भगवान बिरसा मुंडा जन्मोत्सव पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन, आदिवासियों के कारण जिंदा है सनातन धर्म : कड़िया मुंडा

Updated at : 15 Nov 2018 12:24 AM (IST)
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भगवान बिरसा मुंडा जन्मोत्सव पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन, आदिवासियों के कारण जिंदा है सनातन धर्म :  कड़िया मुंडा

रांची : सांसद कड़िया मुंडा ने कहा कि सनातन धर्म आदिवासियों के कारण ही जिंदा है. आदिवासियों ने ही इसके मूल तत्वों को जिंदा रखा है. आदिवासियों को स्वाभिमान के साथ कहना चाहिए कि हम इस भारत के मूल निवासी और सनातन धर्म की रक्षा करने वाले है़ं जिन्हें सनातन कहने में कष्ट है, वे […]

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रांची : सांसद कड़िया मुंडा ने कहा कि सनातन धर्म आदिवासियों के कारण ही जिंदा है. आदिवासियों ने ही इसके मूल तत्वों को जिंदा रखा है. आदिवासियों को स्वाभिमान के साथ कहना चाहिए कि हम इस भारत के मूल निवासी और सनातन धर्म की रक्षा करने वाले है़ं जिन्हें सनातन कहने में कष्ट है, वे आदि धर्म कहें.
क्योंकि सनातन और आदि धर्म में अंतर नहीं है़ बिरसा मुंडा ने कहा था कि अपने को पहचानो़ स्वधर्म से श्रेष्ठ कोई धर्म नहीं है और यही बात गीता में भी है़ इसलिए अपने धर्म पर गौरव करे़ं श्री मुंडा बुधवार को वनवासी कल्याण केंद्र द्वारा भगवान बिरसा मुंडा जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में प्रांतीय मुख्यालय परिसर, मोरहाबादी में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे़
उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने अपने स्कूली दिनों में ही समझ लिया था कि सेवा की बात करनेवाले मिशनरियों के पास गरीबों की समस्याएं सुनने का समय नहीं था़ इसके बाद उन्होंने आंदोलन की शुरुआत की, जिसके मुख्य बिंदु जंगल, जमीन, धर्म व संस्कृति थे़ उन्होंने आह्वान किया था कि शिक्षित हों, संगठित हों और देश के लिए चिंतन करे़ं उनकी यह बात आज भी प्रासंगिक है़
यदि संस्कृति एक, तो कब्रिस्तान में क्रूस नहीं पत्थर गाड़ना चाहिए
पत्थलगड़ी के वर्तमान स्वरूप पर श्री मुंडा ने कहा कि यह समाज को तोड़ने की साजिश है और 2019 के चुनाव की तैयारी का हिस्सा है़ आदिवासी क्षेत्रों से सबसे ज्यादा एमपी, एमएलए भाजपा के हैं. इसलिए ऐसी जगहों पर दुष्प्रचार शुरू किया गया है़ ग्राम प्रधान को समझाया गया कि गांव में दो-तीन करोड़ रुपये आयेगा़ संभवत: वे चुनाव बहिष्कार की बात भी कर रहे है़ं जो पत्थलगड़ी करा रहे हैं, उन्हें इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है़
यदि वे पत्थलगड़ी को महत्व देते हैं और यह कहते हैं कि हमारी-तुम्हारी संस्कृति एक है, तो उन्हें अपने कब्रिस्तान में क्रूस की जगह पत्थर गाड़ना चाहिए़ वे जिस दिन से चर्च जाने लगे, उसी दिन से उन्होंने आदिवासियों की सभी परंपराएं, रीति- रिवाज व दस्तूर को छोड़ दिया है़ यदि परंपराओं से इतना ही जुड़ाव था, तो धर्म बदलने की जरूरत नहीं थी़ इस अवसर पर उन्होंने पाहनों व समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया़
वनवासी कल्याण केंद्र के क्षेत्रीय प्रमुख प्रणय दत्त ने कहा कि आज भी धर्मांतरण की साजिश चल रही है़ चर्च बनाने की गति तेज हो रही है़ ग्रामसभा को भी सशक्त करने की आवश्यकता है़ 15 नवंबर को स्वदेशी, स्वधर्म और स्वतंत्रता की नींव मजबूत करने के लिए एक नये अध्याय की शुरुआत होगी़ कार्यक्रम को अखिल भारतीय सरना समाज के सचिव नीलू पाहन, सगुन दास मुंडा, केंद्रीय युवा सरना विकास समिति के अध्यक्ष सोमा मुंडा, झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव, जगलाल पाहन, डॉ एचपी नारायण आदि ने भी संबोधित किया़ संचालन संदीप उरांव ने किया़ मौके पर सज्जन सर्राफ, डॉ सुखी उरांव, देवव्रत पाहन आदि मौजूद थे़
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