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रांची : थायरॉयड की पहचान के लिए सिर्फ टीएसएच और एफटी-4 की जांच ही जरूरी : डॉ संजय

Updated at : 04 Feb 2019 8:47 AM (IST)
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रांची : थायरॉयड की पहचान के लिए सिर्फ टीएसएच और एफटी-4 की जांच ही जरूरी : डॉ संजय

विशेषज्ञ डॉक्टरों ने विभिन्न रोगों और उनके उपचार पर रखे अपने विचार रांची : रिम्स के फिजिशियन डॉ संजय कुमार सिंह ने बताया कि थायरॉयड के मरीज की सही समय पर पहचान, जांच और इलाज की जरूरत होती है. बीमारी की पहचान के लिए महंगी जांच कराने की जरूरत नहीं होती है. मरीज का सिर्फ […]

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विशेषज्ञ डॉक्टरों ने विभिन्न रोगों और उनके उपचार पर रखे अपने विचार
रांची : रिम्स के फिजिशियन डॉ संजय कुमार सिंह ने बताया कि थायरॉयड के मरीज की सही समय पर पहचान, जांच और इलाज की जरूरत होती है. बीमारी की पहचान के लिए महंगी जांच कराने की जरूरत नहीं होती है.
मरीज का सिर्फ टीएसएच व एफटी-4 की जांच कराने से बीमारी की पहचान हो जाती है और दवा शुरू कर दी जाती है. डॉक्टर कई बार टीपीओ की जांच कराते है, लेकिन यह महंगी जांच है. इसको कराने की आवश्यकता नहीं है. वह रविवार को होटल बीएनआर में रांची कर्मचारी राज्य बीमा योजना, झारखंड निदेशालय द्वारा आयोजित अपग्रेडेशन सेमिनार में बोल रहे थे.
डॉ सिंह ने कहा 90 फीसदी मरीज की पहचान इस जांच से हो जाती है. थायरॉयड की दवा नहीं लेने से मरीज के ब्रेन का विकास सही से नहीं हो पाता है. सबसे ज्यादा ध्यान गर्भवती महिलाओं में रखना चाहिए.
गर्भवती महिला को 20 सप्ताह तक प्रतिमाह थायराइड की जांच करानी चाहिए. अगर समय पर जांच कर दवा नहीं दी जाती है, तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का बौद्धिक विकास नहीं हो पाता है. रिम्स के त्वचा राेग विशेषज्ञ डॉ डीके मिश्रा ने बताया कि सफेद दाग लाइलाज बीमारी नहीं है. चिकित्सक को समय पर बीमारी की पहचान कर लेने चाहिए व दवा शुरू कर देना चाहिए. समाज में इसकाे लेकर कई भ्रांतियां हैं, लेकिन लोगाें को जागरूक करने की जरूरत है.
अब इलाज के लिए अत्याधुनिक इलाज मौजूद हैं. दंत रोग विशेषज्ञ डॉ पंकज गोयल ने कहा कि दांत की बीमारी छोटे बच्चे से बड़े तक को हाे रही है, लेकिन सही इलाज मरीज को परेशानी से बचा सकती है. सेमिनार में राज्य के सभी चिकित्सालय व अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी शामिल हुए. कार्यक्रम का संचालन डॉ डीके सिन्हा ने किया. आयोजन को सफल बनाने में डॉ परितोष प्रसाद, डॉ दिनेश कुमार, राकेश एवं धीरज आदि का सहयोग रहा.
गुणात्मक चिकित्सा के लिए आयोजित की जाती है कार्यशाला : राज्य बीमा योजना के विशेष सचिव सह निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि विभाग हमेशा अपने चिकित्सकों को अपग्रेड करने के लिए सेमिनार का आयोजन करते रहता है. प्रशिक्षण प्राप्त कर चिकित्सक गुणात्मक चिकित्सा का लाभ राज्य बीमा योजना से जुड़े लाभार्थियों को दें.
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