सलमान शूटआउट की होगी सीबीआइ जांच, बेल पिटीशन पर हाइकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान

Updated at : 28 Oct 2018 8:39 AM (IST)
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सलमान शूटआउट की होगी सीबीआइ जांच, बेल पिटीशन पर हाइकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान

23 जून 2017 को चतरा के पिपरवार में हुई थी घटना. रांची : बकोरिया कांड में सीबीआइ जांच के आदेश से झारखंड पुलिस उबर भी नहीं पायी थी कि अब चतरा के पिपरवार थाना क्षेत्र के बहेरा गांव निवासी मो सलमान (20 वर्ष) (पिता : अब्दुल जब्बार) शूटआउट मामले में भी हाइकोर्ट ने सीबीआइ जांच […]

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23 जून 2017 को चतरा के पिपरवार में हुई थी घटना.
रांची : बकोरिया कांड में सीबीआइ जांच के आदेश से झारखंड पुलिस उबर भी नहीं पायी थी कि अब चतरा के पिपरवार थाना क्षेत्र के बहेरा गांव निवासी मो सलमान (20 वर्ष) (पिता : अब्दुल जब्बार) शूटआउट मामले में भी हाइकोर्ट ने सीबीआइ जांच का आदेश दे दिया है.
मामले में पांच पुलिसवाले आरोपी हैं. इस मामले में भी कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि सलमान की हत्या का सच सामने लाने में पहले पुलिस और फिर सीआइडी विफल रही है.
इससे लोगों का विश्वास राज्य की एजेंसियों से डिगा है. इसलिए इसकी जांच सीबीआइ को सौंपी जाती है. सलमान हत्याकांड में जेल गये आरक्षी रवि राम ने कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी. हलफनामे में कहा था कि दुर्घटनावश फायरिंग हो गयी थी, इसलिए आइपीसी की धारा 304 के तहत जमानत दी जाये. लेकिन केस डायरी व जांच प्रतिवेदन देखने के बाद कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका रद्द कर दी.
उसी वक्त जस्टिस आनंदा सेन ने बेट पिटीशन पर ही मामले की जांच सीबीआइ से कराने का आदेश दिया. बता दें कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सलमान के बॉडी पर गोली के निशान पाये गये थे. कोर्ट द्वारा आदेश की कॉपी राज्य के गृह सचिव, सीबीआइ निदेशक और डीजीपी को भी भेजी गयी है.
सलमान के पिता ने दर्ज करायी थी प्राथमिकी : जानकारी के अनुसार, 23 जून 2017 की रात पिपरवार थाना के तत्कालीन रात्रि इंचार्ज एएसआइ विनोद कुमार सिंह, अार्म्स गार्ड प्रेम कुमार मिश्र, रवि राम सहित पांच पुलिसकर्मी अब्दुल जब्बार के घर पहुंचे. उन्होंने जब्बार से पुत्र सलमान के बारे में पूछताछ की. आरोप है कि पूछताछ के बाद जब सलमान घर से निकला, तो उक्त पुलिसवालों ने उसे पकड़ लिया और नजदीक से दो गोली मारी थी. वहीं केस डायरी में घटना का उल्लेख भी नहीं किया.
न ही किसी वरीय पुलिस अफसर को मामले की सूचना दी. सलमान को परिजन उसे अस्पताल ले गये थे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था. मामले में अब्दुल जब्बार ने पिपरवार थाने में बेटे की हत्या काे लेकर कांड संख्या 18/2017 दर्ज कराया था.
वहीं, राज्य पुलिस ने जांच में दोषी पाने पर आरक्षी रवि राम को जेल भेज चार्जशीट दाखिल किया था. इस मामले में मजिस्ट्रेट की जांच में यह स्पष्ट कहा गया है कि घटना में हुई फायरिंग दुर्घटनावश हुआ प्रतीत नहीं होता है. मामले में सीआइडी और पुलिस का निष्कर्ष संदेहास्पद है.
सलमान की हत्या के बाद बहेरा के ग्रामीणों ने की थी सड़क जाम : सलमान की हत्या से आक्रोशित बहेरा गांव के लोगों ने शव के साथ सड़क जाम कर दी थी. ग्रामीणों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करने की मांग की थी. सीसीएल के अशोका और पिपरवार कोलियरी से कोयले का ढुलाई और उत्पादन ठप करा दिया था.
सच को सामने लाने में विफल रही सीआइडी व पुलिस, डिगा लोगों का विश्वास. -जस्टिस आनंदा सेन
पूछताछ करने घर गयी थी पुलिस, सलमान बाहर निकला, मार दी गोली
आरोपी पुलिसकर्मियों ने कोर्ट में कहा था कि-दुर्घटनावश फायरिंग हो गयी थी
मृतक के पिता अब्दुल जब्बार ने दर्ज करायी थी हत्या की प्राथमिकी
मजिस्ट्रेट जांच में भी फायरिंग को दुर्घटनावश हुआ प्रतीत नहीं बताया गया था. साथ ही सीआइडी और पुलिस के निष्कर्ष को संदेहास्पद बताया गया था.
कोर्ट को अधिकार, चार्जशीट के बाद दूसरी एजेंसी से करा सकती है जांच
हाइकोर्ट ने मामले की सीबीआइ जांच के आदेश देने से पहले जाहिरा हबीबुल्लाह शेख बनाम गुजरात सरकार के केस का हवाला दिया. कहा कि मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी अगर कोर्ट को लगता है कि अनुसंधान में त्रुटि और कमी है, तो वह केस की जांच सीबीआइ या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से करा सकती है.
सलमान की मां ने कहा : मौत से टूट गया परिवार, अब जगी आस
पिपरवार : सलमान शूटआउट मामले की हाइकोर्ट द्वारा सीबीआइ जांच का आदेश दिये जाने के बाद मृत युवक की मां रोशन आरा ने कहा कि उन्हें कोर्ट पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा कि अब आस जगी है कि उन्हें भी न्याय मिलेगा. रोशन आरा ने कहा कि उनका बेटा घर का इकलौता कमानेवाला सदस्य था.
उसकी मौत के बाद परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है. कोई देखनेवाला नहीं है. एक आरोपी रवि राम को जेल भेज दिया गया, जबकि थानेदार सहित अन्य लोग बाहर घूम रहे हैं.
14 माह बाद भी प्रशासन ने न घर दिया, न दूसरे लड़के को नौकरी : पिता
मृतक के पिता अब्दुल जब्बार का कहना है कि मेरे बेटे को पुलिसवालों ने घर से निकाल कर गोली मारी थी. मामला तूल पकड़ने के बाद तत्कालीन चतरा डीसी ने दो लाख रुपये की सरकारी मदद दी थी.
एक बेटे को नौकरी देने और 50 लाख मुआवजे की मांग उन्होंने प्रशासन से किया था. तत्कालीन एसडीएम ने इंदिरा आवास योजना के तहत घर, शौचालय बनवाने का आश्वासन दिया था. उस वक्त अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कमाल खान भी मौजूद थे.
16 माह बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि फिलहाल वे ठेकेदार के यहां मजदूरी कर परिवार चला रहे हैं. परिवार में मृतक के मां–बाप के अलावा पांच अविवाहित बेटियों में तमन्ना परवीन, तराना, गजाला, उजाला व सजाला के अलावा दो बेटे शाहबाज व अरबाज हैं.
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