रांची :सीएस को सरयू ने पत्र लिखा, उठाये सवाल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Apr 2019 9:30 AM
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रांची : खाद्य आपूर्ति मंत्री सह पर्यावरण चिंतक सरयू राय ने राज्य के मुख्य सचिव (सीएस) को पत्र लिख कर हिंडालको, मुरी की घटना के संबंध में कुछ सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने कहा है कि घटना की जांच के दौरान इन्हें भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. जैसे- क्या राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (एसपीसीबी) […]
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रांची : खाद्य आपूर्ति मंत्री सह पर्यावरण चिंतक सरयू राय ने राज्य के मुख्य सचिव (सीएस) को पत्र लिख कर हिंडालको, मुरी की घटना के संबंध में कुछ सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने कहा है कि घटना की जांच के दौरान इन्हें भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. जैसे- क्या राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (एसपीसीबी) ने हिंडाल्को को नदी, रेल लाइन, मानव बस्ती व कृषि भूमि के पास कास्टिक तालाब के लिए कंसेंट-टू-इस्टैब्लिश (सीटीइ) तथा कंसेंट टू अॉपरेट (सीटीअो) जारी करने से पहले इस संबंध में किसी टेक्निकल-फिजिब्लिटी अध्ययन संबंधी रिपोर्ट को मद्देनजर रखा था?
पर्षद के अधिकारी अंतिम बार सीटीइ व सीटीअो जारी करने के बाद से अब तक कितनी बार वहां गये. क्या उन्होंने यह जानने की कोशिश की है कि वहां पर्यावरण संबंधी मानकों का अनुपालन हो रहा है या नहीं. क्या कंपनी (हिंडाल्को) केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (सीपीसीबी) के सात नवंबर 2017 के नोटिस के बाद बंद हुई थी? यदि हां, तो कितने दिनों तक. क्या एसपीसीबी के अधिकारियों ने केंद्रीय पर्षद के क्लोजर नोटिस के बाद कंपनी द्वारा दी गयी अनुपालन रिपोर्ट की सत्यता की जांच की.
श्री राय ने लिखा है कि क्या एसपीसीबी ने सीपीसीबी द्वारा उठाये गये पर्यावरण संबंधी मुद्दों की जांच की कोशिश की? इसके लिए क्यों न हिंडाल्को व एसपीसीबी के अधिकारियों सहित पर्षद के अध्यक्ष व सदस्य सचिव के खिलाफ अपना कर्तव्य नहीं निभाने के लिए कार्रवाई की जाये. सरयू राय ने लिखा है कि कास्टिक तालाब टूटने के बाद इससे कृषि भूमि, सतही जल व भूगर्भ जल को हुए नुकसान का आकलन होना चाहिए. हिंडाल्को को प्रभावित क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मानक वाले तौर-तरीके अपना कर स्थिति में सुधार की पहल करने की बात भी श्री राय ने लिखी है.
उन्होंने सीपीसीबी द्वारा शो-कॉज के विरुद्ध हिंडाल्को के विभिन्न पत्र तथा विशेष कर उनमें कही गयी यह बात कि वह (कंपनी) मड पौंड के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन लेने में असमर्थ है, के आलोक में किसी सक्षम जांच एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराने को भी कहा है. कहीं इस घटना को जान-बूझ कर तो अंजाम नहीं दिया गया. श्री राय ने कहा है कि जांच कमेटी में पर्यावरणविद व पारिस्थितिकी विशेषज्ञ भी होने चाहिए तथा जांच निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से हो. एसपीसीबी की भूमिका की भी जांच हो.
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