रांची : 70 हजार पुलिसकर्मियों ने वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर किया काम

Updated at : 13 Feb 2019 8:31 AM (IST)
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रांची : 70 हजार पुलिसकर्मियों ने वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर किया काम

सात सूत्री मांगों को लेकर पुलिसकर्मियों का आंदोलन शुरू रांची : सरकार के पास लंबित मांगें पूरे नहीं होने से नाराज इंस्पेक्टर से लेकर चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ से जुड़े राज्य के 70 हजार से अधिक पुलिस कर्मियों ने आंदोलन के पहले चरण में मंगलवार को काला बिल्ला लगाकर काम किया. झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष […]

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सात सूत्री मांगों को लेकर पुलिसकर्मियों का आंदोलन शुरू
रांची : सरकार के पास लंबित मांगें पूरे नहीं होने से नाराज इंस्पेक्टर से लेकर चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ से जुड़े राज्य के 70 हजार से अधिक पुलिस कर्मियों ने आंदोलन के पहले चरण में मंगलवार को काला बिल्ला लगाकर काम किया. झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र सिंह ने बताया कि 14 फरवरी तक पुलिसकर्मी वर्दी पर काला बिल्ला लगा कर काम करेंगे.
20 फरवरी को सामूहिक उपवास का कार्यक्रम होगा. आंदोलन के दोनों चरण के दौरान अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुई, तो 28 फरवरी से चार मार्च तक सभी पुलिसकर्मी पांच दिनों के सामूहिक अवकाश पर रहेंगे.
योगेंद्र सिंह ने बताया कि आंदोलन के पहले चरण के पहले दिन पूरे राज्य में सभी विभाग में पदस्थापित पुलिसकर्मियों ने काला बिल्ला लगा कर काम किया. वीवीआइपी और पुलिस मुख्यालय में पदस्थापित कर्मियों ने भी आंदोलन को सफल बनाने के काला बिल्ला लगाया. उल्लेखनीय है कि सोमवार को पुलिस एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों के साथ पुलिस मुख्यालय में डीजीपी ने मांगों के संबंध में बैठक की थी. लेकिन मांगों के संबंध में सिर्फ आश्वासन ही मिला था.
इसलिए पुलिस एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों ने यह निर्णय लिया कि जब तक उपरोक्त सातों मांगों के संबंध में आदेश जारी नहीं हो जाता है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इसके बाद मंगलवार से आंदोलन की शुरुआत की गयी.
पुलिस कर्मियों की लंबित मांगें
सीमित विभागीय परीक्षा की नियमावली को बिना कोई परीक्षा लिये समाप्त कर खाली पड़े पदों को प्रोन्नति से भरा जाये.
दिल्ली पुलिस और अन्य राज्यों के तर्ज पर झारखंड पुलिस के कर्मियों को 13 माह का वेतन दिया जाये.
सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के आधार पर पुलिस को मिलने वाला भत्ते बढ़ाया जाये.
एसीपी और एमएसीपी के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन किया जाये.
शहीद या मृत पुलिसकर्मियों के आश्रित पुत्र की नौकरी के लिए निर्धारित उम्र सीमा बढ़ायी जाये और आश्रित परिजनों को मिलनेवाली राशि का 25 प्रतिशत उसके माता-पिता को दिया जाये.
नयी की जगह पुरानी पेंशन नियमावली लागू की जाये.
सीनियर पुलिस अफसरों की तरह कनीय पुलिस कर्मियों को भी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाये.
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