बिना नक्शा के किये गये निर्माण को नियमित कराने में रुचि नहीं ले रहे लोग

Published at :30 Oct 2019 8:36 AM (IST)
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बिना नक्शा के किये गये निर्माण को नियमित कराने में रुचि नहीं ले रहे लोग

रांची : राज्य में बिना नक्शा के किये गये भवन निर्माण को नियमित (रेगुलराइज) कराने में लोग रुचि नहीं ले रहे हैं. 21 अक्तूबर से राज्य के सभी नगर निकायों में निर्माण को नियमित कराने का आवेदन आमंत्रित किया गया है, पर अभी तक पूरे राज्य में एक भी व्यक्ति ने निर्माण को नियमित कराने […]

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रांची : राज्य में बिना नक्शा के किये गये भवन निर्माण को नियमित (रेगुलराइज) कराने में लोग रुचि नहीं ले रहे हैं. 21 अक्तूबर से राज्य के सभी नगर निकायों में निर्माण को नियमित कराने का आवेदन आमंत्रित किया गया है, पर अभी तक पूरे राज्य में एक भी व्यक्ति ने निर्माण को नियमित कराने के लिए आवेदन नहीं दिया है. ज्ञात हो कि राज्य सरकार ने स्थानीय निकायों को निर्माण नियमित कराने के प्रति लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया है.

रांची में एक लाख से अधिक मकान विवादित या आदिवासी जमीन पर : कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, ऐसे भवनों के निर्माण को नियमित किया जाना है, जिनकी जमीन विवादित या आदिवासी न हो. इससे राजधानी में 50 हजार से अधिक निर्माण नियमित किये जाने का अनुमान लगाया गया था. रांची में करीब एक लाख से अधिक मकान विवादित या आदिवासी जमीन पर बने हैं. इस तरह के निर्माण नियमित नहीं किये जाने हैं.
पूरे राज्य में एक भी आवेदन नहीं आया
क्या है प्रावधान
इसी वर्ष सितंबर महीने में कैबिनेट ने बिना नक्शा के किये गये निर्माण को नियमित करने का फैसला लिया था.
वैसे लोग जिनके घरों का नक्शा अब तक पास नहीं हुआ है, वह निगम में भवन के नक्शा के साथ निर्धारित फीस का डिमांड ड्राफ्ट लगाकर आवेदन कर सकते हैं. इसके तहत वैसे भवनों को नियमित किया जाना है, जो जी प्लस टू या 10 मीटर ऊंचाई के हैं और जिसमें सेटबैक नहीं छोड़ा गया है. निर्माण नियमित करने के लिए 200 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है.
लोग क्यों नहीं दे रहे आवेदन
बिना नक्शे के किये गये निर्माण को रेगुलराइज कराने के लिए आवेदन नहीं किये जाने का कारण लोगों की जरूरत से जुड़ा है. दरअसल, बिना नक्शे के किये गये निर्माण का उपयोग कर रहे लोगों को नक्शा पास कराने की जरूरत समझ में नहीं आ रही है. उनको बिना स्वीकृत नक्शे के किये गये निर्माण पर पानी, बिजली जैसी तमाम सुविधाएं मिल रही हैं. इसके अलावा नगर निकायों में उनका होल्डिंग भी बना लिया गया है.
ऐसे में जमीन पर निर्माण के लिए केवल लोन लेने के उद्देश्य से ही लोगों को नक्शा स्वीकृत कराने की आवश्यकता होती है. इसके अलावा निर्माण के रेगुलराइजेशन के लिए निर्धारित फीस भी लोगों के आवेदन नहीं करने की बड़ी वजह है.
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