रांची : हाइकोर्ट के नये भवनों का काम बिना टेंडर के देना गलत

शकील अख्तर झारखंड सरकार ने हाइकाेर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा रांची : हाइकोर्ट के नये भवनों का काम, बिना टेंडर प्रक्रिया पूरा किये ही उसी ठेकेदार को देने को किसी भी तरह सही करार नहीं दिया जा सकता है. पहले से तैयार डीपीआर में नया काम जोड़ने की वजह से हाइकोर्ट के निर्माण की […]
शकील अख्तर
झारखंड सरकार ने हाइकाेर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा
रांची : हाइकोर्ट के नये भवनों का काम, बिना टेंडर प्रक्रिया पूरा किये ही उसी ठेकेदार को देने को किसी भी तरह सही करार नहीं दिया जा सकता है. पहले से तैयार डीपीआर में नया काम जोड़ने की वजह से हाइकोर्ट के निर्माण की लागत में 214 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. हाइकोर्ट निर्माण में कथित गड़बड़ी के आरोपों की सीबीआइ जांच से जुड़ी जनहित याचिका में राज्य सरकार की ओर से दायर शपथ पत्र में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.
प्रक्रिया पूरी नहीं की गयी : शपथ पत्र में कहा गया है कि हाइकोर्ट निर्माण में लगे ठेकेदार को ही वैसे अतिरिक्त निर्माण करने काे कहा गया, जो मूल डीपीआर में नहीं है. एेसे नये कामों की सूची में एक अतिरिक्त एडवोकेट ब्लॉक, गेस्ट हाउस, एसी ट्रेंच, केबल ट्रेंच, एसी प्लांट रूम, पंप हाउस और इलेक्ट्रिक सब स्टेशन शामिल है. शपथ पत्र में कहा गया है कि हाइकोर्ट के निर्माण में लगे वर्तमान ठेकेदार को ही इन नये भवनों का निर्माण कार्य दे दिया गया है. इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं की गयी. इसलिए इसे किसी भी तरह सही नहीं करार दिया जा सकता है.
इस्टीमेट बढ़ाने का प्रस्ताव लंबित : शपथ पत्र में कहा गया है कि हाइकोर्ट के प्रस्तावित पुनरीक्षित इस्टीमेट में नये आइटम जोड़े गये हैं. मूल इस्टीमेट में नये आइटम को जोड़ने से लागत में 214 करोड़ की वृद्धि हो रही है. शपथ पत्र के मुताबिक 366.03 करोड़ लागत पर नये हाइकोर्ट भवन के निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी थी.
फिलहाल इस्टीमेट बढ़ा कर 697.32 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव विभाग के पास विचाराधीन है. इस प्रस्ताव की जांच पड़ताल की जा रही है. अभी इस प्रस्ताव पर राज्य सरकार की स्वीकृति नहीं मिली है. ठेकेदार को जितने में काम दिया गया है, उसमें 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी इस्टीमेट के पुनरीक्षण के बिना ही की जा सकती है. इससे ज्यादा की बढ़ोतरी प्रशासनिक स्वीकृति के बाद ही की जा सकती है.
प्लिंथ ऊंचा करने से भी लागत बढ़ी
हाइकोर्ट निर्माण के दौरान 70 आइटम एेसे हैं, जो निर्धारित मात्रा से कई गुना ज्यादा खर्च हुए हैं. इससे लागत में 113.16 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है.
यह वृद्धि सही है या नहीं, इसकी जांच सिर्फ टेक्निकल एक्सपर्ट द्वारा की जा सकती है. ठेकेदार के साथ एकरारनामा करने के बाद प्लिंथ लेबल चार फुट ऊंचा करने और चार अतिरिक्त कोर्ट रूम बनाने के फैसले से 29.47 करोड़ रुपये लागत बढ़ी है.
इस्टीमेट में जोड़े गये नये आइटम
आइटम लागत (करोड़ में)
आंतरिक सज्जा व फर्नीचर 88.17
अंदर की सड़कें 15.33
सोलर लाइटिंग 14.91
भवनों में प्रकाश व्यवस्था 13.21
परिसर में प्रकाश व्यवस्था 9.38
आइटम लागत (करोड़ में)
एक्टिव नेटवर्किंग 9.12
सीसीटीवी 6.23
वाइ फाइ 5.39
कंप्यूटर,प्रिंटर 5.91
इनफॉर्मेशन डिसप्ले 1.47
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