झारखंड में ओबीसी को हर हाल में दें 27 फीसदी आरक्षण, रोस्टर प्रणाली भी सुधारें : सुदेश महतो

Updated at : 18 Feb 2019 6:53 AM (IST)
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झारखंड में ओबीसी को हर हाल में दें 27 फीसदी आरक्षण, रोस्टर प्रणाली भी सुधारें : सुदेश महतो

राष्ट्रीय अधिवेशन सह राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन में बोले सुदेश महतो गरीब सवर्णों को दिये गये आरक्षण का स्वागत करते हैं लेकिन हमें भी हक मिले हम अपने ही राज्य में हक और अधिकार से वंचित हो रहे हैं: सहिस रांची : राज्य में अति पिछड़ा वर्ग (अोबीसी ) को हर हाल में 27 प्रतिशत आरक्षण […]

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  • राष्ट्रीय अधिवेशन सह राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन में बोले सुदेश महतो
  • गरीब सवर्णों को दिये गये आरक्षण का स्वागत करते हैं लेकिन हमें भी हक मिले
  • हम अपने ही राज्य में हक और अधिकार से वंचित हो रहे हैं: सहिस
रांची : राज्य में अति पिछड़ा वर्ग (अोबीसी ) को हर हाल में 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए. इसके लिए लगातार आंदोलन किये जा रहे हैं.
इसके बावजूद अनदेखी की जा रही है. उक्त बातें आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने कही. वे रविवार को एचइसी के सेक्टर टू मैदान में अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ व अखिल पिछड़ा वर्ग महासभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन सह राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. सम्मेलन का आयोजन आरएल चंदापुरी की जयंती के अवसर पर किया गया था.श्री महतो ने कहा कि राज्य में ओबीसी की आबादी 52% है. बावजूद उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा है.
उन्होंने कहा कि गरीब सवर्णों को दिये गये आरक्षण के निर्णय का हम स्वागत करते हैं, लेकिन हमें भी हमारा हक मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि आरक्षण सिर्फ आर्थिक आधार का नहीं, प्रतिनिधित्व व भागीदारी का सवाल है. साथ ही यह हिस्सेदारी का मसला है.
आर्थिक तौर पर इसे जोड़ कर देखा जाना या इस मुद्दे पर किसी तरह का कदम उठाया जाना बड़ी आबादी के हितों के साथ न्याय नहीं हो सकता.राज्य के 13 जिलों में जो रोस्टर प्रणाली लागू की गयी है, उसमें तत्काल सुधार किये जाने की जरूरत है. राज्य में सामाजिक आर्थिक जनगणना की गयी है, जिसे तत्काल सार्वजनिक किया जाये.
जो हमें हमारा हक दिलायेगा उसी को समर्थन देंेगे : चंद्रप्रकाश
पेयजल स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने कहा है कि एकीकृत बिहार में हमलोगों को 27 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त था, लेकिन अलग राज्य गठन के बाद राज्य में पिछड़ा वर्ग अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो गया.
इस बारे में महासभा ने सरकार का कई बार ध्यान दिलाया है, फिर भी अनदेखी की जा रही है. आनेवाले चुनाव में यह सबसे बड़ा मुद्दा होगा. जो हमें हमारा हक दिलायेगा, हम उसी को समर्थन करेंगे. आजसू के विधायक रामचंद्र सहिस ने कहा कि अलग राज्य की लड़ाई में बहुत कुछ खोने के बाद भी हम अपने ही राज्य में हक,अधिकार से वंचित हो रहे हैं.
आरक्षण का मसला देश और राज्य में समानता की लड़ाई है. देश में सभी वर्ग को समान भागीदारी मिलनी चाहिए. पार्टी के वरिष्ठ नेता उमाकांत रजक ने कहा कि 27 प्रतिशत आरक्षण पिछड़ों का हक है. उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग अपना हक लेकर रहेगा. अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संघ, मुंबई के अध्यक्ष प्रदीप ने पिछड़ों के आरक्षण में क्रीमी लेयर के प्रावधान को हटा कर प्रमोशन में आरक्षण की वकालत की. मूल निवासी महिला संघ मुंबई की अध्यक्ष सुमिता पाटिल ने कहा कि हम सरकार से आरक्षण की याचना नहीं कर रहे हैं, हमें हमारा हक देना होगा.
शहीदों को दी गयी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान दो मिनट का मौन रख कर पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गयी. इसके अलावा हाल ही में अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग सभा के उपाध्यक्ष डॉ एमए खान की माता के निधन पर उन्हें भी श्रद्धांजलि दी गयी. इंद्र कुमार सिंह चंदापुरी को अगले राष्ट्रीय अधिवेशन तक के लिए अध्यक्ष चुना गया. तमिलनाड़ु, केरल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंधप्रदेश में पिछड़ों को 30 से 50 प्रतिशत तक आरक्षण हासिल है. बिहार में ही पिछड़ों को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है.
मंच का संचालन सुशील कुमार सिंह, विजय साहू एवं प्रो रविशंकर ने किया. महाधिवेशन को अखिल भारतीय पिछड़ा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रदीप ढ़ोबले, पूर्व डीआइजी सुबोध प्रसाद, एआइबीसीएफ उत्तरप्रदेश के संयोजक डॉ कौशलेंद्र, चेन्नई से जी करुणानिधि, संघ के राष्ट्रीय महासचिव और झारखंड प्रभारी सुशील कुमार सिंह, अखिल भारतीय कुरमी महासंघ बरेली उत्तरप्रदेश के सीएल गंगवार, कार्यकारिणी समिति के सदस्य डॉ बैजनाथ प्रसाद यादव, राज्य के प्रदेश अध्यक्ष संजय प्रसाद कुशवाहा को संबोधित किया. सम्मेलन में डॉ देव शरण भगत, राजेंद्र मेहता, रौशन लाल चौधरी, लंबोदर महतो, यशोदा देवी, सतीश चंद्रवंशी, डॉ दीपक कुशवाहा, भरत काशी साहू, बाल गोविंद प्रजापति, गुड्डू यादव, प्रो रवि शंकर,पार्वती देवी, सरिता देवी , रीना केरकेट्टा सहित अन्य उपस्थित थे .
महाधिवेशन में जो प्रस्ताव पारित किये गये
झारखंड में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने, अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत आरक्षण देने,अनुसूचित जाति को 14 प्रतिशत आरक्षण देने, मंडल आयोग की सभी सिफारिशों को देश में लागू करने, सरकारी एवं अर्द्ध सरकारी क्षेत्रों के साथ–साथ निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण व्यवस्था करने,13 प्वाइंट रोस्टर को निरस्त कर 200 प्वाइंट रोस्टर को पुन: बहाल करने का प्रस्ताव पारित किया गया.
अधिकार नहीं मिला तो सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे
सम्मेलन में सुदेश ने कहा कि हमें यदि हमारा हक नहीं मिला, तो हमलोग सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे. इसके लिए सभी को तैयार रहने को कहा.
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