सरकारी स्कूल के बच्चों को नि:शुल्क किताब मिलेगी, बाजार में भी मिलेगी राज्य के सरकारी स्कूलों की किताब
Updated at : 11 Nov 2018 12:57 AM (IST)
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रांची : राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ायी जानेवाली कक्षा एक से आठ तक की किताब अब बाजार में भी उपलब्ध होगी. शिक्षा विभाग ने अपने पूर्व के निर्णय में बदलाव की तैयारी की है. राज्य में सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को नि:शुल्क किताब दी जाती है. […]
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रांची : राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ायी जानेवाली कक्षा एक से आठ तक की किताब अब बाजार में भी उपलब्ध होगी. शिक्षा विभाग ने अपने पूर्व के निर्णय में बदलाव की तैयारी की है. राज्य में सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को नि:शुल्क किताब दी जाती है.
सरकार वर्ष 2019-20 से बच्चाें को किताब के बदले पैसा देने का निर्णय लिया था, पर इसमें आ रही कठिनाइयों को देखते हुए अगले शैक्षणिक सत्र में भी बच्चों को किताब देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है.
जेसीइआरटी ने पूर्व के प्रस्ताव में बदलाव किया है. राज्य सरकार के पाठ्यक्रम के आधार पर छपने वाली किताब बाजार में उपलब्ध नहीं होती थी. इस कारण झारखंड सरकार व झारखंड एकेडमिक काउंसिल से मान्यता प्राप्त निजी स्कूल के बच्चों को यह किताब उपलब्ध नहीं हो पाती थी.
अब शिक्षा विभाग ने अगले सत्र से बाजार में भी किताब उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, जिससे कि इन विद्यालय के बच्चों को भी किताब मिल सके. किताब छापने वाले प्रकाशक सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए प्रखंड मुख्यालय तक किताब की आपूर्ति करेंगे, जबकि गैर सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए बाजार में किताब उपलब्ध करायी जायेगी.
अगले माह किताब वितरण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की हो रही है तैयारी
जेसीइआरटी की देखरेख में किताब का वितरण
राज्य में अबतक किताब छपाई व वितरण का कार्य शिक्षा परियोजना की देखरेख में होता था. पर परियोजना अब किताब के लिए टेंडर नहीं करेगी. किताब वितरण कार्य अब झारखंड राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (जेसीइआरटी) करेगी. शिक्षा परियोजना किताब वितरण के कार्य से अलग हो गयी है. शिक्षा परियोजना ने इस आशय का पत्र भी जेसीइआरटी को भेज दिया है. किताब के लिए 60 फीसदी राशि भारत सरकार व 40 फीसदी राशि राज्य सरकार देती है.
किताब देने का क्यों लिया गया निर्णय
शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2019-20 से स्कूली बच्चों को किताब के लिए बैंक खाता में पैसा देने का निर्णय लिया था. इसके लिए प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी थी. बच्चे अपने स्तर से किताब का क्रय करते. जेसीइआरटी को इस प्रक्रिया में यह परेशानी आ रही थी कि पैसा देने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में किताब की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पा रही थी.
इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा गत वर्ष से स्कूलों में पुरानी किताब का बैंक बनाने की प्रक्रिया शुरू की गयी है, जिससे वर्ष 2018 में 12 करोड़ रुपये की बचत हुई थी. इस वर्ष इसे और बढ़ाने की तैयारी है. किताब खरीदने के लिए सभी बच्चों को पैसा देना पड़ता, ऐसे में किताब का बजट बढ़ने की संभावना थी.
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