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रांची : विद्यार्थियों ने विवि के प्रशासनिक भवन में जड़ा ताला

Updated at : 04 Jun 2019 8:31 AM (IST)
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रांची : विद्यार्थियों ने विवि के प्रशासनिक भवन में जड़ा ताला

फीस वृद्धि व चांसलर पोर्टल के विरोध में छात्र संगठनों ने वीसी से की वार्ता, नहीं बनी सहमति रांची : रांची विश्वविद्यालय में सोमवार को शुल्क वृद्धि व चांसलर पोर्टल के विरोध में छात्र संगठनों ने कुलपति से पहले वार्ता की. फिर विवि के प्रशासनिक भवन में तालेबंदी कर दी. विद्यार्थियों ने नारेबाजी भी की. […]

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फीस वृद्धि व चांसलर पोर्टल के विरोध में छात्र संगठनों ने वीसी से की वार्ता, नहीं बनी सहमति
रांची : रांची विश्वविद्यालय में सोमवार को शुल्क वृद्धि व चांसलर पोर्टल के विरोध में छात्र संगठनों ने कुलपति से पहले वार्ता की. फिर विवि के प्रशासनिक भवन में तालेबंदी कर दी.
विद्यार्थियों ने नारेबाजी भी की. रांची विवि छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा मार्डी के नेतृत्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडे से मिला और शुल्क वृद्धि को कम करने व चांसलर पोर्टल में दाखिला नहीं लेने की मांग की. परिषद के संयोजक संजय महतो ने कुलपति से कहा कि शुल्क में अचानक आठ से दस गुना बढ़ोतरी की गयी है. यह आम छात्रों पर बहुत बड़ा बोझ होगा.
कुलपति की बात से सहमत नहीं हुए छात्र : अभाविप के केंद्रीय संयोजक मोनू शुक्ला ने कहा कि भ्रमण शुल्क, साइकिल स्टैंड शुल्क सहित अन्य शुल्क केवल विवि अपनी पॉकेट भरने के लिए ले रहा है. इस पर कुलपति ने कहा कि ऐसा नहीं है.
हम छात्रों का ग्रुप बीमा भी कर रहे हैं. कुलपति की बात पर छात्र संगठन के सदस्य सहमत नहीं हुए. छात्रों ने कहा कि सभी छात्रों का जीवन बीमा शुल्क जोड़ते हुए अधिकतम 2500 रुपये किया जाये. कुलपति ने छात्रों से कहा कि अब तक शुल्क वृद्धि नहीं हुई थी.
इस कारण इतना शुल्क बढ़ाया जा रहा है. फिर भी आपकी मांगों को तत्काल सिंडिकेट की बैठक बुलाकर उसमें रखा जायेगा और उचित निर्णय लिया जायेगा. परिषद के सदस्यों ने कुलपति से कहा कि अगर इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो अभाविप सिंडिकेट की बैठक का विरोध करेगी. मामले में कुलपति राजभवन जाकर भी बात करेंगे.
अपनी स्वायत्तता खो रहा विवि : चांसलर पोर्टल से नामांकन प्रक्रिया का विरोध करते हुए अभाविप के आशुतोष ने कहा कि चांसलर पोर्टल के कारण ही विवि अपनी स्वायत्तता खो रहा है. साथ ही आम छात्रों को परेशानी हो रही है. वहीं सत्र विलंब होने के डर से विवि एक महीने में परीक्षा लेने का प्रयास करता है, जिससे छात्र मानसिक दबाव में आ जाते हैं.
इस पर कुलपति द्वारा कोई जवाब नहीं देने पर परिषद ने विवि के प्रशासनिक भवन में ताला जड़ दिया. कुलपति ने छात्रों से गेट खोलने की अपील की, लेकिन वे नहीं माने. कुलपति ने कहा कि वे शिक्षा सचिव से मिल कर इस विषय को रखेंगे. छात्रों ने कहा कि मंगलवार सुबह तक सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया, तो पूरे कार्यालय परिसर में तालेबंदी की जायेगी.
वीसी से मिला छात्र संघ का प्रतिनिधिमंडल : रांची. आदिवासी छात्र संघ का एक प्रतिनिधिमंडल फीस वृद्धि के विरोध में संजय महली के नेतृत्व में रांची विवि के वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय से मिला.
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि विवि विद्यार्थियों का बीमा कराना चाहता है, तो यह नि:शुल्क होना चाहिए़ फीस में बढ़ोतरी के जरिये नहीं. संजय महली ने कहा कि देश में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है़ इसका बाजारीकरण हो जा रहा है. इसका असर गरीब विद्यार्थियों पर पड़ रहा है.
बेरोजगारी दिनों दिन बढ़ रही है़ समान शिक्षा प्रणाली लागू होनी चाहिए, ताकि सभी वर्ग के विद्यार्थियों को समान अवसर मिले़ मौके पर आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष राम उरांव, रांची विवि पीजी छात्र संघ के उप सचिव कुलपति मुंडा, बिकुल एक्का, दिनेश मुंडा, मुकेश अगेरिया व माइकल उरांव मौजूद थे़
आजसू ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन : फीस बढ़ोतरी का विरोध करते हुए अखिल झारखंड छात्र संघ ने कहा कि रांची विवि के अधिकांश महाविद्यालयों में गरीब व निम्न वर्ग के विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं. फीस बढ़ जाने से इन्हें परेशानी होगी. सोमवार को प्रदेश सचिव ओम वर्मा के नेतृत्व में कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडे को ज्ञापन सौंपा गया. इस अवसर पर चेतन, सोनू कुमार, राहुल तिवारी, सौरभ, पंचम मुंडा आदि थे.
क्या है मामला : रांची विवि ने 58 वर्ष बाद शिक्षण शुल्क में बढ़ोतरी का निर्णय लिया है. यूनिवर्सिटी में वर्तमान में स्नातक के लिए प्रतिमाह 12 रुपये व स्नातकोत्तर के लिए 18 रुपये शुल्क लिया जाता है.
इसे बढ़ा कर क्रमश: 125 व 150 रुपये करने का निर्णय लिया है. यूनिवर्सिटी स्थापना के बाद से आज तक शिक्षण शुल्क में इस तरह से बढ़ोतरी नहीं की गयी थी. इससे पूर्व वर्ष 2004 में शिक्षण शुल्क में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन छात्र संगठनों के विरोध के कारण इसे वापस ले लिया था.
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