रांची : कैंसर से जूझ रहे मासूमों को नयी जिंदगी देने में जुटा रिम्स

Updated at : 05 Apr 2019 8:56 AM (IST)
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रांची : कैंसर से जूझ रहे मासूमों को नयी जिंदगी देने में जुटा रिम्स

दो साल में 40 मरीजों का इलाज कर चुका है रिम्स का पेडियाट्रिक सर्जरी विभाग रांची : कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे बच्चों को झारखंड से बाहर जाकर इलाज नहीं कराना पड़ेगा. रिम्स का पेडियाट्रिक सर्जरी विभाग कैंसरग्रस्त नौनिहालों का जीवन बचाने में सक्षम हो चुका है. इसके कई उदाहरण मौजूद हैं. रिम्स […]

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दो साल में 40 मरीजों का इलाज कर चुका है रिम्स का पेडियाट्रिक सर्जरी विभाग
रांची : कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे बच्चों को झारखंड से बाहर जाकर इलाज नहीं कराना पड़ेगा. रिम्स का पेडियाट्रिक सर्जरी विभाग कैंसरग्रस्त नौनिहालों का जीवन बचाने में सक्षम हो चुका है. इसके कई उदाहरण मौजूद हैं. रिम्स में कैंसर से जूझ रहे नौनिहालों के इलाज की व्यवस्था दो साल पहले शुरू हुई थी. तब से लेकर अब तक कुल 40 बच्चों का इलाज किया जा चुका है.
खास बात यह है कि सभी 40 बच्चों के इलाज पर विभाग के चिकित्सकों का दल लगातार नजर बनाये हुए है. बच्चों की सेहत का फॉलोअप करने के लिए विभाग ने विशेष टीम भी बनायी है, जो बच्चों की दवाओं और चेकअप के बारे में उनके अभिभावकों को समय-समय पर सलाह देती रहती है. विभाग बेहद व्यवस्थित तरीके से काम करता है.
यहां हर मरीज की अलग-अलग फाइल है, जिसमें उसकी पूरी हिस्ट्री दर्ज रहती है. अगर मरीज के परिजन इलाज से संबंधित फाइलें खो देते हैं या फाइल घर पर छूट गयी है, तो चिंतित होनेवाली बात नहीं है. अस्पताल में भी मरीज की एक फाइल सुरक्षित रखी जाती है. इधर, बच्चों के इलाज को लेकर उनके परिजन भी संतुष्ट हैं. पहले उन्हें बच्चे के इलाज के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन रिम्स में उनके बच्चे का इलाज मुफ्त में किया जा रहा है.
1. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में दो साल पहले ही
शुरू की गयी है नौनिहालों के कैंसर के इलाज की व्यवस्था
2. पहले लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे अभिभावकों को बच्चों के इलाज पर, लेकिन रिम्स में मुफ्त में किया जा रहा है इलाज
3. तैयार की जाती है हर मरीज के इलाज की हिस्ट्री, की जाती है नियमित जांच, मौजूदा समय में विभाग में भर्ती हैं पांच मरीज
4. इलाजरत बच्चों का फॉलोअप करने के लिए बनायी गयी है विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम, दिख रहे सकारात्मक परिणाम
केस-1
अर्नव की उम्र डेढ़ साल है. उसे किडनी का कैंसर है. इस बच्चे के परिजन ने बाहर के किसी अस्पताल में ऑपरेशन कराया. लेकिन, बाद बच्चे का कोई फॉलोअप नहीं हुआ, जिससे बच्चे के पूरे पेट में कैंसर फैल गया. यहां आने के बाद बच्चे की स्थिति बेहतर है. तीन कोर्स कीमो पड़ चुका है. तीन हफ्ते तक उसका इलाज होगा.
केस-2
क्रिशु की उम्र ढाई साल है. उसके पिता कुंदन प्रसाद बताते हैं कि उनके बच्चे के पेट में ग्लैंड हो गया था. कई जगहों पर दिखाया लेकिन, कुछ नहीं हुआ. जांच कराया तो पता चला कि किडनी में कैंसर है. रिम्स में पिछले एक साल से आ रहे हैं. अब बच्चा ठीक है. क्रिशु का दो कोर्स कीमो का हो चुका है. कुंदन बताते हैं कि इलाज के लिए वेल्लोर भी गया था. डॉ अभिषेक ने बताया कि इस बच्चे का 15 साल तक फॉलोअप होगा.
केस-3
वारिस की उम्र दो साल है. उसे भी किडनी का कैंसर है. वारिस के पिता प्रकाश बताते हैं कि इसके पेट की दायीं तरफ ग्लैंड हो गया था. अल्ट्रासाउंड कराया उसी में पता चला. वारिस का भी इलाज रिम्स में चल रहा है. 24 सप्ताह तक दवा चलेगा. शनिवार को इस बच्चे का ऑपरेशन होने वाला है.
केस-4
अभिजीत मेहता हजारीबाग का रहने वाला है. इसे भी किडनी का कैंसर हो गया था. पहले इसका इलाज वेल्लोर में चल रहा था. वहां इसे तीन कीमो पड़ चुका है. इसके इलाज में लगभग 1.50 लाख रुपये भी खर्च हो गये. अब इसके परिजन के पास पैसा खत्म हो गया. अब इसका इलाज रिम्स में चल रहा है. अब तक सात कीमाे पड़ चुका है. छह रेडियोथेरेपी भी हो चुका है. कीमाे का कोर्स भी खत्म हो चुका है. एक साल से फॉलोअप में है बच्चा अब स्वस्थ है स्कूल जा रहा है.
व्यवस्थित तरीके से काम कर रही डॉक्टरों की टीम
पेडियाट्रिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ एच बिरुआ और डॉ एसएस साहू के मार्गदर्शन में एक पूरी टीम काम रही है. इस टीम में डॉ अभिषेक रंजन व उनके सहयोगी शामिल हैं. इसमें रेडियोलॉजी विभाग के भी चिकित्सकों का पूरा सहयोग मिल रहा है.
दो मरीज ऐसे थे, जो वेल्लोर से लौट कर आये और उनका यहां इलाज चल रहा है. उनका बच्चा अब स्वस्थ है. अगर मर्ज के बारे में पहले पता चल जाये, तो बच्चों में होनेवाले कैंसर को 90 प्रतिशत तक ठीक किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि बच्चे के शरीर में किसी प्रकार की गांठ नजर आये, तो तुरंत चिकित्सक से मिलें और सलाह लें.
डॉ अभिषेक रंजन, पेडियाट्रिक सर्जरी विभाग
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