रांची : सीएम का दीवाली तोहफा, बेघरों को पांच लाख में मकान, सालाना तीन लाख से कम आये वाले दे सकेंगे आवेदन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Oct 2018 7:27 AM

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रांची : सरकार ने गरीबों को दीपावली का तोहफा देते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्लम के निवासियों को 1.5 लाख रुपये और स्थानीय निकायों में रहने वाले बेघरों को पांच लाख रुपये में मकान देने का फैसला किया है. इसके लिए शहरी किफायती आवास योजना नीति में आवश्यक संशोधन किया गया है. इस […]

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रांची : सरकार ने गरीबों को दीपावली का तोहफा देते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्लम के निवासियों को 1.5 लाख रुपये और स्थानीय निकायों में रहने वाले बेघरों को पांच लाख रुपये में मकान देने का फैसला किया है. इसके लिए शहरी किफायती आवास योजना नीति में आवश्यक संशोधन किया गया है. इस योजना का लाभ 17 जून 2015 से संबंधित स्लम या स्थानीय निकायों में रहने वालों को मिलेगा.
सालाना तीन लाख रुपये या उससे कम कमाने वाले लोग ही योजना के लिए आवेदन दे सकेंगे. आवेदक के पास वोटर कार्ड और बैंक खाता होना आवश्यक है. आवेदक यदि किसी दूसरे जिले का रहने वाला हो, तो वहां से संबंधित व्यक्ति के पास से कोई मकान या जमीन नहीं होने का प्रमाण पत्र लाना होगा. स्लम में 53 हजार और स्थानीय निकाय में 74 हजार मकान की जरूरत का आकलन किया गया है. जिस व्यक्ति को मकान आवंटित किया जायेगा, वह 15 वर्षों तक उसे बेच नहीं सकेगा.
किफायती आवास योजना नीति 2016 में संशोधन : कैबिनेट ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ शहरी गरीबों को देने के लिए किफायती आवास योजना नीति 2016 में संशोधन किया है. इसके तहत पीपीपी मोड पर बनाये जाने वाले मकान का 55 प्रतिशत गरीबों के बीच वितरित किया जायेगा. 45 प्रतिशत पर बिल्डर का अधिकार होगा. बिल्डर उसे बेच सकेंगे.
कैबिनेट ने स्लम में रहने वालों को किफायती योजना का लाभ देने के लिए पीपीपी मोड पर जी प्लस थ्री भवन बनाने का निर्णय लिया है. भवन का प्रत्येक यूनिट 270 से 300 वर्गफीट के बीच होगा. उसमें दो कमरे, एक किचेन, एक वॉशरूम आदि होंगे. आवास योजना नीति में किये गये संशोधन के तहत जमीन के 55 प्रतिशत हिस्से पर इस तरह के मकान बनाये जायेंगे.
बिल्डर 45 प्रतिशत हिस्से पर जो मकान या दुकान बना कर बेचेगा, उसका एक खास प्रतिशत स्टेट डेवलपमेंट फंड में देगा. उस फंड से गरीबों को मकान में अपना अंशदान केवल 1.5 लाख रुपये ही करना होगा. एक फ्लैट की लागत सात से आठ लाख रुपये होने का अनुमान है. इसमें एक लाख रुपये भारत सरकार, एक लाख रुपये राज्य सरकार, 1.5 लाख रुपये लाभुक और शेष रकम लाभांश के रूप में बिल्डर द्वारा दिया जायेगा. लाभुकों का चयन उपायुक्तों की अध्यक्षता में बनी कमेटी करेगी.
महिला लाभुकों के लिए मकान या फ्लैट का निबंधन एक रुपये में किया जायेगा. यदि परिवार में केवल पुरुष ही हों, तो वैसी स्थिति में पुरुष के नाम पर भी एक रुपये में ही निबंधन किया जा सकेगा. वहीं, स्थानीय निकायों में लाभुकों को औसतन प्रति मकान पांच लाख रुपये की दर से भुगतान करना होगा. स्थानीय निकाय क्षेत्र में बनाये जाने वाले जी प्लस थ्री के प्रत्येक फ्लैट की लागत सात से आठ लाख रुपये होने का अनुमान है.
शहरी निकाय में भारत सरकार प्रति फ्लैट 1.5 लाख रुपये और राज्य सरकार एक लाख रुपये का अनुदान देगी. शेष पांच लाख रुपये की राशि का भुगतान लाभुक द्वारा किया जायेगा. स्थानीय निकायों के सीइओ की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा लाभुकों को आवंटन पत्र मिलने के बाद उनको बैंकों से सस्ते दर पर ऋण दिलाने की व्यवस्था की जायेगी. ऋण के लिए लाभुकों को कुछ भी गिरवी रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
स्लम क्षेत्र में रहनेवालों को 1.5 लाख में िमलेंगे घर
अन्य महत्वपूर्ण फैसले
स्थापना दिवस समारोह के लिए जेसीएफ से आठ करोड़ लिया जायेगा
जेसीएफ से विस चुनाव बकाये भुगतान के लिए 1.96 करोड़ व लोस चुनाव बकाया भुगतान के लिए 1.30 करोड़ अग्रिम की स्वीकृति
गोड्डा में 2.001 एकड़ जमीन 69.7 लाख के भुगतान पर रेल मंत्रालय को देने का निर्णय
हंसडीहा-गोड्डा रेल लाइन के लिए 11.94 करोड़ के भुगतान पर 47.886 एकड़ जमीन रेल मंत्रालय को देने की स्वीकृति
विवादित जाति प्रमाण पत्रों की जांच करेगी कमेटी
कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में ओबीसी, पिछड़ा वर्ग एक और दो के विवादित जाति प्रमाण पत्रों की जांच के लिए स्क्रूटनी कमेटी के गठन का फैसला किया. कल्याण विभाग के सचिव इसके अध्यक्ष होंगे. पिछड़ा वर्ग आयोग के सचिव और सरकार द्वारा मनोनीत पिछड़े वर्ग की जातियों में विशेषज्ञता रखने वाले व्यक्ति इसके सदस्य होंगे. कल्याण विभाग द्वारा अधिसूचित अधिकारी स्क्रूटनी कमेटी के सदस्य सचिव होंगे.
इसके अलावा कैबिनेट ने पलामू टाइगर प्रोजेक्ट से विस्थापित होने वाले लोगों को अब 10 लाख के बदले 15 लाख रुपये देने का निर्णय लिया है. 1130 वर्ग किमी क्षेत्र के अंदर पड़ने वाले आठ गांवों के एक हजार परिवारों को दूसरी जगह पुनर्वासित किया जाना है. पूर्व में उनको प्रति परिवार 10 लाख रुपये देने का प्रावधान था. इसमें से 60 प्रतिशत भारत सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार प्रदान करती थी. अब अतिरिक्त पांच लाख रुपये राज्य सरकार देगी. इसके अलावा पुनर्वासित क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी आदि की व्यवस्था भी राज्य सरकार करेगी.
दीपावली पर सरकार ने गरीबों व कमजोर वर्ग के लोगों को 1.27 लाख आवासों का उपहार दिया है. इसमें शहर के स्लम क्षेत्रों में 54 हजार व अन्य बेघर लोगों को 72 हजार आवास दिये जायेंगे. पीएम के संकल्प के अनुरूप झारखंड सरकार हर गरीब को घर देने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है.
रघुवर दास, मुख्यमंत्री
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