रांची : सोहराबुद्दीन-प्रजापति मामले में सीबीआइ कोर्ट के फैसले के बाद माफी मांगे कांग्रेस

Updated at : 03 Jan 2019 9:06 AM (IST)
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रांची : सोहराबुद्दीन-प्रजापति मामले में सीबीआइ कोर्ट के फैसले के बाद माफी मांगे कांग्रेस

प्रोजेक्ट भवन सभागार में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि सोहराबुद्दीन-प्रजापति केस में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश ने सीबीआइ पर तल्ख टिप्पणी की है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सीबीआइ की पूरी जांच में किसी तरह नेताओं को फंसाने के लिए कहानी गढ़ी […]

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प्रोजेक्ट भवन सभागार में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा
रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि सोहराबुद्दीन-प्रजापति केस में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश ने सीबीआइ पर तल्ख टिप्पणी की है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सीबीआइ की पूरी जांच में किसी तरह नेताओं को फंसाने के लिए कहानी गढ़ी गयी थी. इस मामले में अदालत ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है.
इसमें गुजरात, राजस्थान और आंध्रप्रदेश के 21 पुलिसकर्मी शामिल थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने शासनकाल में सोहराबुद्दीन शेख के खिलाफ एफआइआर दर्ज होने के बावजूद सीबीआइ के जरिये सोरहाबुद्दीन शेख एनकाउंटर को फर्जी साबित करने में लगी रही. इसके लिए उसने सीबीआइ का गलत इस्तेमाल किया. अदालत का फैसला आने के बाद कांग्रेस समेत सोनिया गांधी व मनमोहन सिंह को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए. श्री दास बुधवार को प्रोजेक्ट भवन सभागार में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे.
अदालत में पेश किया गवाहों का झूठा बयान : श्री दास ने कहा कि सीबीआइ न्यायाधीश एसजे शर्मा ने सीबीआइ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पूरी जांच किसी तरह राजनेताओं को फंसाने के क्रम में गढ़ी गयी कहानी पर केंद्रित थी.
सीबीआइ ने किसी तरह साक्ष्य तैयार किया और आरोप पत्र में गवाहों का बयान धारा 161 या धारा 164 के तहत दर्ज किया गया झूठा बयान पेश किया. इससे साफ प्रतीत होता है कि सीबीआइ सच का पता लगाने से कहीं ज्यादा पहले गढ़ी गयी कहानी को सही ठहराने की कोशिश में जुटी थी. अदालत ने कहा है कि जांच करने की बजाये सीबीआइ ने वही किया जो उसको लक्षित कहानी के लिए करना जरूरी था. एजेंसी सच का पता लगाने की बजाये कुछ और कर रही थी.
सोनिया-मनमोहन सरकार की थी साजिश : मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को प्रताड़ित करना तत्कालीन सोनिया-मनमोहन सरकार की साजिश थी. इशरत जहां मामले में भी तत्कालीन सोनिया-मनमोहन सरकार ने भाजपा को बदनाम करने की साजिश रची थी. जबकि इशरत जहां का नाम लश्कर-ए-तैयबा की वेबसाइट पर भी था. इशरत की पूरी सच्चाई मुंबई 26/11 के आरोपी आतंकी डेविड कोलमेन हेडली ने अपने बयान में बता ही दिया है.
आतंकियों का महिमामंडन करना कांग्रेस का स्वभाव : श्री दास ने कहा कि कांग्रेस गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी व अमित शाह को फंसाने के लिए एक खतरनाक अपराधी के नाम पर राजनीति तब भी कर रही थी.
आज भी कर रही है, क्योंकि आतंकियों का महिमामंडन करना कांग्रेस का स्वभाव है.आतंकी की फांसी रोकने लिए आधी रात को अदालत का दरवाजा खटखटाना, अपनी सरकार बनवाने के लिए खुलेआम पाकिस्तान की मदद मांगना, आतंकियों को शांतिदूत बताना, आर्मी चीफ को सड़क का गुंडा बताना कांग्रेस के उदाहरण हैं.
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