप में चर्चित बेरमो विधानसभा सीट पर इस बार चुनावी संघर्ष दिलचस्प होने की संभावना है.
बेरमो विधानसभा क्षेत्र के जरीडीह व पेटरवार प्रखंड के कई पंचायतों के ग्रामीण मतदाता के लिए बेरमो प्रखंड का शहरी व ग्रामीण इलाका किसी भी प्रत्याशी की जीत व हार के लिए निर्णायक साबित होता है. बेरमो में कांग्रेस के दिग्गज नेता और उम्मीदवार राजेंद्र सिंह की क्षेत्र में खासी पकड़ है. भाजपा प्रत्याशी योगेश्वर महतो बाटुल को पार्टी का ज्यादा भरोसा है. जबकि एनडीए से अलग हुए आजसू के प्रत्याशी काशीनाथ सिंह अपने कार्यकर्ता और पार्टी के तेवर के सहारे चुनौती पेश कर रहे हैं.
धनवार : पुरानी गलतियां सुधारने में लगे बाबूलाल, माले को फिर जीतने की उम्मीद
कुल वोटर 307519
पुरुष वोटर 162506
महिला वोटर 145011
कुल प्रत्याशी 14
धनवार विधानसभा सीट से जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी फिर मैदान में हैं. इनकी लड़ाई भाकपा माले के प्रत्याशी सह वर्तमान विधायक राजकुमार यादव, भाजपा के प्रत्याशी लक्ष्मण प्रसाद सिंह व निर्दलीय प्रत्याशी अनूप संथालिया से है.
वैसे इन चारों के बीच झामुमो के प्रत्याशी निजामुद्दीन अंसारी भी ताल ठोंक कर डटे हुए हैं. बाबूलाल और अनूप जहां खुद ही वोट मांग रहे हैं. वहीं भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में मुख्यमंत्री रघुवर दास, स्टार प्रचारक स्मृति ईरानी, झामुमो प्रत्याशी के पक्ष में जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन व राजद नेता तेजस्वी यादव ने सभा की है. पिछले चुनाव में हुई गलतियां सुधारने की कोशिश में लगे बाबूलाल को दूसरे प्रत्याशियों से कड़ा मुकाबला मिल रहा है.
पिछली बार राजकुमार यादव ने श्री मरांडी को 10712 मतों से पराजित कर दिया. इस बार भी प्रत्याशियों की नजर विशेष तौर पर जातीय समीकरण पर ही जा टिकी है. यादव, मुस्लिम और भूमिहार जाति के मतदाता इस सीट पर निर्णायक रहे हैं. इस सीट पर राजकुमार यादव ने भाजपा के दिग्गज रवींद्र राय को हरा कर कब्जा जमाया था. क्षेत्र में वाम विचारधारा के सहारे भी राजकुमार सीट बचाने की उम्मीद पाले हुए हैं.
गोमिया : झामुमो को हैट्रिक बनाने से रोकने में लगे विपक्षी दलों के उम्मीदवार
कुल वोटर 274948
पुरुष वोटर 144924
महिला वोटर 130024
कुल प्रत्याशी 15
गोमिया विधानसभा सीट से इस बार कुल 20 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. इसमें भाजपा के लक्ष्मण कुमार नायक, महागठबंधन से बबीता देवी, आजसू के डॉ लंबोदर महतो, निर्दलीय माधवलाल सिंह, झाविमो के गौतम तिवारी मुख्य रूप से शामिल हैं. इस बार आजसू व भाजपा के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है. योगेंद्र महतो को सजा होने के बाद हुए उप चुनाव में आजसू प्रत्याशी डॉ लंबोदर महतो मात्र 1341 वोट से पराजित हुए थे. 2005 के बाद से इस सीट से भाजपा को जीत नहीं मिली है. आजसू, भाजपा व झामुमो के बीच त्रिकोणात्मक संघर्ष के बीच निर्दलीय प्रत्याशी माधवलाल सिंह तथा झाविमो प्रत्याशी गौतम तिवारी भी चुनाव को दिलचस्प बना दिया है.
माधवलाल सिंह की अपनी पुरानी छवि के साथ चुनावी मैदान में हैं. गोमिया, पेटरवार व कसमार प्रखंड के ग्रामीण व शहरी मतदाता इस सीट पर किसी भी प्रत्याशी के जीत-हार के लिए निर्णायक साबित होते रहे हैं. गौरतलब है कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में माधवलाल सिंह ज्यादा समर्थन हासिल करने में कामयाब होते रहे हैं.
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