रांची : फर्जी डिग्री पर नियुक्त हुए तीन लेक्चरर 33 साल बाद बर्खास्त

रांची : रांची विश्वविद्यालय के मांडर कॉलेज में फर्जी डिग्री व प्रमाण पत्र पर नियुक्त हुए तीन लेक्चरर (व्याख्याता) को शनिवार को बर्खास्त कर दिया गया. कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय की अध्यक्षता में हुई सिंडिकेट की आपात बैठक में 33 साल बाद इनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया. जिन व्याख्याताओं की सेवा […]
रांची : रांची विश्वविद्यालय के मांडर कॉलेज में फर्जी डिग्री व प्रमाण पत्र पर नियुक्त हुए तीन लेक्चरर (व्याख्याता) को शनिवार को बर्खास्त कर दिया गया. कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय की अध्यक्षता में हुई सिंडिकेट की आपात बैठक में 33 साल बाद इनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया.
जिन व्याख्याताओं की सेवा समाप्त की गयी है, उनमें सच्चिदानंद प्रसाद, हरिशंकर प्रसाद (अर्थशास्त्र विभाग) और मधुप किशोर (मानवशास्त्र विभाग ) हैं. इनमें से एक वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त होनेवाले थे.
- 1985 से मांंडर कॉलेज में पढ़ा रहे थे तीनों शिक्षक
- 10 साल लग गये रांची विश्वविद्यालय को निर्णय लेने में
- डॉ हरिशंकर का जन्म प्रमाण पत्र था फर्जी
- डॉ हरिशंकर प्रसाद पर नियुक्ति के लिए गलत जन्म प्रमाण पत्र देने का आरोप था, जिसे जांच कमेटी ने सही पाया.
- डॉ मधुप किशोर का फर्जी अंकपत्र
- डॉ मधुप किशोर ने स्नातकोत्तर में 449 अंक होने की बात कही थी, जबकि जांच में पाया गया कि उन्हें 413 अंक मिले थे.
- डॉ सच्चिदानंद दो साल बाद दी थी इंप्रूवमेंट परीक्षा
- उन्हें एमए में इंप्रूवमेंट परीक्षा देने के बाद 52.5 फीसदी अंक मिले थे. नियमत: कोई अभ्यर्थी करंट बैच में ही इंप्रूवमेंट परीक्षा दे सकता है. जबकि डॉ किशोर दो वर्ष बाद इंप्रूवमेंट परीक्षा दी थी.
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