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जनता को भटकाव नहीं स्थिरता और विकास चाहिए : संजय सेठ

Updated at : 19 Oct 2019 6:59 PM (IST)
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जनता को भटकाव नहीं स्थिरता और विकास चाहिए : संजय सेठ

रांची : झारखंड मुक्ति मोरचा की बदलाव रैली पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रतिक्रिया दी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद संजय सेठ,प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शहदेव एवम् मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक शामिल थे. सांसद संजय सेठ ने कहा,पाँच हजार की क्षमता वाले मैदान में तीन लाख की भीड़ जुटाने का दावा फेल है. महिलाओं […]

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रांची : झारखंड मुक्ति मोरचा की बदलाव रैली पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रतिक्रिया दी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद संजय सेठ,प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शहदेव एवम् मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक शामिल थे. सांसद संजय सेठ ने कहा,पाँच हजार की क्षमता वाले मैदान में तीन लाख की भीड़ जुटाने का दावा फेल है. महिलाओं के हक और अधिकार के लिए झामुमो कितना गंभीर रहा है इस बात अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन के 27 महीने के मुख्यमंत्रित्वकाल में महिला सशक्तिकरण के लिए एक भी निर्णय नहीं लिया.

झामुमो प्रदेश में आखिर किस तरह का बदलाव करना चाहता है, एक निर्दलीय को मुख्यमंत्री बनाकर राज्य को लूटा गया, क्या यह बदलाव चाहिए ? सीएनटी/एसपीटी एक्ट का उल्लंघन करके एक ही दिन में अलग अलग जगहों पर 16 जमीन की रजिस्ट्री तथा हरमू में गरीब आदिवासियों की जमीन कौड़ी के भाव खरीदकर आदिवासी जमीन मालिकों को और गरीब बनाना जैसा बदलाव चाहते हैं हेमंत सोरेन.

संजय सेठ ने कहा, सोरेन परिवार के लोग विधायक, सांसद बने और बेटा मुख्यमंत्री बने और फिर झारखंड के महापुरुषों को भुलाकर सोरेन परिवार अपने दादा-दादी के नाम पर सोना-सोम्ब्रम धोती साड़ी लूँगी योजना चलाए क्या परिवारवाद को बढ़ावा देने वाले इसी बदलाव की बात कर रहा है सोरेन परिवार.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद संजय सेठ ने कहा, झामुमो ने विनोद बिहारी महतो और निर्मल महतो को भूला दिया. वे लगातार शहीदों का अपमान करते रहे हैं,यहाँ तक कि सभी संवैधानिक मर्यादाओं को तार तार करते हुए झारखंड का मान बढ़ाने वाली विधानसभा का अपमान झामुमो ने किया.
झामुमो ने झारखंड में हमेशा राजनीतिक अस्थिरता बनाकर झारखंड को उग्रवाद और नक्सलवाद के आग में झोंके रखा, जिससे यहां विकास का रास्ता पूणर्तः अवरुद्ध हो गया था, आमजनता महीने में 8 से 10 बार हो रहे झारखंड बंद से त्रस्त हो चुकी थी, व्यापार पूरी तरह से नक्सलियों के दयादृष्टि पर था. 2014 में बनी भाजपा की मजबूत सरकार ने इन सारी परिस्थितियों को बदलते हुए झारखंड में विकास की एक नई इबारत लिखी है.
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