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झारखंड आंदोलनकारी रणविजय शाहदेव पंचतत्व में विलीन, शामिल हुए सैकड़ों लोग, आंदोलनकारी को दी भावपूर्ण विदाई

Updated at : 19 Mar 2019 8:22 AM (IST)
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झारखंड आंदोलनकारी रणविजय शाहदेव पंचतत्व में विलीन, शामिल हुए सैकड़ों लोग, आंदोलनकारी को दी भावपूर्ण विदाई

रांची : झारखंड आंदोलनकारी लाल रणविजय नाथ शाहदेव का सोमवार की सुबह रांची में निधन हो गया. शाम को हरमू मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया़ रविवार शाम से ही उनकी तबीयत खराब थी़ पिछले साल 25 सितंबर से वे पक्षाघात से पीड़ित थे़ एक महीने से वे लोगों को नहीं पहचान रहे थे. […]

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रांची : झारखंड आंदोलनकारी लाल रणविजय नाथ शाहदेव का सोमवार की सुबह रांची में निधन हो गया. शाम को हरमू मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया़ रविवार शाम से ही उनकी तबीयत खराब थी़ पिछले साल 25 सितंबर से वे पक्षाघात से पीड़ित थे़ एक महीने से वे लोगों को नहीं पहचान रहे थे. वे अपने पीछे पुत्र डॉ अजय नाथ शाहदेव व दो पुत्री निर्मला शाहदेव व राजश्री शाहदेव समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गये है़ं
उन्हें श्रद्धांजलि देने नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, पद्मश्री मुकुंद नायक, भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव, डॉ देवशरण भगत, मधु मंसूरी हंसमुख, पिंटू शाहदेव, सुनील फकीरा कच्छप, डॉ गिरिधारी राम गौंझू, प्रो हरि उरांव, उमेश नंद तिवारी, झारखंड पार्टी के अशोक भगत, सुबास साहू, अजय टोपनो, मतियस जोजो, उमेश पांडेय, निकोदिम लकड़ा, संजय कुजूर, रिलन होरो, रिजवान अहमद, किरण आइंद, नागपुरी साहित्य संस्कृति मंच व नागपुरी भाषा परिषद सहित विभिन्न संस्थाओं के सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे थे़
झारखंड पार्टी के कांग्रेस में विलय का किया था विरोध : झारखंड के इस लाल ने कभी भी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. पांच फरवरी 1940 को लापुंग के लालगंज में जन्मे लाल रणविजय नाथ शाहदेव बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे.
1957 में वे झारखंड पार्टी से जुड़े़ इस पार्टी में महासचिव का पद संभाला़ 1963 में उन्होंने जयपाल सिंह के झारखंड पार्टी का कांग्रेस में विलय के निर्णय का पुरजोर विराेध करते हुए अपना अलग रास्ता अख्तियार किया़ रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई शुरू कराने में भी उन्होंने महती भूमिका निभायी़
झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति : भाजपा
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि आंदोलनकारी व नागपुरी भाषा के विख्यात कवि लाल रणविजय नाथ शाहदेव का निधन झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है़
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