रांची : 24 लाख बच्चों व महिलाओं को तीन माह से पोषाहार नहीं, एक आपूर्तिकर्ता के कारण फंस गया टेंडर
Updated at : 03 Nov 2018 12:52 AM (IST)
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रांची : आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये बंटने वाले पोषाहार (रेडी-टू-इट) का टेंडर एक आपूर्तिकर्ता के कारण लटक गया है. मध्य प्रदेश की एक कंपनी एमपी एग्रो फूड को कुछ पावरफुल लोग काम दिलाना चाहते हैं. बताया जाता है कि इस लॉबी में शहर का एक उद्योगपति परिवार भी शामिल है. इस कंपनी का तकनीकी बिड […]
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रांची : आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये बंटने वाले पोषाहार (रेडी-टू-इट) का टेंडर एक आपूर्तिकर्ता के कारण लटक गया है. मध्य प्रदेश की एक कंपनी एमपी एग्रो फूड को कुछ पावरफुल लोग काम दिलाना चाहते हैं. बताया जाता है कि इस लॉबी में शहर का एक उद्योगपति परिवार भी शामिल है. इस कंपनी का तकनीकी बिड दो बार रिजेक्ट कर दिया गया है.
अब सरकार ने इस मुद्दे पर महाधिवक्ता की राय लेने की बात कह कर मामला फंसा दिया है. यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा क्यों किया गया है. एक ओर सरकार टेंडर के खेल में फंसी है, वहीं दूसरी ओर राज्य भर के 17 लाख बच्चों तथा करीब सात लाख गर्भवती व धात्री महिलाओं को (कुल 24 लाख को) गत तीन माह से पोषाहार (पंजिरी व उपमा) नहीं मिल रहा है.
इससे पहले ई-टेंडर भरने वाली कंपनियों में शामिल एमपी एग्रो फूड के बारे में विभागीय अधिकारियों को कहा गया था कि इस पर ध्यान दिया जाये, पर तकनीकी बिड में इस आपूर्तिकर्ता का टेंडर रिजेक्ट हो गया. इसके बाद कहा गया कि बिड पर निर्णय लेने के लिए निर्धारित एक अलग कमेटी इस पर निर्णय करे. इस कमेटी ने भी एमपी एग्रो फूड का टेक्निकल बिड रिजेक्ट कर दिया.
अब विभाग से कहा गया है कि वह इस मुद्दे पर महाधिवक्ता की राय ले. इसके बाद विभागीय सचिव ने इस पर निर्णय लेने के लिए फाइल विभागीय मंत्री डॉ लुइस मरांडी के पास भेज दी, जो वहां करीब 15 दिनों तक लंबित रही. इधर, फाइल लौटने के बाद इसे विधि विभाग के पास भेज दिया गया है. पूरक पोषाहार कार्यक्रम के इतिहास में यह पहली बार है, जब इसके वितरण के मामले में इतनी सुस्ती व लापरवाही हो रही है.
अस्थायी व्यवस्था
आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पोषाहार निर्माण व वितरण का काम मई-जून तक तक अस्थायी व्यवस्था की तरह चल रहा था. तब तक पोषाहार उत्पादन व वितरण का काम कर रही तीन कंपनियों मेसर्स आदित्य फ्लोर मिल बोकारो, मेसर्स इंटरलिंक फूड्स प्रा लि दिल्ली व मेसर्स कोटा दाल मिल राजस्थान की कार्य अवधि 30 जून 2017 को ही समाप्त हो गयी थी. पर इन कंपनियों को मार्च-अप्रैल 2018 तक चार बार अवधि विस्तार दिया गया. इसके बाद विभाग ने नौ माह तक पोषाहार आपूर्ति के लिए नया टेंडर निकाला, जो अभी लंबित है.
पोषाहार नहीं देना गैर कानूनी
केंद्रीय महिला विकास मंत्री मेनका गांधी ने गत तीन जुलाई को मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिख कर राज्य में पोषाहार नहीं बंटने के मामले को गैर कानूनी कहा था. उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के प्रावधानों का हवाला देते हुए लिखा था कि पूरक पोषाहार उपलब्ध नहीं कराना हजारों-लाखों बच्चों को कुपोषण की ओर धकेलना है. श्रीमती गांधी ने पोषाहार के टेंडर में विलंब का उल्लेख करते हुए सीएम से आग्रह किया था कि स्थिति सुधारें.
मध्य प्रदेश की कंपनी एमपी एग्रो फूड को कुछ पावरफुल लोग काम दिलाना चाहते हैं
एमपी एग्रो फूड कंपनी को तकनीकी बिड में दो बार रिजेक्ट किया जा चुका है
यह है हाल
- 05 वर्ष तक के करीब 42 लाख बच्चे हैं राज्य में, जिनमें से करीब 20 लाख कुपोषित
- 65 लाख लड़कियां हैं 18 वर्ष से कम उम्र की राज्य में, जिनमें से 67 फीसदी कुपोषित
- 08 लाख बच्चों का जन्म होता है हर वर्ष, जिनमें से चार लाख बच्चे होते हैं कुपोषित
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