रांची : गोड‍्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने कहा वेल में जाने पर स्वत: निलंबन का फैसला प्रजातंत्र के हित में

Updated at : 24 Dec 2018 9:05 AM (IST)
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रांची : गोड‍्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने कहा वेल में जाने पर स्वत: निलंबन का फैसला प्रजातंत्र के हित में

रांची : लोकसभा के वेल में जानेवालों की स्वत: निलंबन के फैसले को डॉ निशिकांत दुबे ने ऐतिहासिक करार दिया है. लोकसभा की नियम समिति में शामिल सांसद निशिकांत ने पूरे मामला पर कहा है कि कांग्रेस नहीं चाहती थी कि इस पर फैसला इसी सत्र में आये. लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे […]

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रांची : लोकसभा के वेल में जानेवालों की स्वत: निलंबन के फैसले को डॉ निशिकांत दुबे ने ऐतिहासिक करार दिया है. लोकसभा की नियम समिति में शामिल सांसद निशिकांत ने पूरे मामला पर कहा है कि कांग्रेस नहीं चाहती थी कि इस पर फैसला इसी सत्र में आये.
लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस फैसले को अगली लोकसभा पर छोड़ने के लिए पत्र लिखा था. इस पर मैंने छत्तीसगढ़ और वर्ष 1997 के प्रस्ताव को हवाला देकर इसे प्रजातंत्र हित जल्द लागू करना की सिफारिश की थी. छत्तीसगढ़ विधानसभा के रूल बुक में यह पहले से ही लागू है कि जो भी बेल में जायेगा, उसे माना जायेगा कि वे सस्पेंड हो गये हैं. यदि आप मानते हैं कि जीत कर हम नहीं आ रहे हैं, तो यह हमारे ऊपर लागू होगा. इससे कोई परेशानी तो नहीं होेगी.
देश भर में जो यह मैसेज जा रहा है कि सांसद काम नहीं करते हैं. केवल हल्ला-हंगामा करते हैं, उस चीजों को धो डालना चाहता हूं. छह दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद ढाह दिया गया. आठ दिसंबर को पार्लियामेंट चालू हो गया. डिबेट हुआ, लंबी-चौड़ी बहस हुई. आज यह होता तो किसी भी कीमत पर पार्लियामेंट चलने नहीं दिया जाता.
प्रस्ताव को पारित करना है अनुकूल समय
निशिकांत ने कहा कि लोकसभा में मैंने कहा है कि यह अनुकूल समय है. कांग्रेस इसका विरोध कर रही है. कांग्रेस चाहती है कि 2019 चुनाव के बाद इसे लागू किया जाये. मेरा मानना है कि यही उचित समय है. 2019 चुनाव के बाद किसकी सरकार बनेगा यह भविष्य के गर्त में है, लेकिन इस पर निर्णय भी होना जाना चाहिए.
आजादी के 50 वर्ष पूरे होने पर आया था प्रस्ताव : निशिकांत ने कहा कि आजादी के 50 वर्ष पूरा होने पर वर्ष 1997 में एक प्रस्ताव आया था. प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, सोमनाथ चटर्जी सहित सभी पॉलिटिक्ल पॉर्टी के लोगों ने उस प्रस्ताव पर साइन किया था. एक क्रॉस पार्टी लाइन में कहा गया था कि जो भी बेल में जायेंगे, उनकी सदस्यता को दिनभर कार्यवाही से निष्कासित कर दिया जायेगा.
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