टाना भगतों के अधिकार के लिए लड़ने वाली सुनीता कुमारी का निधन, सोशल मीडिया में शोक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Dec 2019 10:48 PM
रांची : खादी, महात्मा गांधी, टाना भगत और सुंदर समाज की सपना देखने वाली समाजसेवी सुनीता कुमारी का बुधवार को निधन हो गया. बताया जा रहा है कि सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी, जिसके बाद उन्हें रांची के सबसे बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. […]
रांची : खादी, महात्मा गांधी, टाना भगत और सुंदर समाज की सपना देखने वाली समाजसेवी सुनीता कुमारी का बुधवार को निधन हो गया. बताया जा रहा है कि सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी, जिसके बाद उन्हें रांची के सबसे बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. सुनीता कुमारी राजधानी रांची के कांके स्थित प्रेमनगर की रहने वालीं थीं.
बताया जा रहा है कि सुनीता कुमारी का अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जाएगा. सुनीता कुमारी के निधन से सोशल मीडिया पर शोक की लहर है. उनको जानने वाले निधन की खबर सुनकर काफी दुखी हैं और उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
जाने मानें पत्रकार मधुकर ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए फेसबुक पर लिखा, ‘अलविदा साथी सुनीता… कांके, प्रेमनगर की साथी सुनीता आज शाम रिम्स पहुंचते ही चल बसी. खादी, गांधी,टानाभगत, और सुंदर समाज के उसके सपने’
रतन तिर्की ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, श्रद्धांजलि…संघर्ष की साथी सुनीता जी नहीं रहीं… आज शाम सांस लेने में तकलीफ़.. सह नहीं पाईं.. हम सभी की ओर से आपको अंतिम झारखंडी जोहार..
आलोका कुजुर ने लिखा, ‘बहुत ही दुःखद खबर…हमलोगों की संघर्ष की साथी सुनीता कुमारी (कांके प्रेमनगर रांची) हमारे बीच नहीं रहीं. उन्हें सांस लेने में दिक्कत के कारण हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था.’
जाने-माने साहित्यकार एके पंकज ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, ‘टन टन टाना…ऐसे भी क्या जाना! सुनीता को आखिरी जोहार !
सुनीता चली गई. लड़ती हुई. अपनी जिंदगी से भी और घर समाज से भी. संघर्ष ने उसका साथ कभी नहीं छोड़ा. हमने उसे एक साथ कई मोर्चों पर लड़ते और भिड़ते देखा है. आदिवासी और विशेषकर टाना भगतों के अधिकार के लिए वह आजीवन समर्पित रही. उसका नहीं होना झारखंडी जनांदोलनों के लिए एक बड़ा नुकसान है. उस प्रखर, लड़ाकू और नेतृत्वकारी साथी को आखिरी जोहार.
झारखंड की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता और झारखंडी साहित्यकार वंदना टेटे ने लिखा, ‘संघर्ष की साथी सुनीता नहीं रहीं. घर से RIMS से SDA फिर RIMS और अंततः सांसों ने नाता तोड़ लिया. पुराने निमोनिया और chest में infection ने और इस निकम्मी व्यवस्था ने छीन ली सांसें तुमसे और तुम्हें हमसे.
छात्र संघर्ष वाहिनी, ग्राम स्वराज अभियान, महिला गरिमा अभियान, वनाधिकार मंच से जुड़कर समाज के लिए काम किया. खासकर टाना भगतों के अधिकारों के लिए उसका योगदान अहम है. तुम्हें आखिरी जोहार साथी. दोष किसका और कितना गिनाकर अब क्या करूं, तुम्हें नाराज नहीं करना इस आखिरी सफर में. आखिरी जोहार’.
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