रांची : धान खरीद घोटाला के 48 केस पुलिस मुख्यालय भेजे गये

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मुख्यालय भेजी गयी सूची के अनुसार कई केस सिर्फ आइपीसी की धारा 406 और 420 के तहत ही दर्ज किये गये हैं

रांची : धान खरीद में हुए घोटाले को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों के थाना में दर्ज 48 केस की सूची संबंधित जिले के एसपी ने पुलिस मुख्यालय के पास भेज दी है. इनमें से कितने मामले का अनुसंधान सीआइडी करेगी, इस बिंदु पर पुलिस अधिकारियों ने समीक्षा शुरू कर दी है.

समीक्षा में पाया गया है कि देवघर जिला के विभिन्न थानाें में दर्ज केस में से 10 केस का अनुसंधान पूरा कर पुलिस न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट शामिल कर चुकी है. दो केस का अनुसंधान जारी है.

देवघर जिले में अधिकांश केस 406 और 420 के अंतर्गत दर्ज किये गये थे. पाकुड़ में तीन केस का अनुसंधान जारी है. जबकि लिट्टीपाड़ा थाना में दर्ज केस का फिर से अनुसंधान आरंभ किया गया. पलामू में दर्ज एक केस के एक आरोपी की गिरफ्तारी एवं अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने के लिए लंबित है. हजारीबाग में 10 केस में चार केस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लंबित है. जबकि कुछ मामले में न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट और आरोप पत्र समर्पित किया जा चुका है.

गुमला में दर्ज एक केस में पुलिस आरोपियों पर आरोप साबित नहीं कर पायी है. जबकि कोडरमा में दर्ज दो केस में आरोप पत्र समर्पित किया जा चुका है. गोड्डा में दर्ज 10 केस में सात केस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लंबित है. रांची जिला के नगड़ी थाना में दर्ज एक केस अनुसंधान के लिए लंबित है. मुख्यालय भेजी गयी सूची के अनुसार कई केस सिर्फ आइपीसी की धारा 406 और 420 के तहत ही दर्ज किये गये हैं.

कोर्ट ने पुलिस जांच को असंतोषजनक बताया था : उल्लेखनीय है कि 10 मई को हाइकोर्ट में बहुल मंडल के रेगुलर जमानत को लेकर सुनवाई हुई थी. केस लिट्टीपाड़ा थाना में कांड संख्या 35/2017 के तहत धान खरीद घोटाले से संबंधित था. जिसमें हाइकोर्ट ने राज्य में धान खरीद में हुए घोटाले की पुलिस जांच को असंतोषजनक बताया था.

मामले में हाइकोर्ट ने ऑर्डर की कॉपी गृह सचिव को भेजते हुए केस में शपथपत्र दायर करने का निर्देश दिया है. हाइकोर्ट ने गृह सचिव से पूछा कि क्या राज्य सरकार धान खरीद घोटाले मामले में पुलिस की जांच से संतुष्ट है. क्या इस तरह के मामले की जांच के लिए राज्य सरकार की एजेंसी के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है.

क्या राज्य सरकार इस तरह के मामले की जांच सीबीआइ से कराने को तैयार है. क्योंकि मामले में करोड़ों की वित्तीय अनियमितता की बात सामने आयी है. इस गड़बड़ी में सरकारी अधिकारियों के अलावा निजी लोग भी शामिल हैं.

पैक्स के जरिये धान की खरीदारी हुई थी : मालूम हो कि राज्य में सरकारी धन से पैक्स के जरिये धान की खरीदारी हुई थी. लेकिन मामले में केस आइपीसी की धारा 406 और 420 के तहत दर्ज हुआ है. केस की जांच अनुसंधानक द्वारा उचित तरीके से नहीं किया गया है.

अनुसंधान के दौरान आरंभिक साक्ष्य भी एकत्रित नहीं किये हैं. जबकि मामले से संबंधित कुछ केस हजारीबाग, गोड्डा, देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़ सहित अन्य जिले में दर्ज किये जा चुके हैं. केस में बिना उचित जांच के आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट भी दाखिल कर दिया गया है.

हाइकोर्ट के इस निर्देश के बाद तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय ने सभी केस का अनुसंधान सीआइडी से कराने का निर्णय लिया था. डीजीपी के निर्णय के बाद आइजी अरुण सिंह ने इससे संबंधित आदेश भी जारी कर कर दिया था. इसके साथ ही संबंधित जिलों के एसपी से धान खरीद के मामले में दर्ज केस के बारे जानकारी मांगी गयी थी.

धान खरीद में हुई गड़बड़ी को लेकर दर्ज केस

जिला दर्ज केस

लातेहार 01

देवघर 12

पाकुड़ 04

पलामू 01

हजारीबाग 10

सरायकेला 01

गुमला 01

गढ़वा 01

कोडरमा 02

गोड्डा 10

बोकारो 01

खूंटी 01

रांची 01

गिरिडीह 01

साहेबगंज 01

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