बिना ट्रेनिंग के काम कर रहे झारखंड के इंजीनियर

Updated at : 29 Jan 2019 9:04 AM (IST)
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बिना ट्रेनिंग के काम कर रहे झारखंड के इंजीनियर

रांची : झारखंड के इंजीनियर बिना ट्रेनिंग के काम कर रहे हैं. वे नयी तकनीक के साथ अपग्रेड नहीं हो पा रहे हैं. सरकार के स्तर पर उनके लिए ट्रेनिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. पथ निर्माण विभाग, भवन निर्माण विभाग व जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों को समय-समय पर नयी तकनीकी से […]

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रांची : झारखंड के इंजीनियर बिना ट्रेनिंग के काम कर रहे हैं. वे नयी तकनीक के साथ अपग्रेड नहीं हो पा रहे हैं. सरकार के स्तर पर उनके लिए ट्रेनिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है.
पथ निर्माण विभाग, भवन निर्माण विभाग व जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों को समय-समय पर नयी तकनीकी से रूबरू कराने के लिए कोई ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट तक नहीं खोला जा सका है. न ही राष्ट्रीय स्तर पर ट्रेनिंग दिलाने के लिए अभियंताओं को बाहर भेजा जा रहा है, जबकि अन्य सेवाओं के पदाधिकारियों के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था है.
अभियंत्रण सेवा के पदाधिकारियों को छोड़ कर दूसरी सेवा के पदाधिकारियों को समय-समय पर या तो राज्य में या राज्य के बाहर ट्रेनिंग दी जा रही है. वे समय के साथ अपग्रेड हो रहे हैं.
खगौल में थी ट्रेनिंग की व्यवस्था : एकीकृत बिहार के समय सिंचाई विभाग के इंजीनियरों के लिए खगौल में ट्रेनिंग की व्यवस्था थी. इंजीनियर वहां जाते थे और प्रशिक्षण प्राप्त करते थे. राज्य अलग होने के समय यह तय हुआ कि झारखंड के इंजीनियर भी वहां जाकर समय-समय पर ट्रेनिंग प्राप्त करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यहां के इंजीनियर खगौल गये ही नहीं.
बन रहे हैं बड़े बजट वाले सड़क-पुल :अब राज्य में बड़े बजट वाले सड़क व पुल बन रहे हैं. हर साल सड़क, पुल व डैम निर्माण के लिए अरबों के बजट का प्रावधान हो रहा है.
फोर लेन सड़क व उच्च स्तरीय पुलों का निर्माण हो रहा है. निर्माण में नयी तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. नयी मशीन व मेटेरियल का भी उपयोग हो रहा है, जबकि इसके अनुकूल इंजीनियरों की ट्रेनिंग नहीं हो पा रही है.
प्रशासनिक प्रशिक्षण की भी है आवश्यकता : यहां के इंजीनियरों को केवल तकनीकी ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रशिक्षण की भी आवश्यकता है.
उन्हें पद के मुताबिक प्रशासनिक कार्य करने में दक्षता हासिल होनी चाहिए. बड़े-बड़े टेंडर निष्पादन की जिम्मेदारी उन पर होती है. बड़े प्रशासनिक फैसले भी उन्हें लेने पड़ते हैं. सहायक अभियंताओं की जब कार्यपालक अभियंता में प्रोन्नति हो जाती है, तो उनकी सेवा ग्रुप बी से बदल कर ग्रुप ए में आ जाती है. इस तरह सेवा बदलने के बाद भी उन्हें तरीके से ट्रेनिंग नहीं मिल रही है.
राज्य में इंजीनियरों को समुचित ट्रेनिंग देने की जरूरत है. उन्हें नयी तकनीकी से अवगत कराने की जरूरत है. यह निरंतर होना चाहिए. इससे इंजीनियर तो दक्ष होंगे ही, इसका प्रभाव राज्य की योजनाओं पर भी अच्छा पड़ेगा.
शिवानंद राय, सेवानिवृत्त अभियंता प्रमुख
अभियंताओं को तकनीकी रूप से जितना दक्ष होना चाहिए, उतना ही उन्हें प्रशासनिक ज्ञान भी होना चाहिए. दोनों क्षेत्र में उन्हें कुशल होने की जरूरत है. ऐसे में यहां सरकार को उनके लिए ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोलने की जरूरत है.
अशोक साह, सेवानिवृत्त अभियंता प्रमुख
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