रांची : विकास योजनाएं कागज से निकलीं, पर पूरी नहीं हो सकीं
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Dec 2018 8:25 AM
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विवेक चंद्र गुजरे 18 वर्षों की तरह इस साल भी राज्य के शहरों का विकास धरातल पर नहीं उतारा जा सका रांची : गुजरे 18 वर्षों की तरह इस साल भी राज्य के शहरों का विकास धरातल पर नहीं उतारा जा सका. विकास योजनाएं कागज से बाहर तो निकलीं, मगर पूरी नहीं की जा सकीं. […]
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विवेक चंद्र
गुजरे 18 वर्षों की तरह इस साल भी राज्य के शहरों का विकास धरातल पर नहीं उतारा जा सका
रांची : गुजरे 18 वर्षों की तरह इस साल भी राज्य के शहरों का विकास धरातल पर नहीं उतारा जा सका. विकास योजनाएं कागज से बाहर तो निकलीं, मगर पूरी नहीं की जा सकीं. सीवरेज-ड्रेनेज से लेकर ठोस कचरा प्रबंधन तक की योजना कागजों पर ही बनी. उसे लागू नहीं किया जा सका.
शहरों के विकास के लिए कानून तैयार करने में सरकार को सफलता जरूर मिल गयी, पर उसे भी अमली जामा नहीं पहनाया जा सका. निकायों को शक्ति दिलाने के बाद भी वर्षों से लटके होल्डिंग टैक्स का पुनरीक्षण के बाद टैक्स का रिवीजन किया गया. रेंट कंट्रोल एक्ट तैयार कर लागू करने के बाद भी मकान मालिकों को नगर निकाय अपने शिकंजे में नहीं ले सके. लॉज और होटलों पर लगाम लगाने के लिए कानून बना, पर उस पर अमल नहीं किया जा सका.
बढ़ा स्मार्ट सिटी का काम : 2018 में स्मार्ट सिटी का काम आगे बढ़ा. निर्माण आउटलाइन खींचने से आगे बढ़ा, पर पूरा नहीं हो सका. एचइसी में कोर कैपिटल का प्रारूप तैयार हो गया. कोर कैपिटल में नया हाइकाेर्ट, नयी विधानसभा, नया सचिवालय, मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के आवास का खाका खींच लिया गया. उच्च न्यायालय के नये भवन निर्माण का काम तेजी से चल रहा है. नयी विधानसभा का कार्य भी काफी तेज गति से चल रहा है. आगामी वर्ष में दोनों ही भवन पूरा होने की उम्मीद जगी है.
सीवरेज-ड्रेनेज निर्माण ने रुलाया : राज्य में कहीं भी सीवरेज-ड्रेनेज का निर्माण पूरा नहीं हो सका है. लेकिन, सीवरेज-ड्रेनेज तैयार करने के लिए शुरू किये गये कार्यों ने शहरों के लोगों को रुला दिया. लगभग 2000 करोड़ रुपये की सीवरेज-ड्रेनेज योजना के नाम शहरों की सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे कर छोड़ दिये गये. लोगों की लाख शिकायतों और मिन्नत के बाद भी खोदी गयी सड़कों को नहीं बनाया गया. ड्रेनेज के लिए बिछाये जा रहे पाइपों के साइज से भी लोग संतुष्ट नहीं हैं.
गरीबों के लिए बने मकान : शहरी गरीबों के लिए मकानों का निर्माण किया गया. गरीबों को मकान आवंटित भी किये गये. प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का काम भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है. योजना के तहत झारखंड में अब तक 1.58 लाख आवास को स्वीकृति मिल चुकी है.
राज्य भर में कुल 24 परियोजना स्थलों का चयन किया गया है. इसके तहत 243 एकड़ जमीन में 3943.8 करोड़ रुपये की लागत से कुल 52,584 आवासों का निर्माण कराया जायेगा. किफायती आवास के तहत 73,950 आवास निर्माण के लिए कुल 43 परियोजना स्थलों का चयन किया है. कुल 370 एकड़ भूमि पर 5546.25 करोड़ रुपये की लागत से आवास निर्माण किया जायेगा.
जो काम हुए
होल्डिंग टैक्स का पुनरीक्षण कर नया टैक्स लागू किया गया
अपार्टमेंट एक्ट लागू हुआ
रेंट कंट्रोल एक्ट लागू हुआ
नगर निकायों का एकाउंट्स मैनुअल बना
राजस्व बढ़ाने के लिए निकायों को शक्ति प्रदान की गयी
काम जो नहीं हो सके
नगर निकायों में अधिकारियों का कैडर नहीं बन सका
निकायों में डाटा इंट्री एकाउंटिंग सिस्टम नहीं बन सका
नयी रांची का निर्माण नहीं हो सका
शहरों में सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम तैयार नहीं किया जा सका
ठोस कचरा प्रबंधन के लिए प्लांट नहीं बनाया जा सका
प्रमुख समस्याएं
सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण पर प्रश्नचिह्न
कूड़ा प्रबंधन के लिए कोई व्यवस्था नहीं
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