एक जगह जमीन नहीं मिली, तो देवीपुर में 21 प्लॉट के लिए दो एनजीओ के नाम से अलग-अलग दिया आवेदन

Updated at : 29 Jun 2019 1:32 AM (IST)
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एक जगह जमीन नहीं मिली, तो देवीपुर में 21 प्लॉट के लिए दो एनजीओ के नाम से अलग-अलग दिया आवेदन

सुनील चौधरी, रांची : झारखंड में नर्सिंग, फार्मेसी, बीएड कॉलेज और प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने के लिए एक जगह जमीन का बड़ा टुकड़ा लगभग 25 एकड़ नहीं मिला तो ग्वालियर के एनजीओ ने जमीन हासिल करने के लिए नायाब तरीका इस्तेमाल किया. देवघर स्थित देवीपुर औद्योगिक क्षेत्र में साक्षी सिंह और शशि सिंह ने शैक्षणिक संस्थान […]

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सुनील चौधरी, रांची : झारखंड में नर्सिंग, फार्मेसी, बीएड कॉलेज और प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने के लिए एक जगह जमीन का बड़ा टुकड़ा लगभग 25 एकड़ नहीं मिला तो ग्वालियर के एनजीओ ने जमीन हासिल करने के लिए नायाब तरीका इस्तेमाल किया. देवघर स्थित देवीपुर औद्योगिक क्षेत्र में साक्षी सिंह और शशि सिंह ने शैक्षणिक संस्थान खोलने के लिए दो संस्थानों के नाम से 21 प्लॉट के लिए आवेदन दे दिया.इन 21 प्लॉट की जमीन लगभग 25 एकड़ के करीब है. देवघर में ही संताल-परगना औद्योगिक क्षेत्र विकास (एसपीयाडा) की हाल ही में हुई प्रोजेक्ट क्लीयरेंस कमेटी(पीसीसी) ने इन संस्थानों की मंजूरी भी दे दी है.

अब केवल अधिक बोली लगाकर जमीन हासिल करने की प्रक्रिया ही बाकी है. इधर फेडरेशन अॉफ झारखंड चेंबर अॉफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज(एफजेसीसीआइ) ने एक ही कंपनी को एक साथ 21 प्लॉट दिये जाने पर गड़बड़ी की आशंका जतायी थी. वहीं संताल-परगना के उद्यमियों ने एक ही संस्था द्वारा बोली लगाकर जमीन हासिल करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है.
प्रभात खबर ने जब 21 प्लॉट के मामले को लेकर पड़ताल की तो पाया गया कि ग्वालियर में शैक्षणिक संस्थान संचालित कर रहे परमार एजुकेशन ग्रुप झारखंड में एक ही स्थान पर शैक्षणिक संस्थान खोलना चाहता है. वे 200 करोड़ रुपये निवेश करना चाहते हैं. इसके लिए उन्हें 25 एकड़ जमीन की जरूरत थी. पर एक जगह जमीन नहीं मिल रही थी.
उन्होंने कई बार सरकार के पास भी इसके लिए आवेदन दिया. पर जमीन न मिलने की वजह से संस्थान ने नायाब तरीका निकाला. फरवरी माह में झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार(जियाडा) द्वारा देवीपुर औद्योगिक क्षेत्र के 63 प्लॉटों के अावंटन के लिए आवेदन मांगा था. प्लॉट के लिए आवेदन सिंगल विंडो सिस्टम के अॉनलाइन पोर्टल पर दिया जाता है.
ग्वालियर स्थित एनजीओ निर्मल सेवा आश्रम और शिखा शालिनी शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति के साक्षी सिंह एवं शशि सिंह के नाम कुल 21 प्लॉट के लिए आवेदन दिये गये हैं. इनके द्वारा फार्मेसी कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, हायर एजुकेशन कॉलेज खोलने के लिए आवेदन दिये गये हैं. हालांकि एसपीयाडा की प्रोजेक्ट क्लीयरेंस कमेटी ने परियोजना की मंजूरी दे दी है.अब बिडिंग होगा और जो ज्यादा बोली लगायेगा उसे प्लॉट आवंटित किया जायेगा.
  • नर्सिंग और फार्मेसी कॉलेज के नाम पर 21 प्लॉट के लिए दिया आवेदन
  • प्रोजेक्ट क्लीयरेंस कमेटी ने मंजूरी दी, अब बिडिंग में हिस्सा लेकर लगायेगी बोली
  • चेंबर ने उठाया सवाल एक ही कंपनी को इतना प्लॉट क्यों
ऐसे कुल 21 प्लॉट के लिये आवेदन दिये गये हैं
यूनिट का नाम आवेदक का नाम परियोजना प्लॉट नंबर प्लॉट(वर्ग फीट में) निवेश(लाख में)
निर्मल सेवा आश्रम साक्षी सिंह फार्मेसी एंड नर्सिंग कॉलेज एफ-1 30000 380
शिखा शालिनी शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति साक्षी सिंह नर्सिंग एंड फार्मेसी कॉलेज एफ-10 30000 427
शिखा शालिनी शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति शशि सिंह नर्सिंग एंड फार्मेसी कॉलेज एफ-4 30000 427
छोटे उद्योग को प्राथमिकता मिले : चेंबर अध्यक्ष
एफजेसीसीआइ के अध्यक्ष दीपक कुमार मारू ने कहा कि वर्तमान में छोटे एवं कुटीर स्थानीय उद्योग जो रनिंग हैं, उन्हें भूमि आवंटन में प्राथमिकता मिले. शिक्षण संस्थान, होटल, हॉस्पिटल के लिए अलग एरिया को चिन्हित किया जाये. झारखंड चैंबर ऑफ़ कॉमर्स का यह भी स्पष्ट मानना है कि भूमि आवंटन के लिए ऑक्शन सिस्टम को हटाना ही बेहतर होगा, तभी छोटे छोटे उद्योग स्थापित होंगे. केवल बड़े उद्योगों को प्राथमिकता में लेना उचित नहीं है.
अॉनलाइन कोई भी आवेदन कर सकता है : सचिव
उद्योग सचिव के रविकुमार ने कहा कि जब प्लॉट आवंटन के लिए अॉनलाइन आवेदन मंगाया जाते हैं तो कोई भी अपनी परियोजना के लिए आवेदन दे सकता है. अस्पताल, प्राइवेट यूनिवर्सिटी, तकनीकी शैक्षणिक संस्थान सरकार की प्राथमिकता सूची में है, तो इसे औद्योगिक क्षेत्र में भी खोला जा सकता है.
क्या कहते हैं संस्था के अध्यक्ष
परमार एजुकेशन ग्रुप ग्वालियर के अध्यक्ष प्रशांत सिंह परमार का कहना है कि दोनों संस्था उनका एनजीओ है. साक्षी सिंह उनकी पुत्री व शशि सिंह पत्नी है. वे झारखंड में एक बड़ा एजुकेशन हब बनाना चाहते हैं. 25 एकड़ जमीन की जरूरत है. पर कहीं मिल नहीं रही थी. तब इंडस्ट्रियल एरिया में अॉनलाइन अलग-अलग आवेदन दिया है कि संस्थान खोलने लायक आवश्यक जमीन मिल जाये.
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