झारखंड में हृदय रोग अब पहले से ज्यादा जानलेवा
Updated at : 20 Nov 2018 9:33 AM (IST)
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रांची : बीमारियों का संबंध किसी कालखंड तथा उस वक्त की जीवनशैली से भी जुड़ा होता है. वक्त के साथ कई बीमारियों पर काबू पा लिया गया है. उसी तरह वैसी बीमारियां, जो 10 साल पहले नहीं थी या कम थी, वह अब ज्यादा घातक हो गयी हैं. उदाहरण के लिए हृदय रोग अब पहले […]
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रांची : बीमारियों का संबंध किसी कालखंड तथा उस वक्त की जीवनशैली से भी जुड़ा होता है. वक्त के साथ कई बीमारियों पर काबू पा लिया गया है. उसी तरह वैसी बीमारियां, जो 10 साल पहले नहीं थी या कम थी, वह अब ज्यादा घातक हो गयी हैं. उदाहरण के लिए हृदय रोग अब पहले से ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है.
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) व केंद्रीय स्वास्थ्य मंज्ञालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1990 में किसी बीमारी से मरने या अपंग होने वालों में 2.7 फीसदी लोग हृदय रोग से पीड़ित होते थे.
वहीं वर्ष 2016 में ऐसे लोगों की संख्या 6.6 फीसदी हो गयी है. इधर, झारखंड के लिए चिंताजनक बात यह है कि आयरन की कमी वाले या एनिमिया से मरने या अपंग होने वाले लोग भी बढ़ गये हैं. वर्ष 1990 में एनिमिक होने की वजह से मरे या अपंग हुए लोग 2.2 फीसदी थे, जो वर्ष 2016 में बढ़ कर 4.2 यानी करीब दोगुना हो गये हैं. मौत के दूसरे कारणों में भी पहले से इजाफा हुआ है.
उदाहरण के लिए सड़क दुर्घटना. वर्ष 1990 में सड़क दुर्घटना में मरे या अपंग हुए लोगों की संख्या राज्य की कुल मृत या अपंग हुए लोगों के मुकाबले 1.5 फीसदी थी, जो 2016 में 2.9 फीसदी हो गयी है. इन सबके बीच डायरिया अकेली बीमारी या कारण है, जिससे मरने या अपंग होने वाले 1990 में भी सर्वाधिक थे तथा 2016 में भी सबसे अधिक हैं.
इन बीमारियों का प्रकोप बढ़ा : हृदय रोग, एनिमिया, हृदयाघात, सड़क दुर्घटना में लगी चोट, श्रवण शक्ति व देखने की क्षमता में कमी, कमर व पीठ का दर्द, त्वचा संबंधी रोग, माइग्रेन व डायबिटीज.
इन बीमारियों का प्रकोप घटा : खसरा, नवजात संबंधी बीमारियां, नवजात से जुड़ी अन्य समस्याएं, टेटनस, मलेरिया व कालाजार.
इन बीमारियों में मामूली कमी : सांस संबंधी बीमारी, टीबी तथा समय से पूर्व जन्म संबंधी समस्याएं.
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