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15 तक रांची में सरेंडर करें योगेंद्र साव: सुप्रीम कोर्ट

Updated at : 13 Apr 2019 2:42 AM (IST)
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15 तक रांची में सरेंडर करें योगेंद्र साव: सुप्रीम कोर्ट

रांची : पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने गुरुवार को दिये आदेश में योगेंद्र साव को 15 अप्रैल तक रांची के न्यायायुक्त सात की अदालत के समक्ष सरेंडर करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति एसए बोबड़े और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर की पीठ ने शुक्रवार को […]

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रांची : पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने गुरुवार को दिये आदेश में योगेंद्र साव को 15 अप्रैल तक रांची के न्यायायुक्त सात की अदालत के समक्ष सरेंडर करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति एसए बोबड़े और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर की पीठ ने शुक्रवार को साव की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सोमवार (15 अप्रैल) तक योगेंद्र साव को रांची की अदालत में सरेंडर करना होगा.

सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार के वकील तपेश कुमार सिंह ने शीर्ष अदालत को बताया कि योगेंद्र साव के खिलाफ चल रहे बड़कागांव केस सहित सभी 18 मामलों से जुड़े सभी रिकॉर्ड हजारीबाग से रांची की अदालत में स्थानांतरित कर दिये गये हैं. ऐसे में योगेंद्र साव रांची में संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर कर सकते हैं. योगेंद्र साव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल व वैभव श्रीवास्तव केस की पैरवी कर रहे थे, जबकि सॉलिसिटर जेनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष रखा.
अदालत के इस आदेश के बाद पूर्व मंत्री योगेंद्र साव कोर्ट में सरेंडर के बाद बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में न्यायिक हिरासत में रहेंगे, जबकि कोर्ट के अादेश के मुताबिक उनकी पत्नी निर्मला देवी जमानत पर भोपाल में रहेंगी.
चार अप्रैल को जमानत हुई थी रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने चार अप्रैल को जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने पर योगेंद्र साव की जमानत रद्द कर दी थी. वहीं साव और उनकी पत्नी से जुड़े हजारीबाग के सभी मामलों को सुनवाई के लिए रांची की निचली अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था, लेकिन कोर्ट के इस आदेश के बाद साव की ओर से पुन: सुप्रीम कोर्ट में नयी अर्जी दाखिल की गयी थी.
इसमें उनकी ओर से यह मांग की गयी थी कि जब तक हजारीबाग से उनके सभी मामले रांची ट्रांसफर नहीं हो जाते, तब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाये. साथ कोर्ट से यह भी जानकारी देने को कहा गया था कि उन्हें किस अदालत में सरेंडर करना है, यह बताया जाये. वहीं सभी मामलों का स्पीडी ट्रायल कराया जाये.
भोपाल में लगातार किया जमानत की शर्तों का उल्लंघन
योगेंद्र साव और उनकी विधायक पत्नी निर्मला देवी को सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर, 2017 को जमानत दी थी. साथ ही शर्त भी रखी थी कि जमानत के दौरान दोनों भोपाल में रहेंगे. इस दौरान केस को लेकर झारखंड जाने के लिए भोपाल के पुलिस अधीक्षक को उन्हें सूचित करना होगा.
फिर उन्हें पुलिस सुरक्षा में अदालती सुनवाई के लिए झारखंड जाने की अनुमति मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने के दिन (चार अप्रैल को) कहा था कि साव ने भोपाल के स्थानीय अधिकारियों और कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी कर जमानत की शर्तों का उल्‍लंघन किया है.
  • सभी मामलों की सुनवाई रांची स्थित न्याय आयुक्त सात के कोर्ट में होगी
  • साव बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (रांची) में रहेंगे, जबकि उनकी पत्नी जमानत पर भोपाल में रहेंगी
  • जेल जाने के बाद फिर से बेल के लिए साव निचली अदालत का दरवाजा खटखटा सकेंगे
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