रांची : रिम्स में निजी एंबुलेंसों के लिए लागू हुई नयी व्यवस्था, मरीज व परिजन को मिलेगी राहत

Updated at : 11 Jan 2019 9:47 AM (IST)
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रांची : रिम्स में निजी एंबुलेंसों के लिए लागू हुई नयी व्यवस्था, मरीज व परिजन को मिलेगी राहत

रांची : रिम्स में एंबुलेंस की नयी व्यवस्था गुरुवार से लागू कर दी गयी है. रिम्स में संचालित निजी एंबुलेंस के संचालकों ने आपसी सहमति से प्रति किमी की दरें तय कर दी हैं. उम्मीद जतायी जा रही है कि इस नयी व्यवस्था से मरीजों को काफी राहत मिलेगी. साथ ही बिचौलियों का प्रभाव भी […]

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रांची : रिम्स में एंबुलेंस की नयी व्यवस्था गुरुवार से लागू कर दी गयी है. रिम्स में संचालित निजी एंबुलेंस के संचालकों ने आपसी सहमति से प्रति किमी की दरें तय कर दी हैं. उम्मीद जतायी जा रही है कि इस नयी व्यवस्था से मरीजों को काफी राहत मिलेगी. साथ ही बिचौलियों का प्रभाव भी कम होगा.
इससे पहले एंबुलेंस बुक करने से पहले मरीज के परिजन को बिचौलियों को भी पैसे देने पड़ते थे. उसके बाद वाहन मालिक को भी प्रति किमी का पैसा देना पड़ता था. गौरतलब है कि रिम्स में 70 से अधिक निजी एंबुलेंस रहते हैं. जबकि, रिम्स प्रबंधन के पास खुद के चार एंबुलेंस हैं. रिम्स में जो वाहन हैं, उनमें चार फोर्स गाड़ियां हैं, जिनके लिए रिम्स प्रबंधन की ओर से प्रति किमी आठ रुपये की दर तय की गयी है. वहीं, निजी एंबुलेंस के लिए अलग-अलग दरें तय हैं. 100 किमी या उससे कम को शॉर्ट व 100 किमी से अधिक को लांग दूरी माना गया है.
दो रजिस्टर रखें, कमेटी भी बनायें : इधर, रिम्स अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप ने निजी एंबुलेंस चालकों को दो रजिस्टर रखने की सलाह दी है. उन्होंने कहा है कि एक रजिस्टर 100 या उससे कम और दूसरा रजिस्टर 100 किमी से अधिक दूरी वाले वाहनों के लिए होगा. सभी वाहनों पर नंबर अंकित करना होगा.
वाहन अपने नंबर के हिसाब से चलेंगे. जिन्हें लांग रूट में जाना है और जिन्हें कम दूरी में जाना है, उनका नंबर भी तय कर लें. उन्होंने यह भी कहा कि निजी वाहन चालकों काएक कमेटी भी बनायें. अध्यक्ष का चुनाव कर लें, ताकि कोई समस्या या किसी प्रकार की बात होने पर उनसे बात की जा सके.
निजी एंबुलेंस की दरें
मारुति ओमनी वैन 10 रुपये प्रति किमी
मारुति इको 11 रुपये प्रति किमी
बोलेरो व सूमो 12 रुपये प्रति किमी
टवेरा 13 रुपये प्रति किमी
पहले यह थी व्यवस्था
पहले रिम्स में एंबुलेंस लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी. लोग जैसे-तैसे जुगत लगाते थे. बिचौलिये मौके पर ही मनमाना भाड़ा तय करते थे. नयी व्यवस्था लागू होने के बाद एंबुलेंस के लिए मरीज के परिजनों को निर्धारित दर ही चुकानी पड़ेगी.
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