बिहारी का मतलब गाली नहीं इस शब्द का मतलब गर्व है : हास्य कवि शंभू शिखर

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मैं हास्यकवि नहीं हूं, मैं राजनीति की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष करता हूं तो लोगों को उसमें हंसी आती है, उक्त बातें जाने माने हास्यकवि शंभु शिखर ने प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ बातचीत में कही. वे आज प्रभात खबर डॉट कॉम के दफ्तर आये थे. बातचीत में शंभू शिखर ने कहा, दूसरे राज्यों […]

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मैं हास्यकवि नहीं हूं, मैं राजनीति की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष करता हूं तो लोगों को उसमें हंसी आती है, उक्त बातें जाने माने हास्यकवि शंभु शिखर ने प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ बातचीत में कही. वे आज प्रभात खबर डॉट कॉम के दफ्तर आये थे. बातचीत में शंभू शिखर ने कहा, दूसरे राज्यों में बिहारियों की ऐसी छवि बन गयी है मानो ‘बिहारी’ एक गाली है, लेकिन इस शब्द के पीछे गौरव और भारत का इतिहास छिपा है. अगर हम भारत के इतिहास से बिहार को बाहर कर दें तो इतिहास बचेगा ही नहीं. पढ़ें उनसे हुई पूरी बातचीत.

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बिहार के गौरव को वापस लाना है

शंभू शिखर ने ‘हम धरती पुत्र बिहारी हैं ’कविता लिखी है. इस कविता को वह कई जगहों पर गर्व से सुनाते हैं. इस कविता का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, मैंने यह कविता दुबई में सुनायी थी वहां बिहार के साथ- साथ देश के कई राज्यों के लोग थे. पाकिस्तान से भी ढेर सारे लोग आये थे. इस कविता के बाद लोगों की प्रतिक्रिया बेहद अच्छी थी. कई लोगों ने आकर कहा, जहां की धरती इतनी पावन है हमारा जन्म वहां क्यों नहीं हुआ.

बिहार का हूं लेकिन बड़े आयोजन में याद नहीं करते थे प्रभात खबर के आयोजन के बाद आ रहा है बुलावा

शंभू शिखर बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले हैं. लंबे वक्त तक दिल्ली में रहे और कविता के प्रति अपनी रुचि को बचाये रखा. सब टीवी पर आने वाले शो वाह.. वाह में पहली बार उन्हें हिस्सा लेने का मौका मिला. साल 2005 में वह इस शो के जरिये पहली बार टीवी में दिखे इसके बाद कई तरह के आयोजन में हिस्सा लेते रहे. शंभू शिखर के नाम कई तरह पुरस्कार हैं.

उन्होंने बताया कि मैं बिहार का हूं लेकिन मुझे वहां बड़े आयोजन में याद नहीं किया जाता था. मैंने बिहार में इससे पहले कुछ चुनिंदा कार्यक्रम ही किये थे लेकिन प्रभात खबर ने वहां गुरू सम्मान कार्यक्रम में मुझे बुलाया इसके बाद बिहार से बुलावा आने लगा है. खुशी होती है कि मेरा जन्म ऐसी धरती में हुआ. मैं दूसरे राज्यों में देखता हूं वहां के महापुरुषों को कैसे याद किया जाता है, कैसे सम्मान दिया जाता है . बिहार में भी हमें अपने इतिहास पर गर्व करना सीखना चाहिए.

बिहार के इतिहास पर और नायकों पर काम करूंगा

शंभू शिखर ने बातचीत में कहा, मैं बिहार के उन नायकों पर काम करूंगा जिनकी कहानी कम लोगों को पता है वीर कुंवर सिंह को बिहार में ही कम लोग जानते हैं मैं उन पर काम कर रहा हूं. कविता के मंच पर उनचीजों को लेकर आऊंगा जो बिहार और बिहारियों को गर्व करने का अवसर देंगे.

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