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न्यू मोटर व्हीकल एक्टः क्या गुजरात की तरह अन्य राज्य कम करेंगे जुर्माना? जानिए कितना मुश्किल-आसान

Updated at : 11 Sep 2019 11:25 AM (IST)
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न्यू मोटर व्हीकल एक्टः क्या गुजरात की तरह अन्य राज्य कम करेंगे जुर्माना? जानिए कितना मुश्किल-आसान

रांची: एक सितंबर के बाद से न्यू मोटर व्हीकल एक्ट के कारण देश भरमें (कुछ राज्यों को छोड़ कर) खलबली मची हुई है. इस एक्ट के तहत ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन करने पर जो चालान काटे जाते थे उनके दाम बढ़ा 10 गुणा तक दिए गए थे. नए चालानों के बाद से खबरों में अजीबोगरीब […]

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रांची: एक सितंबर के बाद से न्यू मोटर व्हीकल एक्ट के कारण देश भरमें (कुछ राज्यों को छोड़ कर) खलबली मची हुई है. इस एक्ट के तहत ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन करने पर जो चालान काटे जाते थे उनके दाम बढ़ा 10 गुणा तक दिए गए थे. नए चालानों के बाद से खबरों में अजीबोगरीब चालानों की खबरे आ रहीं थी.पुलिस और पब्लिक के बीच झड़प की भी कई खबरें सामने आईं.
कहीं 80 हजार का चालान कटा तो कहीं वाहन की कीमत से ज्यादा का चालान कटा. न्यू मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद देश के कांग्रेसशासित राज्यों में यह प्रभाव में नहीं आया. पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने विरोध के साथ लागू किया, बढ़े हुए जुर्माने पर सवाल उठाया.
गुजरात सरकारने क्या किया
न्यू मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के 10 दिन बाद गुजरात की भाजपा सरकार ने कई जुर्माने घटा दिए. ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर केंद्र के बढ़ाए जुर्माने को राज्य सरकार ने 25 से 90 फीसदी तक कम कर दिया. वहां के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इसके लिए मानवीय आधार को कारण बताया. उन्होंने कहा कि हम नियम तोड़ने वालों को बढ़ावा नहीं दे रहे.
बस, मोटर व्हीकल एक्ट के आर्टिकल 200 के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल किया है. गुजरात में नए जुर्माने 16 सितंबर से लागू होंगे. अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या अन्य राज्य इस तरह का फैसला ले सकते हैं? यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि न्यू मोटर व्हीकल एक्ट में राज्यों को कुछ जुर्माने घटाने का अधिकार दिया गया है.
हालांकि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कोई भी राज्य इस एक्ट से बाहर नहीं जा सकता. साथ ही कोई भी राज्य मोटर व्हीकल संशोधन बिल में कोई भी राज्य बदलाव नहीं कर सकता.
झारखंड सरकार कर रही विचार
झारखंड की रघुवर सरकार ने नए नियमों के तहत जु्र्माने से आम लोगों को राहत देने की तैयारी कर ली है. राज्य के परिवहन मंत्री सीपी सिंह ने विभाग के अधिकारियों संग बैठक कर इसके लिए रास्ता निकालने का निर्देश दिया है. बताया जा रहा है कि परिवहन मंत्री जनता के साथ पुलिस के रवैये से नाराज हैं.
उन्होंने कहा है कि मंत्री होने से पहले वो एक नागरिक हैं. जानकारी के मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आखिर किन प्रावधानों के तहत मध्य प्रदेश, राजस्थान, बंगाल औऱ हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने नए मोटर एक्ट को लागू नहीं किया. क्या उन्हीं प्रावधानों के तहत झारखंड के लोगों को राहत नहीं दे सकते?
जुर्माने को कहीं विरोध तो कहीं हलचल
न्यू मोटर व्हीकल एक्ट एक सितंबर से लागू हुआ. मगर, कांग्रेस शासित राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के अलावा गुजरात में लागू नहीं हुआ था. पश्चिम बंगाल की ममता सरकार और कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे गैर-बीजेपी शासित राज्यों ने जुर्माने की रकम में इतने बड़े इजाफे पर सवाल उठाए. कर्नाटक और दिल्ली सरकार का भी कहना है कि अगर दूसरे राज्य जुर्माना कम करते हैं, तो वहां भी विचार किया जाएगा.
गुजरात में इन अपराधों का घटा जुर्माना
गुजरात सरकार ने ऐसे मामलों में जुर्माना घटाया है जिनमें राज्य सरकार के पास उन अधिकारियों की नियुक्ति करने का अधिकार है, जो स्पॉट पर ही जुर्माना लेकर व्यक्ति को जाने दे सकते हैं. इनमें सीट बेल्ट या हेल्मेट नहीं पहनना, दोपहिया पर ट्रिपलिंग, स्पीडिंग, बिना पलूशन कंट्रोल सर्टिफिकेट, ड्राइवर्स लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के गाड़ी चलाना शामिल है.
हालांकि सरकार ने शराब पीकर गाड़ी चलाने और ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने का जुर्माना नहीं बदला है क्योंकि इनमें बदलाव का प्रावधान नहीं दिया गया है. इस बारे में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने कहा है कि उनकी सरकार का लक्ष्य ज्यादा जुर्माना लेना या लोगों के खिलाफ केस दर्ज करना नहीं था. हमने मानवीय रुख अपनाया है और जुर्माना कम किया है. ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जाएगी जहां लोगों की जान चली गई हो. जो लोग बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.
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